विज्ञापन
Home  dharm  saint stories  swami ashutoshanand giri ji maharaj ne bataya nirjala ekadashi vrat kab hai or vrat ke niyam

Swami Ashutoshanand Giri Ji: निर्जला एकादशी व्रत कब और क्या है नियम? स्वामी आशुतोषानंद गिरि जी महाराज ने बताया

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
स्वामी आशुतोषानंद गिरि जी महाराज
सार

Nirjala Ekadashi: निर्जला एकादशी का व्रत करने से वर्षभर की सभी एकादशियों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है तथा जीवन के कष्ट, चिंताएं और नकारात्मकता दूर होकर सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
 

Swami Ashutoshanand Giri Ji Maharaj
Nirjala Ekadashi Vrat Niyam: निर्जला एकादशी हिंदू धर्म की सबसे महत्वपूर्ण और पुण्यदायी एकादशियों में से एक मानी जाती है। यह व्रत भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने, पापों के नाश और आध्यात्मिक उन्नति के लिए रखा जाता है। वर्ष 2026 में निर्जला एकादशी 25 जून को मनाई जाएगी। इसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है, क्योंकि महाभारत काल में पांडवों में बलशाली भीमसेन ने महर्षि व्यास के उपदेश पर इस व्रत का पालन किया था। इस दिन श्रद्धालु अन्न और जल का त्याग कर भगवान विष्णु की पूजा, भजन-कीर्तन और दान-पुण्य करते हैं। 

सन 2026 में निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून, गुरुवार को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण एकादशियों में से एक मानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और श्रद्धालु पूरे दिन उपवास रखकर भगवान का स्मरण करते हैं। एकादशी तिथि का प्रारंभ 24 जून 2026 को शाम 6 बजकर 12 मिनट पर होगा तथा इसका समापन 25 जून 2026 को शाम 8 बजकर 9 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार 25 जून को निर्जला एकादशी का व्रत किया जाएगा।

निर्जला एकादशी का महत्व

निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि जो व्यक्ति वर्षभर की सभी एकादशियों का व्रत नहीं कर पाता, वह यदि श्रद्धा और नियमपूर्वक निर्जला एकादशी का पालन कर ले तो उसे बारहों एकादशियों के समान पुण्य प्राप्त होता है। यही कारण है कि इस एकादशी को अत्यंत फलदायी और कल्याणकारी माना गया है। मान्यता है कि यह व्रत मनुष्य के पापों का नाश करता है, जीवन में सुख-समृद्धि लाता है तथा भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त कराता है। धार्मिक ग्रंथों में इसके पुण्य का वर्णन अत्यंत महिमामय रूप में किया गया है।
 
रंगभरी एकादशी का महत्व

निर्जला एकादशी के नियम

निर्जला का अर्थ है “बिना जल के”। इस व्रत का मुख्य नियम यह है कि व्रती पूरे दिन अन्न और जल का त्याग करता है। सामान्यतः इस दिन पानी भी ग्रहण नहीं किया जाता। हालांकि पूजा-पाठ के समय आचमन के लिए जो जल लिया जाता है, उसे शास्त्रसम्मत माना गया है। भगवान के नामों का स्मरण करते हुए आचमन किया जा सकता है। यदि कोई व्यक्ति अस्वस्थ है या नियमित दवाइयाँ लेता है, तो वह स्वास्थ्य की आवश्यकता के अनुसार दवा के साथ जल ग्रहण कर सकता है। धर्म का उद्देश्य शरीर को कष्ट देकर बीमारी बढ़ाना नहीं, बल्कि श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान का स्मरण करना है। इसलिए अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार व्रत का पालन करना चाहिए।

पापों से मुक्ति का माध्यम

स्वामी आशुतोषानंद गिरि जी महाराज के अनुसार मनुष्य के जीवन में अनेक प्रकार की चिंताएँ, दुख और कष्ट जुड़े रहते हैं। निर्जला एकादशी का व्रत इन मानसिक और आध्यात्मिक समस्याओं को दूर करने में सहायक माना गया है। शास्त्रों में कहा गया है कि यदि किसी से बड़े से बड़ा पाप भी हो गया हो, तो वह सच्चे मन से भगवान की शरण लेकर इस व्रत का पालन करे, तो उसे पापों से मुक्ति का मार्ग प्राप्त हो सकता है। धार्मिक ग्रंथों में इसकी महिमा का वर्णन करते हुए बताया गया है कि यह व्रत मनुष्य को सदाचार, भक्ति और आत्मशुद्धि की ओर प्रेरित करता है। भगवान विष्णु के नाम का स्मरण और उपवास व्यक्ति के भीतर सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम बनता है।
 
अजा एकादशी के दिन इन चीजों का करें दान, जीवन में बनी रहेगी खुशहाली!

क्यों कहलाती है भीमसेनी एकादशी? 

महाभारत काल में पांडवों में सबसे बलशाली भीमसेन को अत्यधिक भूख लगती थी। कहा जाता है कि वे नियमित रूप से एकादशी का व्रत नहीं रख पाते थे। जब महर्षि व्यास ने उन्हें सभी एकादशियों का महत्व बताया, तब भीमसेन ने अपनी असमर्थता व्यक्त की और कहा कि वे भूखे नहीं रह सकते। तब महर्षि व्यास ने उन्हें वर्ष में केवल एक बार निर्जला एकादशी का व्रत करने का उपदेश दिया। 

भीमसेन ने इस व्रत को पूरी श्रद्धा से किया और उन्हें सभी एकादशियों के समान पुण्य प्राप्त हुआ। तभी से यह व्रत भीमसेनी एकादशी के नाम से प्रसिद्ध हो गया। कथा के अनुसार भीमसेन के उदर में “वृक” नामक अग्नि का निवास था, जिसके कारण उन्हें अत्यधिक भूख लगती थी। फिर भी उन्होंने इस कठिन व्रत का पालन किया। यही संदेश आज भी दिया जाता है कि श्रद्धा, संकल्प और भगवान के प्रति विश्वास के साथ किया गया व्रत जीवन को आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है।

ये भी देखें

International Yoga Day Isha Foundation will organize 1,000 free yoga sessions across the country
सद्गुरु जगदीश जग्गी वासुदेव
20 June 2026
Devi Maheshwari Ji
कथावाचक देवी माहेश्वरी जी (श्रीजी)
20 June 2026
Acharya Bharat Ji Maharaj
आचार्य भरत जी महाराज
20 June 2026
Shivam Sadhak Ji Maharaj
कथावाचक डॉ. शिवम साधक जी महाराज
20 June 2026
Swami Ishan Mahesh Ji Maharaj
स्वामी ईशान महेश जी महाराज
20 June 2026

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel