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Chatur Narayan Ji Maharaj: शिवलिंग पूजा में भूलकर भी न रखें ये एक वस्तु, चतुर नारायण जी महाराज ने बताया महत्व

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कथावाचक चतुर नारायण जी महाराज
सार

Shivling Abhishek: भगवान शिव की पूजा में दूध का विशेष महत्व है। शिवलिंग पर दूध अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। लेकिन दूध को किस पात्र में रखा जा रहा है, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है। 
 

Chatur Narayan Ji Maharaj
Shivling Puja Niyam: भगवान शिव की पूजा में अभिषेक का बहुत बड़ा महत्व माना गया है। शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद और अन्य पवित्र पदार्थ अर्पित करके भक्त अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं। लेकिन शास्त्रों में अभिषेक के लिए उपयोग किए जाने वाले पात्रों के संबंध में भी कुछ विशेष नियम बताए गए हैं। यदि इन नियमों का ध्यान रखा जाए तो पूजा अधिक शुद्ध और विधिपूर्वक मानी जाती है।

धार्मिक ग्रंथों और संत-महात्माओं के अनुसार पूजा में केवल भाव ही नहीं, बल्कि पूजा की सामग्री और उसे अर्पित करने के साधनों की शुद्धता भी महत्वपूर्ण होती है। अभिषेक के लिए जिस पात्र का उपयोग किया जाता है, उसका प्रभाव भी पूजा पर पड़ता है। इसलिए भगवान शिव की पूजा करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि कौन-सा पात्र किस सामग्री के लिए उपयुक्त है और कौन-सा नहीं।

सोने के पात्र से अभिषेक 

शास्त्रों में देवी-देवताओं के अभिषेक के लिए स्वर्ण अर्थात सोने के पात्र को अत्यंत शुभ माना गया है। सोना पवित्रता, समृद्धि और दिव्यता का प्रतीक माना जाता है। कहा जाता है कि यदि भगवान का अभिषेक स्वर्ण पात्र से किया जाए तो उसका विशेष पुण्य प्राप्त होता है। हालांकि आज के समय में हर व्यक्ति के लिए सोने का बड़ा पात्र बनवाना संभव नहीं है। ऐसे में विद्वानों ने इसका एक सरल उपाय भी बताया है। यदि कोई व्यक्ति तांबे, पीतल या अन्य धातु का पात्र बनवाकर उसके मुख या ऊपरी भाग में थोड़ा सा सोना लगवा दे, तो वह भी स्वर्ण पात्र के समान माना जा सकता है। इस प्रकार सामान्य व्यक्ति भी शास्त्रीय मर्यादा का पालन कर सकता है।

दूध अर्पित करते समय रखें सावधानी

भगवान शिव की पूजा में दूध का विशेष महत्व है। शिवलिंग पर दूध अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। लेकिन दूध को किस पात्र में रखा जा रहा है, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है। धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक ज्ञान के अनुसार दूध को तांबे के पात्र में नहीं रखना चाहिए। कहा जाता है कि तांबे के संपर्क में आने पर दूध के गुण प्रभावित हो सकते हैं और वह पूजा के योग्य नहीं माना जाता। इसी कारण शिवलिंग पर चढ़ाने के लिए रखा गया दूध तांबे के लोटे, घड़े या अन्य तांबे के पात्र में नहीं रखना चाहिए।

तांबे के पात्र से क्यों बचना चाहिए?

तांबा सामान्य रूप से बहुत उपयोगी धातु माना जाता है और जल रखने के लिए इसे श्रेष्ठ भी बताया गया है। लेकिन दूध और दही जैसे पदार्थों के लिए तांबे का पात्र उपयुक्त नहीं माना जाता। इसके पीछे धार्मिक और पारंपरिक दोनों कारण बताए गए हैं। जब दूध लंबे समय तक तांबे के पात्र में रहता है, तो उसमें रासायनिक परिवर्तन होने की संभावना रहती है। इसी कारण पूजा में उपयोग होने वाला दूध अलग पात्र में रखा जाता है। यही वजह है कि भगवान शिव के अभिषेक के लिए जो विशेष पात्र बनाया जाता है, वह सामान्यतः तांबे का नहीं होता।

अभिषेक के लिए कौन-से पात्र श्रेष्ठ 

भगवान शिव के अभिषेक के लिए पीतल का पात्र उत्तम माना गया है। इसके अलावा अष्टधातु से बने पात्र भी बहुत शुभ माने जाते हैं। अष्टधातु को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना गया है और मंदिरों में भी इसका व्यापक उपयोग होता है। संत-महात्मा बताते हैं कि यदि संभव हो तो श्रृंगी पात्र से अभिषेक करना सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। श्रृंगी से किया गया अभिषेक विशेष फलदायी माना गया है और यह प्राचीन परंपराओं से जुड़ा हुआ है।

अभिषेक के लिए उपयुक्त पात्र 

भगवान शिव की पूजा केवल श्रद्धा का विषय नहीं है, बल्कि इसमें शास्त्रीय नियमों का भी विशेष महत्व है। शिवलिंग पर अभिषेक करते समय दूध को तांबे के पात्र में नहीं रखना चाहिए और अभिषेक के लिए उपयुक्त पात्र का चयन करना चाहिए। यदि सोने का पात्र उपलब्ध न हो तो पीतल या तांबे के पात्र पर थोड़ा स्वर्ण लगवाकर उसका उपयोग किया जा सकता है। साथ ही पीतल, अष्टधातु और श्रृंगी के पात्र अभिषेक के लिए अधिक श्रेष्ठ माने गए हैं। इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर भक्त भगवान शिव की पूजा को अधिक शुद्ध, विधिपूर्वक और फलदायी बना सकते हैं।

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