विज्ञापन
Home  dharm  saint stories  devkinandan thakur ji maharaj told maintain control over your emotions while eating

Devkinandan Thakur Ji Maharaj: भोजन करते समय इन भावों पर रखें नियंत्रण, देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने बताया

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज
सार

Spiritual Benefits: भोजन का प्रभाव केवल शरीर तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह हमारे मन और विचारों को भी प्रभावित करता है। इसलिए भोजन करते समय ईर्ष्या, भय, क्रोध, लोभ, दीनता और द्वेष जैसे नकारात्मक भावों से दूर रहना चाहिए। 
 

Devkinandan Thakur Ji Maharaj
Spiritual Life Guidance: सनातन परंपरा में भोजन को केवल शरीर की भूख मिटाने का माध्यम नहीं माना गया है, बल्कि इसे एक पवित्र प्रक्रिया और साधना का रूप दिया गया है। हमारे ऋषि-मुनियों ने भोजन को प्रसाद की तरह ग्रहण करने की शिक्षा दी है। इसी संदर्भ में पूज्य देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज बताते हैं कि भोजन करते समय मनुष्य को अपने मन और भावनाओं पर विशेष नियंत्रण रखना चाहिए। यदि मन अशांत हो और उसमें ईर्ष्या, भय, क्रोध, लोभ, द्वेष या दीनता जैसे नकारात्मक भाव चल रहे हों, तो उस समय भोजन करने से बचना चाहिए। ऐसा भोजन शरीर और मन दोनों के लिए लाभदायक नहीं माना जाता।

जब व्यक्ति किसी दूसरे की उन्नति देखकर ईर्ष्या करता है या मन में किसी के प्रति द्वेष रखता है, तब उसका मन अशांत और तनावग्रस्त हो जाता है। ऐसी स्थिति में किया गया भोजन सही प्रकार से पच नहीं पाता। मन की नकारात्मक ऊर्जा शरीर की पाचन क्रिया को भी प्रभावित करती है। इसलिए भोजन करते समय मन को निर्मल और सकारात्मक बनाए रखना आवश्यक है। यदि मन में किसी के प्रति कटुता हो तो पहले उसे शांत करने का प्रयास करें, फिर भोजन ग्रहण करें।

भय और चिंता से दूर रहकर करें भोजन

भय और चिंता मनुष्य की ऊर्जा को कमजोर कर देते हैं। जब मन किसी आशंका या डर में उलझा रहता है, तब शरीर भी सामान्य रूप से कार्य नहीं कर पाता है। भोजन के समय यदि व्यक्ति भविष्य की चिंता, आर्थिक परेशानी या किसी अन्य डर में डूबा रहता है, तो उसका ध्यान भोजन पर नहीं रहता है। परिणामस्वरूप भोजन का रस और पोषण शरीर को पूर्ण रूप से प्राप्त नहीं हो पाता है। इसलिए भोजन करते समय मन को वर्तमान क्षण में रखकर शांत भाव से भोजन करना चाहिए।

क्रोध भोजन को बना देता है नुकसानदायक

क्रोध मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु माना गया है। जब व्यक्ति क्रोधित होता है, तब उसके शरीर में तनाव बढ़ जाता है और पाचन तंत्र पर भी उसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। क्रोध की अवस्था में खाया गया भोजन कई बार अपच, गैस और अन्य पाचन संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है। इसलिए यदि किसी बात पर बहुत अधिक गुस्सा आ रहा हो, तो पहले स्वयं को शांत करें और उसके बाद ही भोजन करें।

लोभ और दीनता से भी बचना आवश्यक

लोभ मनुष्य को कभी संतुष्ट नहीं होने देता। भोजन करते समय भी यदि मन लालच से भरा हो, तो व्यक्ति आवश्यकता से अधिक खा सकता है, जिससे स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। वहीं दीनता या अत्यधिक हीन भावना भी मन को कमजोर बनाती है। ऐसे भावों के साथ किया गया भोजन आनंद नहीं देता। भोजन का वास्तविक लाभ तभी मिलता है जब व्यक्ति संतोष और कृतज्ञता के भाव से उसे ग्रहण करे।

भोजन न पचने से उत्पन्न होती हैं समस्याएं

देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के अनुसार जब मनुष्य अशांत मन से भोजन करता है, तो वह भोजन ठीक प्रकार से पच नहीं पाता। अपचित भोजन शरीर में अनेक प्रकार की समस्याओं को जन्म देता है। आयुर्वेद में इसे ‘अजीर्ण’ कहा गया है। अजीर्ण होने पर शरीर में भारीपन, आलस्य, गैस, पेट दर्द और अन्य कई परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए भोजन के साथ मन की स्थिति का भी विशेष महत्व है।

प्रसन्नता और शांति के साथ करें भोजन

भोजन करते समय मन को शांत, प्रसन्न और संतुलित रखना चाहिए। मुस्कुराते हुए, ईश्वर का स्मरण करते हुए और कृतज्ञता के भाव से भोजन ग्रहण करने पर उसका सकारात्मक प्रभाव शरीर और मन दोनों पर पड़ता है। शांत चित्त से किया गया भोजन न केवल अच्छी तरह पचता है, बल्कि व्यक्ति को ऊर्जा, संतोष और मानसिक सुख भी प्रदान करता है।

भोजन को ईश्वर के प्रसाद के रूप में करें स्वीकार 

भोजन का प्रभाव केवल शरीर तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह हमारे मन और विचारों को भी प्रभावित करता है। इसलिए भोजन करते समय ईर्ष्या, भय, क्रोध, लोभ, दीनता और द्वेष जैसे नकारात्मक भावों से दूर रहना चाहिए। शांत मन, प्रसन्न चेहरे और आनंदपूर्ण भाव के साथ किया गया भोजन ही वास्तव में लाभदायक होता है। जब हम भोजन को ईश्वर के प्रसाद के रूप में स्वीकार करते हैं और पूरे सम्मान के साथ ग्रहण करते हैं, तब वह हमारे स्वास्थ्य, सुख और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में सहायक बनता है।

ये भी पढ़ें -  जीवन की चुनौतियां अवसर में कैसे बदलें? स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने बताया उपाय

ये भी देखें

Indresh Upadhyay Ji Maharaj
कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय जी महाराज
10 July 2026
Vallabhacharya Ji Maharaj
जगद्गुरु वल्लभाचार्य जी महाराज
10 July 2026
Rasraj ji Maharaj
रसराज जी महाराज
09 July 2026
Rambhadracharya Ji Maharaj
श्री रामभद्राचार्य जी महाराज
09 July 2026
Swami Raghavacharya Ji Maharaj
स्वामी श्री राघवाचार्य जी महाराज
09 July 2026

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel