विज्ञापन
Home  dharm  satapath lake history brahma vishnu mahesh all three gods took a dip in lake from here one finds the way to he

Satapath Lake History: इस झील में ब्रह्म-विष्णु-महेश ने लगाई थी डुबकी, यंहा से मिलता है स्वर्ग जाने का रास्ता

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Satapath Lake History: सतोपंथ का अर्थ है सत्य का मार्ग। मान्यता है कि महाभारत काल में पांडव इसी मार्ग से स्वर्ग गए थे। यही कारण है कि इस झील का नाम सतोपंथ पड़ा। इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि जब पांडव स्वर्ग की ओर जा रहे थे

Satapath Lake History
Satapath Lake History: सतोपंथ का अर्थ है सत्य का मार्ग। मान्यता है कि महाभारत काल में पांडव इसी मार्ग से स्वर्ग गए थे। यही कारण है कि इस झील का नाम सतोपंथ पड़ा। इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि जब पांडव स्वर्ग की ओर जा रहे थे और एक-एक करके प्राण त्याग रहे थे, तब भीम ने इसी स्थान पर प्राण त्यागे थे। इसलिए भी इस स्थान को महत्वपूर्ण माना जाता है।

पांडवों के स्नान और ध्यान का भी है उल्लेख 

Satapath Lake History
पौराणिक कथाओं के अनुसार पांडवों ने स्वर्ग जाते समय इसी पड़ाव पर स्नान और ध्यान किया था। इसके बाद ही वे आगे बढ़े थे। इसलिए भी इसे बहुत पवित्र झील माना जाता है। इसके अलावा एक कहानी यह भी है कि इसी स्थान पर धर्मराज युधिष्ठिर के स्वर्ग जाने के लिए एक दिव्य वाहन आया था।

ब्रह्म-विष्णु-महेश तीनों देवों ने लगाई थी डुबकी

Satapath Lake History
अभी तक आपने गोल या लम्बी झीलें ही देखी होंगी। लेकिन सतोपंथ झील का आकार त्रिभुजाकार है। मान्यता है कि एकादशी के पावन अवसर पर ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवों ने अलग-अलग कोनों पर खड़े होकर यहां डुबकी लगाई थी। इसलिए इसका आकार त्रिभुजाकार है।

 
Satapath Lake History
झील के आकार की तरह ही इसके अस्तित्व को लेकर भी कई मान्यताएं हैं। इनमें से एक मान्यता यह भी है कि जब तक सतोपंथ में साफ-सफाई रहेगी, इसका पवित्र प्रभाव बना रहेगा। यही वजह है कि झील के रखरखाव का खास ख्याल रखा जाता है।

सतोपंथ झील से आगे ही है स्वर्ग का रास्ता

Satapath Lake History
सतोपंथ झील से थोड़ा आगे चलने पर स्वर्गरोहिणी ग्लेशियर दिखाई देता है। जिसे स्वर्ग का रास्ता भी कहा जाता है। कहा जाता है कि इस ग्लेशियर पर ही सात सीढ़ियां हैं जो स्वर्ग का रास्ता हैं। हालांकि, आमतौर पर इस ग्लेशियर पर तीन सीढ़ियां ही दिखाई देती हैं। बाकी बर्फ और कोहरे की चादर से ढका रहता है।

यह भी पढ़ें- Kakbhushundi Jheel Ka Rahasya: इस ताल के पास काकभुशुण्डि ने सुनाई थी गरुड़ को रामायण, जानिए इसकी मान्यता

यह भी पढ़ें- Govardhan Parvat Ka Rahasya: आखिर कब और कैसे शुरू हुई गोवर्धन परिक्रमा, जानिए इसकी पौराणिक कथा और महत्व

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel