Life Lessons: डर को अपने ऊपर हावी करने के बजाय उसे एक प्रेरणा बनाइए और ऐसा जीवन जीने का प्रयास कीजिए, जिस पर स्वयं भी गर्व हो और समाज भी सम्मान के साथ उसे याद रखे।
Positive Thinking: जीवन में हर व्यक्ति को कभी न कभी डर का सामना करना पड़ता है। किसी को भविष्य की चिंता होती है, किसी को असफलता का डर सताता है तो किसी को मृत्यु का भय परेशान करता है। ऐसे समय में मन घबरा जाता है और व्यक्ति सही निर्णय नहीं ले पाता है। स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज बताते हैं कि डर से भागने की बजाय उसे सही दृष्टि से समझना चाहिए। जब हम डर के कारण को समझ लेते हैं, तब उसका समाधान भी आसान हो जाता है।
आज के कई युवाओं के मन में यह सवाल आता है कि शास्त्रों में बार-बार मृत्यु की बात क्यों कही जाती है। क्या इससे जीवन के प्रति निराशा नहीं बढ़ती? स्वामी जी कहते हैं कि ऐसा बिल्कुल नहीं है। शास्त्र लोगों को मृत्यु का स्मरण इसलिए कराते हैं ताकि मनुष्य जीवन की सच्चाई को समझे और अपने समय का सही उपयोग करे। यह संदेश किसी को डराने या हिम्मत तोड़ने के लिए नहीं है, बल्कि जीवन को अधिक सार्थक बनाने के लिए है।
परीक्षा की तरह है जीवन
स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज बताते हैं कि जीवन की तुलना परीक्षा से करते हैं। जैसे माता-पिता और शिक्षक बच्चों को बार-बार याद दिलाते हैं कि परीक्षा निश्चित है, वैसे ही शास्त्र बताते हैं कि मृत्यु भी निश्चित है। इसका उद्देश्य किसी को भयभीत करना नहीं, बल्कि पहले से तैयार रहने की प्रेरणा देना है। जो विद्यार्थी समय पर पढ़ाई करता है, उसे परीक्षा से डर नहीं लगता है, लेकिन जिसकी तैयारी अधूरी होती है, वही परीक्षा के समय घबराता है। यही बात जीवन पर भी लागू होती है।
तैयारी करने वाला व्यक्ति नहीं घबराता
यदि व्यक्ति अपने जीवन में अच्छे कर्म करता है, अपने कर्तव्यों का पालन करता है और दूसरों के प्रति प्रेम, दया तथा ईमानदारी का व्यवहार रखता है, तो उसके मन में भय कम हो जाता है। डर अक्सर तब पैदा होता है जब हमें लगता है कि हमने अपने जीवन का सही उपयोग नहीं किया। इसलिए हर दिन को बेहतर बनाने का प्रयास करना ही सबसे बड़ी तैयारी है।
अच्छे कर्म ही सबसे बड़ी पूंजी
स्वामी जी कहते हैं कि जब यह निश्चित है कि एक दिन इस संसार से जाना है, तब हमें ऐसा जीवन जीना चाहिए जिसे लोग सम्मान से याद करें। धन, पद और प्रसिद्धि एक दिन यहीं रह जाते हैं, लेकिन अच्छे कर्म और अच्छा व्यवहार लोगों के दिलों में हमेशा जीवित रहते हैं। इसलिए जीवन का उद्देश्य केवल सफलता पाना नहीं, बल्कि दूसरों के लिए प्रेरणा बनना भी होना चाहिए।
वर्तमान को बनाएं बेहतर
भविष्य की चिंता और मृत्यु का भय तभी कम होता है जब व्यक्ति वर्तमान में पूरी ईमानदारी से जीता है। हर दिन कुछ नया सीखना, अपने परिवार और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाना, जरूरतमंदों की सहायता करना और अपने व्यवहार को अच्छा बनाना जीवन को सार्थक बनाता है। जब मनुष्य वर्तमान में अच्छे कार्य करता है, तब भविष्य को लेकर उसका डर भी धीरे-धीरे समाप्त होने लगता है।
डर को अपने ऊपर न होने दें हावी
स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज का संदेश है कि मृत्यु का स्मरण जीवन से निराश होने के लिए नहीं, बल्कि उसे सही दिशा देने के लिए है। जैसे परीक्षा की तैयारी करने वाला विद्यार्थी आत्मविश्वास के साथ परीक्षा देता है, वैसे ही अच्छे कर्मों और सच्चे जीवन की तैयारी करने वाला व्यक्ति किसी भी परिस्थिति का सामना निडर होकर करता है। इसलिए डर को अपने ऊपर हावी करने के बजाय उसे एक प्रेरणा बनाइए और ऐसा जीवन जीने का प्रयास कीजिए, जिस पर स्वयं भी गर्व हो और समाज भी सम्मान के साथ उसे याद रखे।