New Year 2026: प्रेमानंद महाराज ने यह भी कहा कि केवल भजन करना ही काफी नहीं, बल्कि जीवन में सरलता और संयम लाना भी जरूरी है। अगर दिनभर मन को उत्तेजित करने वाली चीजें देखी-सुनी जाएं और रात को भजन में मन लगाने की कोशिश की जाए, तो कठिनाई स्वाभाविक है।
Premanand Maharaj Ke Pravachan: नए साल की शुरुआत को लोग अक्सर संकल्प, पूजा-पाठ और भजन-कीर्तन से जोड़ते हैं। माना जाता है कि साल का पहला दिन जैसी भावना और सोच के साथ बीतता है, उसका असर पूरे वर्ष पर पड़ता है। लेकिन बहुत से श्रद्धालुओं की एक आम शिकायत रहती है कि भजन या नाम-स्मरण करते समय मन टिकता नहीं है। विचार इधर-उधर भटकते रहते हैं और मन स्थिर नहीं हो पाता। इसी विषय पर संत प्रेमानंद महाराज ने अपने प्रवचनों में कुछ सरल और व्यावहारिक उपाय बताए हैं, जिन्हें अपनाकर भजन में मन को धीरे-धीरे लगाया जा सकता है।
मन का भटकना है स्वाभाविक
प्रेमानंद महाराज के अनुसार भजन करते समय मन का न लगना कोई असामान्य बात नहीं है। उन्होंने कहा कि मन वर्षों से विषय-वासनाओं और बाहरी आकर्षणों का आदी हो चुका है, इसलिए अचानक उसे स्थिर कर देना आसान नहीं होता। नए साल पर अगर कोई व्यक्ति यह सोचकर निराश हो जाए कि “मुझसे भजन नहीं हो पा रहा”, तो यह भी एक तरह का मन का खेल है। साधना में धैर्य और निरंतरता सबसे महत्वपूर्ण है।
जबरदस्ती नहीं, प्रेम से करें अभ्यास
महाराज का पहला और सबसे सरल उपाय है, जबरदस्ती न करें। उनका कहना है कि भजन को बोझ या नियम की तरह नहीं, बल्कि प्रेम और अपनत्व के साथ करें। यदि मन भटक रहा है, तो खुद को दोष देने के बजाय भगवान से ही मन की स्थिति कह दें। जैसे, “प्रभु, मेरा मन नहीं लग रहा, आप ही इसे अपनी ओर खींच लीजिए।” इस भाव से किया गया स्मरण भी भजन ही माना जाता है।
छोटा समय, लेकिन नियमित भजन
नए साल पर लोग अक्सर बड़े-बड़े संकल्प ले लेते हैं कि घंटों भजन करने का, लंबी माला जपने का। प्रेमानंद महाराज के अनुसार यह तरीका कई बार उलटा पड़ जाता है। उन्होंने सलाह दी कि शुरुआत छोटे समय से करें। चाहे पांच या दस मिनट ही क्यों न हों, लेकिन रोज उसी समय भजन करें। नियमितता से मन धीरे-धीरे उसी समय भगवान की ओर झुकने लगता है।
नाम-स्मरण को सांसों से जोड़ें
महाराज ने एक और आसान उपाय बताया कि नाम-स्मरण को सांसों के साथ जोड़ना। जैसे श्वास लेते समय मन ही मन “राम” या “कृष्ण” और श्वास छोड़ते समय फिर वही नाम। इससे मन को एक आधार मिल जाता है और भटकाव कम होता है। यह अभ्यास चलते-फिरते या काम करते हुए भी किया जा सकता है, जिससे भजन केवल पूजा-स्थल तक सीमित नहीं रहता।
भजन के साथ जीवन में सरलता
प्रेमानंद महाराज ने यह भी कहा कि केवल भजन करना ही काफी नहीं, बल्कि जीवन में सरलता और संयम लाना भी जरूरी है। अगर दिनभर मन को उत्तेजित करने वाली चीजें देखी-सुनी जाएं और रात को भजन में मन लगाने की कोशिश की जाए, तो कठिनाई स्वाभाविक है। नए साल पर उन्होंने मोबाइल, मनोरंजन और अनावश्यक बातचीत में संतुलन रखने की सलाह दी।
निराशा नहीं, विश्वास रखें
अंत में प्रेमानंद महाराज ने कहा कि भजन का फल तुरंत दिखाई दे, यह जरूरी नहीं। जैसे बीज बोने के बाद समय लगता है, वैसे ही साधना का फल भी समय लेकर आता है। नए साल पर अगर मन भजन में न लगे, तो निराश होने के बजाय विश्वास रखें और प्रयास जारी रखें। यही भाव धीरे-धीरे भक्ति को गहरा बनाता है। इस तरह प्रेमानंद महाराज के ये सरल उपाय नए साल पर उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा हैं, जो भक्ति करना चाहते हैं, लेकिन मन की चंचलता से परेशान रहते हैं।