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Sawan Last Somwar: सावन के आखिरी सोमवार को महादेव को कैसे करें प्रसन्न, जानें पूजा विधि, नियम और महत्व

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Somwar Puja: सावन के आखिरी सोमवार का वास्तविक महत्व केवल पूजा की विधि तक सीमित नहीं है। यह दिन भक्तों को श्रद्धा, संयम, सेवा और सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
 

Somwar Puja
Bhagwan Shiv Puja: सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस पूरे महीने में शिव भक्त सोमवार के दिन विशेष रूप से महादेव की पूजा करते हैं। मान्यता है कि सावन के सोमवार को सच्चे मन से भगवान शिव की आराधना करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि आती है। सावन का आखिरी सोमवार भी भक्तों के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने के साथ भगवान शिव का ध्यान और महामृत्युंजय मंत्र या पंचाक्षरी मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इसी महीने में माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसलिए सावन में शिव-पार्वती की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि सावन के सोमवार को भगवान शिव की पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।

आखिरी सोमवार को सावन की साधना का समापन माना जाता है। भक्त इस दिन पूरे महीने की पूजा और व्रत के फल के लिए महादेव से प्रार्थना करते हैं। हालांकि भगवान शिव की पूजा में सबसे महत्वपूर्ण चीज भक्त की श्रद्धा और सच्ची भावना मानी जाती है।
 
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सुबह कैसे करें पूजा की शुरुआत

  • सावन के आखिरी सोमवार को सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे कपड़े पहनें। 
  • इसके बाद घर के पूजा स्थान की सफाई करके भगवान शिव के सामने दीपक जलाएं। 
  • मन को शांत रखते हुए व्रत और पूजा का संकल्प लें। 
  • यदि संभव हो तो किसी शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग के दर्शन करें। 
  • मंदिर जाना संभव न हो तो घर में शिवलिंग या भगवान शिव की तस्वीर के सामने भी श्रद्धापूर्वक पूजा की जा सकती है।
  • पूजा शुरू करने से पहले भगवान गणेश का स्मरण करना शुभ माना जाता है। 
  • इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करके पूजा आरंभ करें।

भगवान शिव का कैसे करें अभिषेक?

शिव पूजा में अभिषेक का विशेष महत्व है। सबसे पहले शिवलिंग पर साफ जल अर्पित करें। इसके बाद अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दूध, दही, शहद और अन्य पूजन सामग्री से अभिषेक किया जा सकता है। हालांकि अभिषेक करते समय स्थानीय परंपरा और अपने परिवार की पूजा-पद्धति का भी ध्यान रखना चाहिए। जल अर्पित करते समय “ॐ नमः शिवाय” का जाप करना बेहद सरल और शुभ माना जाता है। इसके बाद शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा और फूल अर्पित करें। बेलपत्र चढ़ाते समय ध्यान रखें कि वह साफ हो और सामान्यतः तीन पत्तियों वाला बेलपत्र भगवान शिव को अर्पित किया जाता है।

शिव पूजा में इन बातों का रखें ध्यान

भगवान शिव की पूजा करते समय मन में श्रद्धा और सकारात्मक भाव रखें। पूजा के दौरान किसी के प्रति बुरा विचार न रखें और क्रोध से बचने का प्रयास करें। शिवलिंग पर जल या अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते समय जल्दबाजी न करें। बेलपत्र अर्पित करते समय उसके तीनों पत्ते सही अवस्था में हों, इसका ध्यान रखा जाता है। पूजा की सामग्री के संबंध में अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में मान्यताएं अलग हो सकती हैं, इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा का पालन करना बेहतर है। सबसे जरूरी बात यह है कि पूजा दिखावे के लिए नहीं बल्कि श्रद्धा और भक्ति से की जाए।
 
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कौन सा मंत्र करें जाप?

सावन के आखिरी सोमवार को भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का जाप करना बहुत सरल माना जाता है। भक्त अपनी सुविधा के अनुसार 108 बार या जितना संभव हो, इस मंत्र का जाप कर सकते हैं। इसके अलावा महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी शिव आराधना में किया जाता है। मंत्र जाप के दौरान मन को एकाग्र रखने का प्रयास करें। यदि किसी को मंत्र का पूरा उच्चारण याद न हो तो केवल “ॐ नमः शिवाय” का श्रद्धापूर्वक जाप करना भी सरल उपाय है।

व्रत रखने वालों के लिए जरूरी बातें

सावन सोमवार का व्रत रखने वाले भक्त अपनी क्षमता के अनुसार उपवास करते हैं। कुछ लोग निर्जल व्रत रखते हैं, जबकि कई लोग फलाहार या सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। व्रत का तरीका व्यक्ति की शारीरिक क्षमता और परंपरा के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए अपनी सेहत का ध्यान रखते हुए ही व्रत करना चाहिए। व्रत के दौरान सात्विक विचार रखें और भगवान शिव का ध्यान करें। दिनभर केवल भोजन का त्याग करना ही व्रत नहीं माना जाता, बल्कि मन, वचन और कर्म से संयम रखना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
 
शिव जी

शिवजी को प्रसन्न करने का सबसे सरल उपाय

भगवान शिव को भोलेनाथ कहा जाता है, क्योंकि मान्यता है कि वे अपने भक्तों की सच्ची भक्ति से जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। इसलिए महंगी पूजा सामग्री की आवश्यकता नहीं होती। साफ जल, बेलपत्र और सच्चे मन से किया गया “ॐ नमः शिवाय” का जाप भी श्रद्धा के साथ किया जा सकता है। इस दिन जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करना, भोजन कराना और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करना भी शुभ माना जाता है। दूसरों के प्रति दया और सेवा की भावना रखना शिव भक्ति का ही एक रूप माना जा सकता है।

पूजा का कैसे करें समापन?

पूजा पूरी होने के बाद भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें। इसके बाद हाथ जोड़कर अपनी मनोकामना भगवान के सामने रखें और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें। प्रसाद अर्पित करके परिवार के सदस्यों में बांटें। यदि व्रत रखा है तो अपनी परंपरा के अनुसार उचित समय पर व्रत का पारण करें। सावन के आखिरी सोमवार का वास्तविक महत्व केवल पूजा की विधि तक सीमित नहीं है। यह दिन भक्तों को श्रद्धा, संयम, सेवा और सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा देता है। इसलिए महादेव की पूजा करते समय मन को शांत रखें और उनके प्रति सच्ची भक्ति बनाए रखें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसी श्रद्धा और समर्पण से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-शांति का संचार होता है।

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

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