विज्ञापन
Home  dharm  shardiya navratri 2025 festival in india regional traditions of bengal gujarat maharashtra delhi other states

Shardiya Navratri 2025: बंगाल से गुजरात तक, जानें कैसे अलग-अलग राज्यों में मनाई जाती है नवरात्रि?

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
साक्षी
सार

Shardiya Navratri Puja: आश्विन मास की शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होनेवाली शारदीय नवरात्रि इस बार 22 सितंबर से देशभर में धूमधाम से मनाई जाएगी। नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना के साथ ही यह पर्व अच्छाई की बुराई पर विजय का प्रतीक बनता है। 

Shardiya Navratri
Shardiya Navratri 2025: आश्विन मास की शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होनेवाली शारदीय नवरात्रि इस बार 22 सितंबर से देशभर में धूमधाम से मनाई जाएगी। नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना के साथ ही यह पर्व अच्छाई की बुराई पर विजय का प्रतीक बनता है। 2025 में यह उत्सव 2 अक्टूबर तक चलेगा, जिसके बाद दशहरा पर महिषासुर पर दुर्गा की जीत का जश्न मनाया जाएगा, लेकिन भारत की विविधता इस पर्व को और भी खास बना देती है। जहां गुजरात में गेर-गेरबा की थिरकनें रातें जगमगा उठती हैं, वहीं बंगाल में दुर्गा पूजा के पंडाल भक्ति और कला का संगम बन जाते हैं। दक्षिण के राज्यों में शांतिपूर्ण गोलू प्रदर्शन और उत्तर में कंजक पूजा की मासूमियत- नवरात्रि हर कोने में अलग-अलग रूप धारण कर लेती है। आइए, इस खबर में जानें कैसे बंगाल से गुजरात होते हुए अन्य राज्यों में यह पर्व अपनी अनूठी परंपराओं से रंग भरता है।

नवरात्रि का सामान्य महत्व

शारदीय नवरात्रि हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन शुक्ल पक्ष में मनाया जाने वाला प्रमुख त्योहार है, जो मां दुर्गा के नौ रूपों- शैलपुत्री से लेकर सिद्धिदात्री तककी आराधना पर केंद्रित होता है। इस दौरान भक्त व्रत रखते हैं, जप-पाठ करते हैं और सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। पर्व का समापन राम की रावण पर विजय के रूप में दशहरा के साथ होता है। लेकिन क्षेत्रीय संस्कृति के कारण यह उत्सव पूरे देश में एकसमान नहीं दिखता। पश्चिम से पूर्व, उत्तर से दक्षिण तक हर राज्य अपनी लोक परंपराओं को इसमें पिरो लेता है, जिससे नवरात्रि एक सांस्कृतिक मेला बन जाता है।

गुजरात

गुजरात में नवरात्रि का जिक्र होते ही मन में चनिया-चोली की चमक और डांडिया की ठन-ठन नाद गूंजने लगता है। यहां यह पर्व नौ रातों का नृत्य महोत्सव है, जो दुनिया का सबसे लंबा डांस फेस्टिवल माना जाता है। अहमदाबाद और वडोदरा जैसे शहरों में लाखों लोग पारंपरिक वेशभूषा में सज-धजकर गरबा और डांडिया-रास में खो जाते हैं। प्रत्येक रात एक नए रंग का थीम होता है- पहली रात सफेद, आखिरी रात लाल। मंदिरों में दुर्गा की प्रतिमा के चारों ओर घूमकर नृत्य होता है, जो जीवन चक्र का प्रतीक है। स्थानीय व्यंजन- जैसे ढोकला, खाखरा और फाफड़ा व्रत के दौरान ऊर्जा का स्रोत बनते हैं। 

पश्चिम बंगाल

पूर्वी भारत का हृदय बंगाल नवरात्रि को दुर्गा पूजा के रूप में मनाता है, जो पांच दिनों- सप्तमी से दशमी तक का भव्य आयोजन है। कोलकाता के हर गली-मोहल्ले में सैकड़ों पंडाल सजते हैं, जो कला, वास्तुकला और सामाजिक संदेशों का मिश्रण होते हैं। मां दुर्गा की विशाल मूर्तियां महिषासुर वध की कथा कहती हैं और धाक यानी ढोल की गूंज पर बंगाली साड़ी-धोती में युवा नृत्य करते हैं। भोग प्रसाद के रूप में खिचड़ी, लुची और मिठाइयां बांटी जाती हैं। पंडाल-हॉपिंग एक प्रमुख आकर्षण है, जहां भक्त न केवल पूजा करते हैं, बल्कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों- नाटक, गीत और नृत्य का लुत्फ उठाते हैं। 

