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Pooja Path : आम के पत्तों से क्यों सजता है पूजा का हर कलश? जानिए रहस्य

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कोमल शर्मा
सार

Mango Leaves In Pooja : हिंदू धर्म में अलग-अलग देवी देवताओं की पूजा अलग-अलग तरह से की जाती है. जिसमें भिन्न-भिन्न सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है. इन पूजा-पाठ में उपयोग होने वाले कई फूल और पत्ते हैं जो शुभ माने जाते हैं.

Mango Leaves In Pooja
Mango Leaves In Pooja : हिंदू धर्म में अलग-अलग देवी देवताओं की पूजा अलग-अलग तरह से की जाती है. जिसमें भिन्न-भिन्न सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है. इन पूजा-पाठ में उपयोग होने वाले कई फूल और पत्ते हैं जो शुभ माने जाते हैं. आज की इस कड़ी में हम बात करेंगे आम के पत्तों के बारे में जिनका उपयोग शादी-विवाह , गृह प्रवेश, बंदनवार और पूजा-पाठ में किया जाता है. लेकिन  क्या आपने कभी सोचा है कि लगभग हर शुभ पूजा, गृह प्रवेश, विवाह या व्रत में कलश पर आम के पत्ते क्यों लगाए जाते हैं? क्या यह केवल परंपरा है, या इसके पीछे कोई गहरा रहस्य छिपा है? इस लेख  को अंत तक जरूर पढ़ें आपको आपके सारे सवाल के जवाब मिल जाएंगे । 

कलश पर क्यों सजाए जाते हैं आम के पत्ते 

जब पूजा में कलश स्थापित किया जाता है, तो उसके मुख पर आम के ताजे पत्ते लगाए जाते हैं और ऊपर नारियल रखा जाता है। देखने में यह एक साधारण धार्मिक सजावट लग सकती है, लेकिन शास्त्रों में इसका विशेष महत्व बताया गया है। पुराणों और वैदिक परंपराओं के अनुसार, कलश को सृष्टि, समृद्धि और जीवन का प्रतीक माना जाता है। इसमें भरा जल पंचतत्त्वों का प्रतिनिधित्व करता है, और उसके ऊपर रखे आम के पत्ते उस जीवन ऊर्जा के प्रतीक माने जाते हैं जो घर और वातावरण में शुभता का संचार करती है।

आम का वृक्ष क्यों माना गया पवित्र?

भारतीय संस्कृति में आम के वृक्ष को केवल फल देने वाला पेड़ नहीं माना गया, बल्कि इसे मंगल, समृद्धि और उर्वरता का प्रतीक माना गया है। प्राचीन ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि आम का वृक्ष देवताओं को प्रिय माना जाता है और इसकी हरियाली जीवन की निरंतरता का संकेत देती है।कहा जाता है कि जहां आम के वृक्ष होते हैं, वहां वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। यही कारण है कि पूजा के समय आम के पत्तों का प्रयोग करके उस शुभ ऊर्जा को आमंत्रित करने की भावना जुड़ी हुई है।

क्या आम के पत्तों में छिपी है सकारात्मक ऊर्जा?

अब रहस्य थोड़ा और गहराता है। परंपरागत मान्यताओं के अनुसार, आम के पत्ते नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने और वातावरण को शुद्ध बनाने में सहायक माने जाते हैं।वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो हरे पत्ते वातावरण में ऑक्सीजन छोड़ते हैं और ताजगी का अनुभव कराते हैं। आम के पत्तों में प्राकृतिक सुगंध और कुछ ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो वातावरण को हल्का और शुद्ध महसूस कराते हैं। यही कारण है कि पूजा के समय ताजे आम के पत्तों का उपयोग विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

आम के पत्तों का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में आम के पत्तों को पंचपल्लव का हिस्सा माना जाता है। पंचपल्लव में पांच प्रकार के पवित्र पत्तों का उल्लेख मिलता है, जिनका उपयोग विशेष धार्मिक अनुष्ठानों में किया जाता है। आम के पत्ते इनमें प्रमुख स्थान रखते हैं।इन पत्तों को कलश पर लगाने का अर्थ है कि पूजा स्थल पर देवी-देवताओं का स्वागत किया जा रहा है। जैसे किसी अतिथि के आगमन पर घर को सजाया जाता है, वैसे ही आम के पत्तों से पूजा स्थल को पवित्र और स्वागत योग्य बनाया जाता है।

कलश पर कितने पत्ते लगाए जाते हैं?

आम के पत्ते हरे, ताजे और जीवन से भरपूर दिखाई देते हैं। हरा रंग प्रकृति, विकास और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इसलिए इन्हें पूजा में लगाने का अर्थ है कि घर में सुख, शांति, धन और समृद्धि का प्रवेश हो।भारतीय घरों में त्योहारों और शुभ अवसरों पर दरवाजे पर आम के पत्तों की तोरण भी बांधी जाती है। माना जाता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है और नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं। ज्यादातर पूजा विधियों में कलश पर पांच या सात आम के पत्ते लगाए जाते हैं। इन संख्याओं का भी विशेष महत्व माना गया है। पांच पत्ते पंचतत्त्वों का प्रतीक माने जाते हैं पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश। सात पत्ते सात लोकों और सात चक्रों का प्रतीक माने जाते हैं। 

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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)



 

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