Raksha Bandhan Festival: हिन्दू धर्म में रक्षाबंधन का पर्व भाई और बहन के लिए बहुत महत्व रखता है। इस दिन लोगों को कुछ गलतियां भूल से भी नहीं करनी चाहिए। इससे भाई-बहन के आपस का प्यार बना रहता है और जीवन में कभी मुश्किलें नहीं आती हैं।
Raksha Bandhan Festival 2025: रक्षाबंधन, भाई और बहन के प्रेम, विश्वास और अटूट रिश्ते का एक पवित्र त्योहार है। यह पर्व केवल एक धागा बांधने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका गहरा धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व है। इस साल 2025 में रक्षाबंधन का पावन पर्व 9 अगस्त दिन शनिवार को मनाया जाएगा। यह भाई-बहन के प्रेम और अटूट रिश्ते का प्रतीक है, इसलिए इसे पूरे विधि-विधान और शुद्धता के साथ मनाना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन कुछ गलतियां करने से बचना चाहिए।
रक्षाबंधन पर न करें ये गलतियां
भद्रा काल में राखी न बांधें
राखी बांधने के लिए शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। भद्रा काल में राखी बांधना अशुभ माना जाता है। हालांकि, इस बार 9 अगस्त 2025 को भद्रा का साया सूर्योदय से पहले ही तड़के 1:52 बजे समाप्त हो जाएगा। इसलिए बहनें अपने भाईयों को पूरे दिन निश्चिंत होकर राखी बांध सकती हैं।
गलत दिशा में न बैठें
भाई को राखी बांधते समय उसका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। दक्षिण दिशा में मुख करके राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता है।
टूटी हुई या अशुभ राखी का प्रयोग
खंडित या टूटी-फूटी राखी का इस्तेमाल बिल्कुल न करें। ऐसी राखियां शुभ फल नहीं देती हैं। इसके अलावा, प्लास्टिक, अशुभ प्रतीकों (जैसे नजरबट्टू या एविल आई), या देवी-देवताओं की तस्वीर वाली राखियां भी बांधने से बचें।
काले रंग की राखी
हिंदू धर्म में काले रंग को शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना जाता है। इसलिए काले रंग की राखी बांधने से बचें। बिना स्नान किए या अशुद्ध अवस्था में राखी नहीं बांधनी चाहिए। राखी बांधने से पहले स्वयं भी स्नान करें और पूजा की थाली तैयार करें।
तामसिक चीजों का सेवन
रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन मांस-मदिरा, लहसुन-प्याज जैसी तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। राखी बांधते समय मन में किसी के प्रति द्वेष या नकारात्मक भाव नहीं होने चाहिए। इसे पूरी श्रद्धा और प्रेम से मनाना चाहिए।
राखी बांधने के सही नियम
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। घर के पूजा स्थान पर सबसे पहले भगवान की पूजा करें।
एक थाली में रोली (या कुमकुम), अक्षत (साबुत चावल), राखी, मिठाई और एक छोटा दीपक रखें।
भाई को साफ-सुथरे आसन पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठाएं। भाई के सिर पर एक रुमाल या कोई कपड़ा रखें।
सबसे पहले भाई के माथे पर रोली और अक्षत का तिलक लगाएं।
भाई के दाहिने हाथ की कलाई पर राखी बांधें। इस दौरान मन ही मन भाई की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और सुरक्षा की कामना करें। आप चाहें तो इस मंत्र का जाप भी कर सकती हैं।
येन बद्धो बली राजा, दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वां प्रतिबद्ध्नामि, रक्षे मा चल मा चल।।
भाई को राखी बांधने के बाद भाई को मिठाई खिलाएं। इसके बाद, भाई अपनी बहन को उपहार देता है और उसकी रक्षा का वचन लेता है। बहन भी भाई को आशीर्वाद देती है। इन नियमों का पालन करके राखी बांधने से यह पावन पर्व और भी शुभ और फलदायी बन जाता है और जीवन में कभी मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ता है।
रक्षाबंधन का महत्व
ऐसी मान्यता है कि रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के रिश्ते को और भी गहरा और मजबूत बनाता है। राखी बांधने की रस्म के माध्यम से बहन अपने भाई के लिए मंगल कामना करती है, और भाई बदले में अपनी बहन की रक्षा का वचन देता है। रक्षाबंधन परिवार को एक साथ लाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। इस दिन दूर-दराज रहने वाले भाई-बहन एक दूसरे से मिलते हैं, जिससे पारिवारिक एकता और सद्भाव बढ़ता है।