Anant Naad- Music for the Soul: अध्यात्म जगत की जानी-मानी वक्ता देवी चित्रलेखा 23 अगस्त 2026 को नई दिल्ली स्थित यशोभूमि में ‘अनंत नाद: Music for the Soul’ के भव्य प्रीमियर के साथ भक्ति संगीत की एक नई और वैश्विक यात्रा की शुरुआत करेंगी। यह विशेष आयोजन राधा-कृष्ण के शाश्वत प्रेम, भक्ति और आध्यात्मिक भाव को भजन, कीर्तन, सजीव संगीत और कथावाचन के माध्यम से दर्शकों के सामने प्रस्तुत करेगा। अल्फांसो स्टूडियोज, अमर उजाला, ट्राइबवाइब (ए बुकमाईशो एंटरप्राइज) और बिगएफएम की ओर से प्रस्तुत यह आयोजन भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और आधुनिक मंचीय अनुभव का अनोखा संगम पेश करने की तैयारी में है।
यह आयोजन केवल एक संगीत कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे कृष्ण भक्ति से जुड़ा एक विशेष आध्यात्मिक अनुभव बनाने की कोशिश की गई है। ‘अनंत नाद’ के दौरान भक्ति संगीत, सामूहिक गायन और कथावाचन के जरिए ऐसा वातावरण तैयार किया जाएगा, जिसमें दर्शक खुद को कार्यक्रम का हिस्सा महसूस कर सकें। यहां भजनों को केवल सुनने के बजाय उनके साथ जुड़ने और सामूहिक रूप से गाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
आयोजन का खास आकर्षण होगा ‘वृंदावन अनुभव’
‘अनंत नाद’ में ‘वृंदावन अनुभव’ को विशेष आकर्षण के तौर पर तैयार किया गया है। इसके जरिए दिल्ली में मौजूद दर्शकों को वृंदावन की शांति, राधा-कृष्ण के प्रेम और भक्ति की उस अनुभूति से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा, जिसके लिए वृंदावन को जाना जाता है। संगीत, मंचीय प्रस्तुति और आध्यात्मिक कथाओं के मेल से कार्यक्रम को एक अलग अनुभव देने की तैयारी है।
आयोजकों के अनुसार, ‘अनंत नाद’ का उद्देश्य भारतीय आस्था और भक्ति को आधुनिक सांस्कृतिक मंच पर एक नए अंदाज में सामने लाना है। यह आयोजन दर्शकों को कुछ समय के लिए रोजमर्रा की भागदौड़ से दूर ले जाकर संगीत और भक्ति के माध्यम से शांति और आनंद का अनुभव कराने की दिशा में एक प्रयास है। कार्यक्रम के टिकट विशेष रूप से बुकमाईशो पर उपलब्ध होंगे। वहीं, अमर उजाला इस आयोजन से प्रिंट पार्टनर के रूप में जुड़ा हुआ है।
देवी चित्रलेखा जी की आध्यात्मिक यात्रा से जुड़ी है ‘अनंत नाद’ की सोच
‘अनंत नाद’ की परिकल्पना देवी चित्रलेखा जी की लंबे समय से चली आ रही आध्यात्मिक और भक्ति यात्रा से भी जुड़ी हुई है। वह अपनी कथाओं और आध्यात्मिक प्रस्तुतियों के माध्यम से सनातन धर्म की शिक्षाओं को आम जीवन से जोड़कर समझाने के लिए जानी जाती हैं। उनकी कथाओं में भक्ति और सेवा के साथ करुणा, पारिवारिक मूल्यों और जीवन में आध्यात्मिक विचारों की भूमिका पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है।
उनकी संकीर्तन यात्राओं के माध्यम से हरिनाम संकीर्तन, भक्ति संगीत और सामूहिक भागीदारी का संदेश भारत के अलावा दुनिया के 35 से अधिक देशों तक पहुंच चुका है। डिजिटल प्लेटफॉर्म, लाइव प्रसारण और भक्ति संगीत के जरिए भी बड़ी संख्या में लोग उनकी आध्यात्मिक प्रस्तुतियों से जुड़े हैं। ऐसे में ‘अनंत नाद’ को उनकी इसी यात्रा को संगीत और सामूहिक भक्ति के बड़े मंच पर आगे बढ़ाने वाली पहल के तौर पर देखा जा रहा है।
सितार की धुनों से और खास बनेगी भक्ति की शाम
‘अनंत नाद’ में सितार साधक भागीरथ भट्ट भी अपनी विशेष प्रस्तुति देंगे। उनके सितार वादन में भारतीय शास्त्रीय संगीत की गहराई और भक्ति भाव का मेल देखने को मिलेगा। कार्यक्रम में लाइव ऑर्केस्ट्रा, भक्ति गायन, कोरस और दृश्य प्रस्तुतियों के साथ सितार की मधुर धुनें भी सुनने को मिलेंगी।
आयोजन की प्रस्तुति इस तरह तैयार की गई है कि दर्शक केवल सामने हो रही प्रस्तुति को देखने वाले श्रोता न रहें, बल्कि भक्ति के सामूहिक अनुभव में सहभागी बनें। हरिनाम, भजन और कीर्तन के दौरान सामूहिक भागीदारी पर जोर दिया जाएगा। यही वजह है कि ‘अनंत नाद’ को पारंपरिक संगीत समारोह से अलग एक सामूहिक आध्यात्मिक अनुभव के रूप में पेश किया जा रहा है।
संगीत, कथा और भक्ति का होगा संगम
इस पूरे आयोजन में संगीत के साथ कथावाचन को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। राधा-कृष्ण के प्रेम और भक्ति से जुड़े प्रसंगों को संगीत और मंचीय प्रस्तुति के साथ जोड़ा जाएगा। भजन और कीर्तन के माध्यम से जहां भक्तिमय माहौल बनाया जाएगा, वहीं सजीव संगीत और दृश्य प्रस्तुति कार्यक्रम को आधुनिक मंचीय रूप देंगे।
‘अनंत नाद’ की खास बात यह रहेगी कि यहां कलाकार और दर्शकों के बीच की सामान्य दूरी को कम करने की कोशिश की जाएगी। भक्ति गीतों को सामूहिक रूप से गाने और संगीत में शामिल होने का अवसर दर्शकों को कार्यक्रम से भावनात्मक रूप से जोड़ने में मदद करेगा। आयोजन की पूरी अवधारणा में संगीत को केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और जुड़ाव का माध्यम बनाने पर जोर दिया गया है।
आयोजन की प्रमुख जानकारी
कार्यक्रम: अनंत नाद–म्यूजिक फॉर द सोल (ग्रैंड प्रीमियर)
तारीख: 23 अगस्त 2026
समय: शाम 7:30 बजे
स्थान: यशोभूमि, नई दिल्ली