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Mauni Amavasya 2025: मौनी अमावस्या के दिन कौन-कौन से कार्य नहीं करने चाहिए, जानिए यहां...

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Mauni Amavasya 2025: मौनी अमावस्या 2025: माघ मास में पड़ने वाली मौनी अमावस्या तिथि का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इस दिन स्नान और दान का बहुत महत्व है। मौनी अमावस्या को माघी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है।

Mauni Amavasya 2025
Mauni Amavasya 2025: मौनी अमावस्या 2025: माघ मास में पड़ने वाली मौनी अमावस्या तिथि का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इस दिन स्नान और दान का बहुत महत्व है। मौनी अमावस्या को माघी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। आपको बता दें कि मौनी अमावस्या के दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों ही मकर राशि में गोचर कर रहे होते हैं, जिसके कारण इस दौरान सूर्य और चंद्रमा से जुड़ी सकारात्मक शक्तियां और भी मजबूत हो जाती हैं। इसलिए इस दिन किए गए स्नान और दान का महत्व और भी बढ़ जाता है। इसके अलावा अमावस्या के दिन पितरों के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध भी किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या के दिन पितर धरती पर आते हैं। तो ऐसे में पितरों को प्रसन्न करने के लिए व्यक्ति को ये गलतियां करने से बचना चाहिए। 

मौनी अमावस्या के दिन भूलकर भी न करें ये काम, नहीं तो पितृ होंगे नाराज

मौनी अमावस्या के दिन भूलकर भी तामसिक चीजों का सेवन न करें। इस दिन मांस, मछली और शराब से दूर रहें।

पितरों की नाराजगी से बचने के लिए अमावस्या के दिन भूलकर भी अपने पितरों के बारे में कुछ बुरा न कहें।

मौनी अमावस्या के दिन कुत्ते, गाय और कौवे को कष्ट न दें।

अमावस्या के दिन भूलकर भी पितरों के लिए पिंडदान, तर्पण और दान करना न भूलें। नहीं तो आप पितरों के आशीर्वाद से वंचित रह जाएंगे।

मौनी अमावस्या के दिन घर के आसपास गंदगी न फैलाएं। इस दिन साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।

मौनी अमावस्या के दिन करें ये काम

मौनी अमावस्या के दिन गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, धन, वस्त्र, चावल और तिल का दान करें। ऐसा करने से पितृ प्रसन्न होंगे।

अमावस्या के दिन गंगा नदी या अन्य पवित्र नदियों में जाकर स्नान और दान करें। इससे आपको देवी-देवताओं के साथ पितरों का भी आशीर्वाद मिलेगा।

मौनी अमावस्या के दिन गाय, कुत्ते, कौए आदि को भोजन खिलाएं। ऐसा करने से पितर प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद देते हैं।

अमावस्या के दिन घर के बाहर दक्षिण दिशा में तेल का दीपक जरूर जलाएं। यह दिशा पितरों की मानी जाती है।

अमावस्या के दिन नदी के किनारे, घर के बाहर, पितरों की तस्वीर के पास और पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने से पितर प्रसन्न होते हैं।

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