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Swami Ashutoshanand Giri Ji: श्रावण मास में पूजा से पहले जान लें ये जरूरी बातें, जीवन में नहीं आएंगी दिक्कतें

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
स्वामी आशुतोषानंद गिरि जी महाराज
सार

Shravan Maas: श्रावण मास में केवल पूजा ही नहीं, बल्कि जीवनशैली और खान-पान की पवित्रता का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस महीने में सात्विक भोजन करना, मन को शांत रखना और अच्छे विचारों को अपनाना शुभ माना जाता है। 
 

Swami Ashutoshanand Giri Ji
Shiva Purana Importance: सनातन धर्म में श्रावण मास को अत्यंत पवित्र और शुभ माना गया है। शिव पुराण में भी इस महीने की महिमा का वर्णन मिलता है। कहा गया है कि श्रावण मास से बढ़कर कोई दूसरा महीना नहीं है और भगवान शिव से बढ़कर कोई अन्य देव नहीं हैं। भगवान शिव को यह महीना सबसे अधिक प्रिय है, इसलिए इस दौरान की गई पूजा, अभिषेक और साधना का विशेष महत्व माना जाता है।

श्रावण मास का संबंध श्रवण नक्षत्र से भी माना जाता है। वर्ष 2026 में श्रावण मास का शुभ आरंभ 30 जुलाई से होगा और यह 28 अगस्त 2026 तक चलेगा। इस दौरान रक्षा बंधन पर्व तक भक्त भगवान शिव की आराधना, व्रत और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।

शिव को क्यों प्रिय है श्रावण मास

स्वामी आशुतोषानंद गिरि जी महाराज के अनुसार, भगवान शिव देवों के देव महादेव हैं और सभी सनातन परंपराओं में उनकी विशेष महिमा बताई गई है। भगवान शिव के प्रति श्रद्धा रखना हर सनातनी का श्रेष्ठ कर्तव्य माना गया है। श्रावण मास में भगवान शिव की पूजा करने से मनुष्य को आध्यात्मिक शांति और पुण्य की प्राप्ति होती है। समुद्र मंथन के समय जब संसार को नष्ट करने वाला विष निकला, तब भगवान शिव ने उस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया और समस्त सृष्टि की रक्षा की। विष के प्रभाव से भगवान शिव के शरीर में जलन होने लगी। तब देवताओं ने उनका जल और पंचामृत से अभिषेक किया। इसी कारण श्रावण मास में भगवान शिव का जलाभिषेक और पंचामृत अभिषेक करने की परंपरा चली आ रही है।

शिव अभिषेक और पंचामृत का महत्व

भगवान शिव को पंचामृत से स्नान कराने की परंपरा बहुत प्राचीन है। पंचामृत में दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का प्रयोग किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पंचामृत को अमृत के समान पवित्र माना गया है क्योंकि इसमें शुद्धता और सकारात्मक ऊर्जा का भाव जुड़ा होता है। श्रावण मास में भक्त श्रद्धा के साथ कांवड़ यात्रा करते हैं और पवित्र जल लाकर भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। जलाभिषेक भगवान शिव को प्रसन्न करने का सरल और श्रेष्ठ माध्यम माना गया है। भक्त यदि सच्चे मन से भगवान शिव को जल अर्पित करते हैं तो उन्हें भगवान की कृपा प्राप्त होती है।

खान-पान और पवित्रता का ध्यान

श्रावण मास में केवल पूजा ही नहीं, बल्कि जीवनशैली और खान-पान की पवित्रता का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस महीने में सात्विक भोजन करना, मन को शांत रखना और अच्छे विचारों को अपनाना शुभ माना जाता है। भक्तों को अपने आचरण में भी पवित्रता बनाए रखनी चाहिए।

श्रावण सोमवार का विशेष महत्व

श्रावण मास के सोमवार का महत्व सबसे अधिक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि जो भक्त श्रावण के सोमवार को भगवान शिव का अभिषेक करता है, उसे बहुत अधिक पुण्य प्राप्त होता है। भगवान शिव स्वयं कहते हैं कि श्रावण सोमवार में किए गए अभिषेक और पूजा के फल का वर्णन करना भी कठिन है। इसलिए श्रावण मास में प्रत्येक भक्त को भगवान शिव की भक्ति, जलाभिषेक और पूजा का संकल्प लेना चाहिए। श्रद्धा, पवित्रता और विश्वास के साथ की गई शिव आराधना जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आती है।

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