Sanatan Dharma: भारत की सनातन संस्कृति का दिव्य दर्शन कराएगा। जब देश की विभिन्न लोक संस्कृतियों के लोग एक साथ जुड़ेंगे और सनातन धर्म के माध्यम से सेवा और प्रेम का संदेश प्राप्त करेंगे, तब यह दृश्य अत्यंत प्रेरणादायक होगा।
Indian Tradition: भारत की संस्कृति को विश्व की सबसे प्राचीन संस्कृतियों में गिना जाता है। हजारों वर्षों से यह संस्कृति मानवता, सेवा, धर्म, ज्ञान और आध्यात्म का संदेश देती आ रही है। भारतीय संस्कृति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक श्रेष्ठ पद्धति है। यहां “वसुधैव कुटुम्बकम्” अर्थात पूरी दुनिया एक परिवार है, जैसी भावना देखने को मिलती है। यही कारण है कि भारत की संस्कृति आज भी पूरे विश्व को आकर्षित करती है। सनातन धर्म ने सदैव समाज को प्रेम, भाईचारे और सेवा का मार्ग दिखाया है। यही संस्कृति भारत की असली पहचान है और यही इसकी सबसे बड़ी शक्ति भी है।
पूज्य गुरुदेव आनंद पीठाधीश्वर, आचार्य महामंडलेश्वर, अनंत श्री विभूषित श्री श्री 1008 स्वामी बालकानंद गिरि जी महाराज का कहना है कि भारतीय संस्कृति सबसे पुरातन है और इसका संरक्षण सनातन धर्म ही करता आया है। सनातन धर्म केवल एक धर्म नहीं बल्कि मानव कल्याण की जीवनशैली है। इसमें हर व्यक्ति को सम्मान, सेवा और प्रेम की शिक्षा दी जाती है। महाराज श्री का मानना है कि जब तक भारत अपनी संस्कृति और संस्कारों से जुड़ा रहेगा, तब तक उसकी पहचान और गौरव सुरक्षित रहेगा।
उन्होंने कहा कि भारत की शक्ति उसकी विविधता में एकता है। यहां अलग-अलग भाषा, वेशभूषा और परंपराएं होने के बावजूद सभी लोग एक-दूसरे के साथ प्रेम और सम्मान का व्यवहार करते हैं। यही भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता है।
जनजातीय सांस्कृतिक समागम
दिनांक 22 मई 2026 से 24 मई 2026 तक राष्ट्र की राजधानी दिल्ली में विशाल जनजातीय सांस्कृतिक समागम का आयोजन किया जा रहा है। इस भव्य कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से लाखों वनवासी बंधु शामिल होंगे। यह आयोजन भारत की लोक परंपराओं, जनजातीय कला, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत को एक मंच पर प्रस्तुत करेगा। इस समागम का उद्देश्य देश की जनजातीय संस्कृति को सम्मान देना और समाज को भारतीय परंपराओं से जोड़ना है। कार्यक्रम में देश के कोने-कोने से आए लोग अपनी संस्कृति, लोकगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक जीवन शैली का प्रदर्शन करेंगे। इससे भारत की सांस्कृतिक विविधता का अद्भुत स्वरूप देखने को मिलेगा।
हरीधाम साई ट्रस्ट की सेवा भावना
इस पवित्र अवसर पर हरीधाम साई ट्रस्ट द्वारा लाखों वनवासी बंधुओं का स्वागत किया जाएगा। पूज्य स्वामी बालकानंद गिरि जी महाराज की प्रेरणा से हरीधाम परिवार इस आयोजन में निशुल्क भोजन सेवा प्रदान करेगा। यह सेवा प्रेम, वात्सल्य और समर्पण की भावना से की जाएगी। भारतीय संस्कृति में सेवा को सबसे बड़ा धर्म माना गया है। भूखे को भोजन कराना और जरूरतमंद की सहायता करना पुण्य का कार्य माना जाता है। हरीधाम साई ट्रस्ट का यह संकल्प सनातन धर्म के मूल संस्कारों और आदर्शों को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है। लाखों लोगों के लिए भोजन सेवा का आयोजन केवल एक सामाजिक कार्य नहीं बल्कि मानवता की सच्ची पूजा है।
सनातन संस्कृति का दिव्य स्वरूप
यह आयोजन निश्चित रूप से भारत की सनातन संस्कृति का दिव्य दर्शन कराएगा। जब देश की विभिन्न लोक संस्कृतियों के लोग एक साथ जुड़ेंगे और सनातन धर्म के माध्यम से सेवा और प्रेम का संदेश प्राप्त करेंगे, तब यह दृश्य अत्यंत प्रेरणादायक होगा। भारतीय संस्कृति हमेशा से “सर्वे भवन्तु सुखिनः” की भावना को मानती आई है। यानी सभी सुखी रहें और सबका कल्याण हो। यही कारण है कि भारत की संस्कृति आज भी जीवित, जागृत और विश्व में सबसे अलग दिखाई देती है। सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति का यह पवित्र संगम आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा।