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Jaya Kishori Ji: जीवन में प्रेम करने की सही उम्र क्या है? जानें जया किशोरी जी ने क्या बताया

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
जया किशोरी जी
सार

Successful Relationships: युवाओं को पहले अपने व्यक्तित्व, शिक्षा और भविष्य को मजबूत बनाने पर ध्यान देना चाहिए। सही समय पर किया गया प्रेम न केवल अधिक सफल होता है, बल्कि जीवन में स्थिरता, सम्मान और खुशियां भी लेकर आता है।
 

Jaya Kishori Ji
Life Love Importance: प्रेम जीवन का एक सुंदर और महत्वपूर्ण भाव है। हर व्यक्ति अपने जीवन में कभी न कभी प्रेम का अनुभव करना चाहता है। लेकिन प्रेम केवल भावनाओं का नाम नहीं है, इसके साथ समझदारी, जिम्मेदारी और परिपक्वता भी जुड़ी होती है। प्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर और कथावाचिका जया किशोरी का मानना है कि जीवन में प्रेम करने की भी एक सही अवस्था होती है। उनका कहना है कि जब तक व्यक्ति अपने जीवन में कुछ बन न जाए और अपने पैरों पर खड़ा न हो जाए, तब तक उसे प्रेम संबंधों में पड़ने से बचना चाहिए।

जया किशोरी जी का कहना है कि युवावस्था में अधिकांश लोगों का ध्यान पढ़ाई, करियर और अपने भविष्य को मजबूत बनाने पर होना चाहिए। इस समय यदि कोई व्यक्ति प्रेम संबंधों में अधिक उलझ जाता है, तो उसका काफी समय और मानसिक ऊर्जा उसी में खर्च होने लगती है। वह अपने लक्ष्यों से भटक सकता है और जीवन के महत्वपूर्ण अवसरों को खो सकता है। उनका मानना है कि जब व्यक्ति अभी खुद ही अपने भविष्य को लेकर स्पष्ट नहीं है, तब वह किसी दूसरे व्यक्ति के साथ जीवन की गंभीर बातें कैसे समझ पाएगा। इसलिए पहले अपने सपनों को पूरा करना, शिक्षा प्राप्त करना और आर्थिक रूप से सक्षम बनना अधिक आवश्यक है।

जिम्मेदारियों की समझ 

जया किशोरी जी कहती हैं कि जब तक व्यक्ति खुद जिम्मेदारियां नहीं उठाता, तब तक उसे परिवार, रिश्तों और जीवन की वास्तविक चुनौतियों का सही अनुभव नहीं होता। कम उम्र में अक्सर लोग प्रेम को केवल आकर्षण या भावनात्मक लगाव समझ लेते हैं। लेकिन वास्तविक प्रेम में एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी निभाना, सम्मान देना और कठिन परिस्थितियों में साथ खड़ा रहना भी शामिल होता है। जब कोई व्यक्ति नौकरी करता है, परिवार की जरूरतों को समझता है और अपने निर्णयों की जिम्मेदारी उठाता है, तब उसे यह एहसास होता है कि जीवन केवल भावनाओं से नहीं चलता। ऐसे समय में वह रिश्तों को अधिक गंभीरता और समझदारी के साथ निभा सकता है।

आर्थिक रूप से सक्षम होना भी जरूरी

प्रेम और विवाह जैसे रिश्तों में आर्थिक स्थिरता की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जया किशोरी जी का कहना है कि जब व्यक्ति खुद कमाने लगता है और अपने खर्चों को संभालने में सक्षम हो जाता है, तब उसे पैसों का महत्व समझ आता है। वह यह भी जान पाता है कि भविष्य की योजनाएं कैसे बनाई जाती हैं और परिवार की जरूरतों को कैसे पूरा किया जाता है। यदि कोई व्यक्ति आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं है, तो कई बार रिश्तों में अनावश्यक तनाव और असुरक्षा की स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए प्रेम के साथ-साथ आत्मनिर्भरता भी जरूरी है।

रिश्तों को मजबूत बनाती है मैच्योरिटी

जया किशोरी जी का मानना है कि एक जिम्मेदार और परिपक्व व्यक्ति कभी भी ऐसा व्यवहार नहीं करेगा जो रिश्तों को नुकसान पहुंचाए। उसे यह समझ होती है कि विश्वास, सम्मान और ईमानदारी किसी भी संबंध की सबसे बड़ी नींव हैं। कम उम्र में भावनाएं बहुत तेजी से बदलती हैं। कई बार लोग बिना सोचे-समझे फैसले ले लेते हैं और बाद में पछताते हैं। लेकिन जैसे-जैसे उम्र और अनुभव बढ़ता है, व्यक्ति में परिपक्वता आती है। वह लोगों को बेहतर तरीके से समझ पाता है और सही-गलत का निर्णय भी अधिक संतुलित ढंग से कर पाता है। 

प्रेम और रिश्तों का वास्तविक महत्व 

जया किशोरी जी की सोच का सार यह है कि प्रेम जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन उससे पहले स्वयं को सक्षम और जिम्मेदार बनाना अधिक आवश्यक है। जब व्यक्ति अपने पैरों पर खड़ा हो जाता है, अपने करियर को दिशा दे देता है और जीवन की जिम्मेदारियों को समझने लगता है, तब वह प्रेम और रिश्तों का वास्तविक महत्व भी समझ पाता है। इसलिए युवाओं को पहले अपने व्यक्तित्व, शिक्षा और भविष्य को मजबूत बनाने पर ध्यान देना चाहिए। सही समय पर किया गया प्रेम न केवल अधिक सफल होता है, बल्कि जीवन में स्थिरता, सम्मान और खुशियां भी लेकर आता है।

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