विज्ञापन
Home  dharm  saint stories  sadhvi krishnapriya ji told why does lord jagannath never sleep know its significance

Sadhvi Krishnapriya Ji: भगवान जगन्नाथ क्यों कभी नहीं सोते, जानें क्या है महत्व... साध्वी कृष्णप्रिया जी ने बता

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कथावाचक साध्वी कृष्णप्रिया जी
सार

Spiritual Story: भगवान जगन्नाथ जी का कभी न सोने का संदेश यह है कि भगवान हमेशा अपने भक्तों की चिंता करते हैं। उनका द्वार हर समय भक्तों के लिए खुला रहता है। 
 

Sadhvi Krishnapriya ji
Jagannath Rath Yatra: भगवान जगन्नाथ जी को भगवान विष्णु का ही एक स्वरूप माना जाता है। ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की पूजा पूरे विधि-विधान से की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान जगन्नाथ जी का स्वरूप और उनकी लीलाएं भक्तों के लिए विशेष महत्व रखती हैं। साध्वी कृष्णप्रिया जी ने भगवान जगन्नाथ जी की ऐसी ही एक अद्भुत लीला के बारे में बताते हुए कहा कि जगन्नाथ जी ऐसे भगवान हैं जो कभी सोते नहीं हैं।

साध्वी कृष्णप्रिया जी के अनुसार भगवान जगन्नाथ जी हमेशा जागृत अवस्था में रहते हैं ताकि कोई भी भक्त उनके दर्शन से वंचित न रह जाए। मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ लगभग 22 घंटे तक जागकर अपने भक्तों को दर्शन देते हैं और उनकी पुकार सुनते हैं। भगवान का यह स्वरूप भक्तों के प्रति उनके प्रेम और करुणा को दर्शाता है।

भक्तों की भावना होती है कि भगवान स्वयं अपने भक्तों के लिए सदैव उपलब्ध रहते हैं। जिस प्रकार एक माता अपने बच्चे की चिंता में हमेशा जागती रहती है, उसी प्रकार भगवान जगन्नाथ भी अपने भक्तों की रक्षा और कल्याण के लिए जागते रहते हैं।

देवताओं को भी देते हैं दर्शन

धार्मिक कथाओं के अनुसार भगवान जगन्नाथ जी केवल मनुष्यों को ही नहीं, बल्कि देवताओं को भी दर्शन देते हैं। कहा जाता है कि भगवान के जागरण के समय में देवता भी उनकी स्तुति और आराधना करते हैं। भगवान जगन्नाथ अपने दिव्य स्वरूप से सभी को आशीर्वाद प्रदान करते हैं। यह मान्यता भगवान जगन्नाथ जी की महिमा को और भी विशेष बनाती है। भक्तों का विश्वास है कि जो भी सच्चे मन से भगवान जगन्नाथ का स्मरण करता है, भगवान उसकी भावनाओं को अवश्य स्वीकार करते हैं।

भक्तों के लिए चलकर आते हैं भगवान

भगवान जगन्नाथ जी की सबसे बड़ी विशेषता यह मानी जाती है कि वे अपने भक्तों के बहुत करीब हैं। साध्वी कृष्णप्रिया जी ने बताया कि भगवान ऐसे करुणामयी हैं कि यदि कोई भक्त किसी कारणवश उनके दर्शन के लिए नहीं पहुंच पाता, तो भगवान स्वयं अपने भक्तों के पास पहुंच जाते हैं। इसी भावना को भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा से भी जोड़ा जाता है। रथ यात्रा के दौरान भगवान स्वयं मंदिर से बाहर निकलकर अपने भक्तों के बीच आते हैं। इस दौरान लाखों श्रद्धालु भगवान के दर्शन करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यह भगवान के उस भाव को दर्शाता है जिसमें वे अपने भक्तों से मिलने के लिए स्वयं आगे बढ़ते हैं।

भगवान जगन्नाथ की जागृत अवस्था 

भगवान जगन्नाथ जी का कभी न सोने का संदेश यह है कि भगवान हमेशा अपने भक्तों की चिंता करते हैं। उनका द्वार हर समय भक्तों के लिए खुला रहता है। भगवान के लिए कोई छोटा या बड़ा भक्त नहीं होता, बल्कि हर भक्त उनके लिए समान होता है। यह मान्यता लोगों को विश्वास और भक्ति का मार्ग दिखाती है। भगवान जगन्नाथ जी का जागृत स्वरूप यह प्रेरणा देता है कि सच्ची श्रद्धा और प्रेम से की गई प्रार्थना कभी व्यर्थ नहीं जाती।

जगन्नाथ की लीला भक्तों को देती है विश्वास

भगवान जगन्नाथ जी की महिमा केवल मंदिर और पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भक्त और भगवान के गहरे संबंध का प्रतीक है। उनके जागने की कथा यह बताती है कि भगवान अपने भक्तों को अकेला नहीं छोड़ते। वे हमेशा उनकी रक्षा, सहायता और मार्गदर्शन के लिए उपस्थित रहते हैं। इसी कारण भगवान जगन्नाथ को भक्तों का भगवान कहा जाता है। उनकी कृपा पाने के लिए केवल सच्चे मन और श्रद्धा की आवश्यकता होती है। भगवान जगन्नाथ की यही दिव्य लीला करोड़ों भक्तों के मन में आस्था और विश्वास को मजबूत करती है।

ये भी पढ़ें -  शनिदेव को क्यों कहा जाता है न्याय के देवता, नवग्रहों में कैसे मिला सर्वोच्च स्थान?

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel