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Saryu River Significance History: आखिर क्यों नहीं मिलता है सरयू नदी में स्नान करने का पुण्य, जानें इतिहास

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Saryu River Significance History: सरयू नदी का नाम हम सभी जानते हैं। सरयू नदी उत्तर प्रदेश के अयोध्या से होकर बहती है। अयोध्या नगरी भगवान श्री राम की जन्म स्थान है।

Saryu River Significance History
Saryu River Significance History: सरयू नदी का नाम हम सभी जानते हैं। सरयू नदी उत्तर प्रदेश के अयोध्या से होकर बहती है। अयोध्या नगरी भगवान श्री राम की जन्म स्थान है। यहा की धरती को फसल उगाने वाले और भगवान श्री राम की साक्षी बनने में सरयू नदी का विशेष योगदान रहा है। अयोध्या सरयू नदी से समृद्ध है जो वर्तमान में एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में उभरी है और पवित्र भूमि के रूप में पूजी जाती है। यह नदी हिमालय से निकलती है और उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड राज्यों से होकर बहती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह नदी शापित है और यहां स्नान करने से लोगों के पाप तो मिट जाते हैं लेकिन पुण्य भी प्राप्त नहीं होता है। आइए इस खबर में इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

जानिए सरयू नदी क्यों है शापित?

पौराणिक कथाओं के अनुसार मार्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने सरयू नदी में जल समाधि लेकर अपनी लीला समाप्त कर ली थी। जिससे भगवान भोलेनाथ सरयू नदी से बहुत नाराज हो गए।  इसके बाद उन्होंने सरयू नदी को श्राप दिया कि तुम्हारा जल मंदिर में चढ़ाने के लिए प्रयोग नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही तुम्हारा जल पूजा में भी इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।

इसके बाद मां सरयू भगवान भोलेनाथ के चरणों में गिर पड़ीं और कहने लगीं कि प्रभु इसमें मेरा क्या दोष है। यह तो प्रकृति का नियम था जो पहले से ही तय था। इसमें मैं क्या कर सकता हूं? मां सरयू के आग्रह पर भगवान भोलेनाथ ने मां सरयू से कहा कि मैं अपना श्राप वापस तो नहीं ले सकता लेकिन इतना जरूर कर सकता हूं कि तुम्हारे जल में स्नान करने से लोगों के पाप धुल जाएंगे लेकिन तुम्हारा जल पूजा-पाठ और मंदिरों में इस्तेमाल नहीं होगा और न ही किसी को पुण्य मिलेगा। तभी से सरयू नदी का जल पूजा-पाठ में शामिल नहीं किया जाता है। 

कोई आयोजन नहीं होता

आपको बता दें कि वर्तमान समय में भी सरयू नदी पर पूरा श्राप लागू है। अगर कहीं कोई यज्ञ होता है तो उसके लिए सात नदियों का जल लाया जाता है। जिन सात नदियों का जल लाया जाता है उनमें सरयू शामिल नहीं है। श्रापित होने के कारण ही सरयू नदी के तट पर कुंभ, अर्धकुंभ जैसे किसी आयोजन का भी आयोजन नहीं किया जाता है।

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