महाराष्ट्र

पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र में नवरात्रि गुजरात जैसी ही ऊर्जावान है, लेकिन स्थानीय स्वाद के साथ। मुंबई और पुणे में डांडिया नाइट्स आयोजित होते हैं, जहां बॉलीवुड मिक्स वाले गीतों पर युवा थिरकते हैं। महिलाएं हल्दी-कुंकुम समारोह आयोजित करती हैं, जिसमें विवाहित महिलाएं एक-दूसरे को नारियल, सुपारी और पान भेंट करती हैं। यह पर्व नई शुरुआतों का समय माना जाता है- घर खरीदना, कार लेना या बिजनेस डील फाइनल करना शुभ होता है। व्रत में साबुदाना खिचड़ी और फराली व्यंजन प्रमुख हैं। मुंबई के गिरगांव चौपाटी जैसे स्थानों पर पंडाल सजते हैं। महाराष्ट्र में नवरात्रि सामाजिक उत्सव के रूप में उभरती है, जहां पारंपरिक नृत्य लोक गीतों से जुड़ जाते हैं।

पंजाब

उत्तर-पश्चिम के जोशीले पंजाब में नवरात्रि उपवास और भक्ति का पर्व है, न कि नृत्य का। यहां संझी माता यानी पार्वती का रूप की पूजा होती है। पहले दिन दो मिट्टी के घड़ों में जौ बोया जाता है और गोबर-मिट्टी से सूर्य, चंद्र, तारे और वृक्षों वाली मूर्ति बनाई जाती है। कन्या पूजन में नौ लड़कियों और एक लड़के को दुर्गा के रूप में भोजन-वस्त्र भेंट किए जाते हैं। रातभर जागरण आयोजित होते हैं, जहां भजन-कीर्तन की धुन पर भक्त जागते हैं। भांगड़ा का स्पर्श कभी-कभी जुड़ जाता है।

तमिलनाडु

दक्षिण के तमिलनाडु में नवरात्रि शांत और कलात्मक है। यहां 'गोलू' या 'बोम्मई कोलु' नामक परंपरा प्रचलित है, जिसमें घरों में सीढ़ीनुमा जगह पर गुड़ियों और मूर्तियों का प्रदर्शन किया जाता है। ये गुड़ियां पौराणिक कथाओं- रामायण, महाभारत को चित्रित करती हैं और सामाजिक संदेश भी देती हैं। नौवें दिन आयुध पूजा होती है, जिसमें औजार, किताबें, वाहन और मशीनरी को सरस्वती की पूजा के साथ सजाया जाता है। कर्नाटक संगीत और भरतनाट्यम जैसे प्रदर्शन मंदिरों में आयोजित होते हैं। चेन्नई और मदुरै में परिवार रिश्तेदारों को आमंत्रित कर गोलू का दौरा कराते हैं और प्रसाद के रूप में सोंठ पंचम और सुंदरम प्रसाद बांटा जाता है। यह पर्व शिक्षा और समृद्धि का प्रतीक बनता है।

केरल

केरल में नवरात्रि के अंतिम तीन दिन- अष्टमी, नवमी, दशमी सरस्वती पूजा के रूप में मनाए जाते हैं। यहां किताबों, लेखन सामग्री और संगीत वाद्यों की पूजा होती है, जो ज्ञान की देवी को समर्पित है। दशमी पर भव्य समारोह होता है, जिसमें तीन-चार साल के बच्चों को पहली बार अक्षर सिखाए जाते हैं- मंदिरों में विशेष आसनों पर बच्चे 'ओम' लिखते हैं। त्रावणकोर और कोझिकोड में मोहिनीअट्टम नृत्य प्रदर्शन होते हैं। व्रत सात्विक होता है और पोंगल जैसा प्रसाद ग्रहण किया जाता है। केरल की नवरात्रि शांति और शिक्षा की ओर इशारा करती है, जो दैनिक जीवन को समृद्ध बनाती है।

उत्तर भारत का दशहरा जश्न

उत्तर भारत- उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा में नवरात्रि रामलीला से जुड़ जाती है। अयोध्या और दिल्ली में रावण वध के ड्रामे मंचित होते हैं और दशमी पर रावण के पुतले जलाए जाते हैं। कुमारी पूजन और फलाहार प्रमुख हैं। राजस्थान में यह 20 दिनों तक चलता है, जयपुर के मेले में लोक नृत्य और हस्तशिल्प बाजार सजते हैं। हिमाचल के कांगड़ा में दुर्गा मंदिरों में तीर्थयात्रा होती है। आंध्र प्रदेश में 'बतुकम्मा' फूलों की व्यवस्था से शक्ति पूजा की जाती है। 

यह भी पढ़ें:- 

Karwa Chauth 2025: 9 या 10 अक्टूबर! कब है करवा चौथ ? तिथि, पूजन विधि और महत्व जानिये 

Papankusha Ekadashi: पापांकुशा एकादशी 2025 में कब है? जानिए तिथि, महत्व और व्रत कथा जानिये

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel