Hanuman Chalisa: आज छोटे-छोटे बच्चे फिल्मों के गाने और दूसरी बातें आसानी से याद कर लेते हैं, क्योंकि वे उन्हें बार-बार सुनते हैं। इसी तरह यदि हनुमान चालीसा भी नियमित रूप से सुनी और पढ़ी जाए तो उसे याद करना मुश्किल नहीं है।
Religious Values in Children: हनुमान जी की भक्ति करने वाले बहुत से लोग चाहते हैं कि उन्हें हनुमान चालीसा पूरी तरह याद हो जाए, लेकिन कई बार बार-बार प्रयास करने के बावजूद उन्हें इसकी चौपाइयां याद नहीं हो पातीं। ऐसे लोगों के लिए रसराज जी महाराज ने एक बेहद सरल उपाय बताया है। उनके अनुसार हनुमान चालीसा को याद करने के लिए इसे रटने की जरूरत नहीं है, बल्कि नियमित रूप से इसका पाठ करना शुरू कर देना चाहिए।
रसराज जी महाराज कहते हैं कि अगर आप हनुमान चालीसा याद नहीं कर पा रहे हैं, तो सबसे पहले यह सोचना छोड़ दीजिए कि आपको इसे याद करना ही है। इसके बजाय रोज किताब देखकर हनुमान चालीसा का पाठ करना शुरू कर दीजिए। जब आप लगातार इसका पाठ करेंगे तो धीरे-धीरे इसकी चौपाइयां अपने आप आपकी स्मृति में बैठने लगेंगी।
हमारे मस्तिष्क और बुद्धि की यही विशेषता है कि जिस चीज को हम बार-बार सुनते और दोहराते हैं, वह धीरे-धीरे हमारे भीतर सहज रूप से याद हो जाती है। इसलिए हनुमान चालीसा को याद करने के लिए दबाव बनाने की आवश्यकता नहीं है।
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बच्चों के सामने खुद करें पाठ
रसराज जी महाराज ने बच्चों को लेकर भी एक महत्वपूर्ण बात कही। उनका कहना है कि बच्चों को केवल यह कहने की जरूरत नहीं है कि वे हनुमान चालीसा पढ़ें। बल्कि माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों के सामने स्वयं हनुमान चालीसा का पाठ करें। अगर घर का वातावरण ऐसा हो कि सुबह उठने के बाद या किसी नियमित समय पर हनुमान चालीसा का पाठ होता है, तो बच्चे उसे सुनते-सुनते अपने आप सीखने लगते हैं। उन्होंने अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए बताया कि उनकी दो साल की बेटी ने भी हनुमान चालीसा गाना सीख लिया था, जबकि उन्होंने उसे अलग से कभी हनुमान चालीसा सिखाने का प्रयास नहीं किया।
बच्चों को सिखाने से ज्यादा जरूरी है उदाहरण बनना
रसराज जी महाराज के अनुसार बच्चों को किसी धार्मिक कार्य के लिए केवल निर्देश देने के बजाय माता-पिता को स्वयं उसे करके दिखाना चाहिए। बच्चे अपने आसपास होने वाली चीजों को देखकर और सुनकर बहुत कुछ सीखते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी जिंदगी का एक नियम रहा है कि कार में बैठते ही वे हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं। जब बच्चे लगातार अपने माता-पिता को ऐसा करते हुए देखते हैं, तो उनके मन में भी उसके प्रति स्वाभाविक रुचि पैदा होती है।
नियमित अभ्यास से अपने आप हो जाएगा याद
आज छोटे-छोटे बच्चे फिल्मों के गाने और दूसरी बातें आसानी से याद कर लेते हैं, क्योंकि वे उन्हें बार-बार सुनते हैं। इसी तरह यदि हनुमान चालीसा भी नियमित रूप से सुनी और पढ़ी जाए तो उसे याद करना मुश्किल नहीं है। इसलिए हनुमान चालीसा याद करने का सबसे सरल तरीका यही है कि इसे याद करने का तनाव न लें। रोज श्रद्धा और नियमितता के साथ इसका पाठ करें। कुछ समय बाद आपको महसूस होगा कि इसकी चौपाइयां धीरे-धीरे अपने आप स्मरण होने लगी हैं। रसराज जी महाराज का संदेश यही है कि भक्ति में दिखावा या दबाव नहीं, बल्कि निरंतरता और संस्कार अधिक महत्वपूर्ण हैं।