Masik Shivratri 2025: वैदिक पंचांग के अनुसार, 27 जनवरी यानी कल भगवान शिव को समर्पित मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाएगा। मासिक शिवरात्रि के दिन शिवलिंग की विधिवत पूजा करना विशेष पुण्यदायी माना जाता है। इस दिन शाम के समय पूरे शिव परिवार की विधि-विधान से पूजा की जाती है। आइए जानते हैं मासिक शिवरात्रि पर पूजा का शुभ मुहूर्त, संपूर्ण विधि और मंत्र
कैसे करें भगवान शिव की पूजा
स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनें। शिव परिवार समेत सभी देवी-देवताओं की विधिवत पूजा करें। अगर आप व्रत रखना चाहते हैं तो हाथ में पवित्र जल, फूल और अक्षत लेकर व्रत रखने का संकल्प लें। फिर शाम को गोधूलि बेला में घर के मंदिर में दीपक जलाएं। फिर शिव मंदिर या घर पर ही भगवान शिव का अभिषेक करें और शिव परिवार की विधिवत पूजा करें। अब मासिक शिवरात्रि व्रत की कथा सुनें। फिर घी के दीपक से पूरी श्रद्धा के साथ भगवान शिव की आरती करें। अंत में ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करें। साथ ही अंत में क्षमा प्रार्थना करें।
मासिक शिवरात्रि कब है
पंचांग के अनुसार माघ मास की कृष्ण चतुर्दशी 27 जनवरी 2025 को प्रातः 08:34 बजे प्रारम्भ होगी, जो 28 जनवरी को सायं 07:35 बजे समाप्त होगी। ऐसे में मासिक शिवरात्रि का व्रत 27 जनवरी को रखा जाएगा।
भगवान शिव की आरती करें
ॐ जय शिव ओंकारा,स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव,अर्द्धांगी धारा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
एकानन चतुराननपञ्चानन राजे।
हंसासन गरूड़ासनवृषवाहन साजे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
दो भुज चार चतुर्भुजदसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखतेत्रिभुवन जन मोहे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
अक्षमाला वनमालामुण्डमाला धारी।
त्रिपुरारी कंसारीकर माला धारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
श्वेताम्बर पीताम्बरबाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिकभूतादिक संगे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
कर के मध्य कमण्डलुचक्र त्रिशूलधारी।
सुखकारी दुखहारीजगपालन कारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिवजानत अविवेका।
प्रणवाक्षर मध्येये तीनों एका॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
लक्ष्मी व सावित्रीपार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी,शिवलहरी गंगा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
पर्वत सोहैं पार्वती,शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन,भस्मी में वासा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
जटा में गंगा बहत है,गल मुण्डन माला।
शेष नाग लिपटावत,ओढ़त मृगछाला॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
काशी में विराजे विश्वनाथ,नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत,महिमा अति भारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
त्रिगुणस्वामी जी की आरतीजो कोइ नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी,मनवान्छित फल पावे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