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Mata Vaishno Devi: त्रिकुटा पर्वत पर ही क्यों बसी मां वैष्णों देवी, जानिए कथा

जीवांजलिPublished by:
कोमल शर्मा
सार

Mata Vaishno Devi:  जम्मू और कश्मीर की पवित्र पहाड़ियों में स्थित, माता वैष्णो देवी का तीर्थस्थल लाखों भक्तों की आस्था का मुख्य केंद्र है।

Mata Vaishno Devi: 
 Mata Vaishno Devi:  जम्मू और कश्मीर की पवित्र पहाड़ियों में स्थित, माता वैष्णो देवी का तीर्थस्थल लाखों भक्तों की आस्था का मुख्य केंद्र है। हर साल, अनगिनत श्रद्धालु माता रानी का आशीर्वाद पाने के लिए त्रिकूट पर्वत की कठिन चढ़ाई करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि माता वैष्णो देवी ने अपने पवित्र निवास के लिए त्रिकूट पर्वत को ही क्यों चुना? इससे जुड़ी कई दिलचस्प कहानियाँ हैं जो धार्मिक मान्यताओं, माता रानी की दिव्य गाथा और उनके अलौकिक रूपों से जुड़ी हैं। आइए त्रिकूट पर्वत पर माता वैष्णो देवी के विराजमान होने के रहस्य और इससे जुड़े धार्मिक महत्व के बारे में जानें।

माता वैष्णो देवी की कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, वैष्णो देवी के जन्म की कहानी भगवान विष्णु के एक अंश से जुड़ी है। दक्षिण भारत में रत्नाकर के घर एक कन्या का जन्म हुआ उसने ध्यान और तपस्या का मार्ग चुना। अपने वनवास के दौरान, जब भगवान राम उनसे मिलने आए,तो वैष्णवी ने उन्हें भगवान विष्णु का अवतार पहचाना और अपनी आत्मा को उनके साथ मिलाने की प्रार्थना की। भगवान राम ने उनसे कहा कि अगर वह वनवास के बाद उन्हें फिर से पहचान लेंगी तो उनकी इच्छा निश्चित रूप से पूरी होगी।

भगवान श्री राम का वैष्णवी को निर्देश

बाद में, भगवान राम एक बुजुर्ग व्यक्ति के रूप में उनके सामने प्रकट हुए लेकिन वैष्णवी उन्हें पहचान नहीं पाईं। तब भगवान ने उन्हें सांत्वना दी और भरोसा दिलाया कि कलयुग में 'कल्कि' अवतार के समय उनकी इच्छा पूरी होगी। उन्होंने वैष्णवी को त्रिकूट पर्वत पर जाकर ध्यान करने का निर्देश भी दिया।

इसके बाद वैष्णवी त्रिकूट पर्वत पर गईं और गहरे ध्यान में लीन हो गईं। जब भैरवनाथ ने वैष्णवी को देखा तो वह हथियारों से लैस था। उनकी सुंदरता से मोहित होकर भैरवनाथ उन पर आसक्त हो गया और उनसे शादी करने के लिए परेशान करने लगा। भैरवनाथ से बचने के लिए वैष्णवी पहाड़ों की ओर चल पड़ीं।

भैरवनाथ को अपनी गलती का एहसास

अर्धकुंवारी में रुकने के बाद वह पवित्र गुफा तक पहुँचीं। जब भैरवनाथ गुफ़ा में पहुँचे, तो देवी ने उनका सिर धड़ से अलग कर दिया। अपनी आख़िरी घड़ी में भैरवनाथ को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने माता से माफ़ी माँगी। इसके बाद वैष्णवी ने अपना इंसानी रूप त्याग दिया, एक पत्थर में बदल गईं और हमेशा के लिए ध्यान-मुद्रा में चली गईं। ध्यान देने वाली बात यह है कि यही पवित्र गुफ़ा अब श्री माता वैष्णो देवी जी के तीर्थ-स्थल के रूप में जानी जाती है।

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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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