5 Mysterious Temples in India: भारत में अनेक मंदिर हैं, जो देश के हर शहर और गांव में पाए जाते हैं, लेकिन इनमें से कुछ मंदिर बेहद चमत्कारी और रहस्यमयी भी हैं।
5 Mysterious Temples in India: भारत में अनेक मंदिर हैं, जो देश के हर शहर और गांव में पाए जाते हैं, लेकिन इनमें से कुछ मंदिर बेहद चमत्कारी और रहस्यमयी भी हैं। ये चमत्कारी और रहस्यमयी मंदिर भी एक-दो या दस या पचास की संख्या में नहीं बल्कि हजारों की संख्या में हैं। लेकिन आज हम आपको केवल 5 प्रमुख चमत्कारी और रहस्यमयी मंदिरों के बारे में बता रहे हैं। आइए जानते हैं वो कहां हैं और उनकी क्या खासियत है…
भगवान वेंकटेश्वर तिरुपति बालाजी को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार भगवान बालाजी ने अपनी बेटी की शादी के लिए धन के देवता कुबेर से बड़ी मात्रा में धन उधार लिया था। इस कर्ज को चुकाने के लिए भक्त इस मंदिर में धन, सोना आदि दान करते हैं, तिरुपति बालाजी का मंदिर दुनिया का सबसे अमीर मंदिर माना जाता है।
2. कामाख्या मंदिर: ( Kamakhya Mandir )
पूर्वोत्तर भारतीय राज्य असम में गुवाहाटी के पास स्थित कामाख्या देवी मंदिर देश के 52 शक्तिपीठों में सबसे प्रसिद्ध है। लेकिन इस अति प्राचीन मंदिर में देवी सती या मां दुर्गा की एक भी मूर्ति नहीं है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस स्थान पर देवी सती की योनि गिरी थी, जो कालांतर में महान शक्ति-साधना का केंद्र बन गई। कहा जाता है कि यहां हर मनोकामना पूरी होती है। यही कारण है कि इस मंदिर को कामाख्या कहा जाता है। यह मंदिर तीन भागों में बना है। इसका पहला भाग सबसे बड़ा है, जहां हर किसी को जाने की अनुमति नहीं है। दूसरे भाग में माता के दर्शन होते हैं, जहां एक पत्थर से हर समय पानी निकलता रहता है। कहा जाता है कि महीने में एक बार इस पत्थर से खून की धारा निकलती है। ऐसा क्यों और कैसे होता है, आज तक कोई नहीं जानता?
3. ज्वालामुखी मंदिर( jwalamukhi Mandir )
ज्वाला देवी का प्रसिद्ध ज्वालामुखी मंदिर हिमाचल प्रदेश में कालीधार पहाड़ी के बीच में स्थित है। यह भारत का एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ भी है, जिसके बारे में मान्यता है कि इस स्थान पर माता सती की जीभ गिरी थी। माता सती की जीभ के प्रतीक के रूप में यहां धरती के गर्भ से ज्वालाएं निकलती हैं, जो नौ रंगों की होती हैं। इन नौ रंगों की ज्वालाओं को देवी शक्ति के नौ रूप माना जाता है। ये देवियां हैं: महाकाली, अन्नपूर्णा, चंडी, हिंगलाज, विंध्यवासिनी, महालक्ष्मी, सरस्वती, अंबिका और अंजी देवी। कोई नहीं जानता कि ये ज्वालाएं कहां से प्रकट हो रही हैं? इनका रंग परिवर्तन कैसे हो रहा है? आज भी लोग यह नहीं जान पाए हैं कि ये कैसे जलती हैं और कब तक जलती रहेंगी? कहा जाता है कि कुछ मुस्लिम शासकों ने ज्वाला को बुझाने की कोशिश की थी, लेकिन वे असफल रहे।
मीनाक्षी अम्मन मंदिर देवी पार्वती को समर्पित देश के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यह मंदिर अपनी वास्तुकला के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यह मंदिर देश के बाकी मंदिरों से काफी अलग है क्योंकि इस मंदिर में शिव और देवी पार्वती दोनों की एक साथ पूजा की जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, सुंदरेश्वर के रूप में जन्मे भगवान शिव पार्वती (मीनाक्षी) से विवाह करने के लिए मदुरै आए थे।
राजस्थान के दौसा जिले में स्थित मेहंदीपुर के बालाजी धाम को भगवान हनुमान के 10 प्रमुख सिद्धपीठों में गिना जाता है। मान्यता है कि इस स्थान पर हनुमानजी जागृत अवस्था में विराजमान रहते हैं। यहां देखा गया है कि भूत-प्रेत और बुरी आत्माओं से ग्रसित लोग यहां के प्रेतराज सरकार और कोतवाल कप्तान के मंदिर के प्रभाव में आते ही चीखने-चिल्लाने लगते हैं और फिर वे बुरी आत्माएं, भूत-प्रेत, पिशाच आदि पल भर में पीड़ितों के शरीर से बाहर निकल आते हैं। कोई नहीं जानता कि ऐसा कैसे होता है? लेकिन भूत-प्रेत और बुरी आत्माओं से मुक्ति पाने के लिए सदियों से लोग दूर-दूर से यहां आते रहे हैं। इस मंदिर में रात में रुकना वर्जित है।
ये भी पढ़ें-Ganesha Temples: भारत के सबसे प्राचीन गणेश मंदिरों के करें दर्शन, जहां दर्शन के लिए भक्तों की उमड़ती है भीड़