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Ma Laxmi: क्यों कहा जाता है मां लक्ष्मी को उलूकवाहिनी, जानिए कथा

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कोमल शर्मा
सार

Ma Laxmi:  हिंदू धर्म में देवी लक्ष्मी को 'उलूकवाहिनी' कहा जाता है क्योंकि उल्लू उनका वाहन है। उल्लू को ज्ञान और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। इसमें कई ऐसे गुण हैं जो देवी लक्ष्मी के स्वभाव को दर्शाते हैं

Ma Laxmi: 
Ma Laxmi:  हिंदू धर्म में देवी लक्ष्मी को 'उलूकवाहिनी' कहा जाता है क्योंकि उल्लू उनका वाहन है। उल्लू को ज्ञान और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। इसमें कई ऐसे गुण हैं जो देवी लक्ष्मी के स्वभाव को दर्शाते हैं उदाहरण के लिए उल्लू अंधेरे में भी सतर्क रहता है और मौन रहकर गहरे चिंतन में लीन हो सकता है। देवी लक्ष्मी को एक ऐसे साथी किसी पशु या पक्षी की तलाश थी जो भौतिक धन-संपत्ति के प्रति आसक्त न हो और जो घने अंधेरे में भी ज्ञान की खोज कर सके क्योंकि केवल ऐसा ही जीव धन का सच्चा संरक्षक बन सकता है। उल्लू में अंधेरे में भी रास्ता खोजने की स्वाभाविक क्षमता होती है। वह दुनिया के शोर-शराबे से दूर रहता है और अपना ध्यान आत्म-चिंतन पर केंद्रित रखता है यानी अपने भीतर के अंधेरे में झांकता है। यही कारण है कि देवी लक्ष्मी को उल्लू सबसे अधिक पसंद आया। उनके द्वारा उल्लू को अपना वाहन चुनने के पीछे एक पौराणिक कथा भी है जो इस प्रकार है

देवी लक्ष्मी ने उल्लू को अपना वाहन क्यों चुना?

एक बार देवी लक्ष्मी ने सभी पशु-पक्षियों से कहा कि वे कार्तिक मास की अमावस्या को पृथ्वी पर आएंगी और अपना वाहन चुनेंगी। उन्होंने घोषणा की कि पृथ्वी पर आने के बाद जो भी जीव सबसे पहले उनके पास पहुंचेगा उसे ही उनका वाहन बनाया जाएगा। सभी पशु-पक्षी उस अमावस्या की प्रतीक्षा करने लगे। अमावस्या की घनी अंधेरी रात में देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर आईं लेकिन घने अंधेरे के कारण अन्य पशु-पक्षियों को उन तक पहुंचने में कठिनाई हुई। वहीं उल्लू ने अपनी पैनी दृष्टि से घने अंधेरे के बीच भी देवी लक्ष्मी को देख लिया और तुरंत उनके पास पहुंच गया। देवी लक्ष्मी ने देखा कि उल्लू न तो शोर मचा रहा था और न ही बेचैनी से इधर-उधर भाग रहा था; वह बिना विचलित हुए शांत और एकाग्र बैठा था। इन गुणों से प्रभावित होकर देवी लक्ष्मी ने उल्लू को अपना वाहन चुन लिया। इसके पीछे उनका उद्देश्य यह था कि जब भी वे किसी को धन प्रदान करें तो उल्लू इस बात की याद दिलाता रहे कि धन से कहीं अधिक महत्वपूर्ण ज्ञान, मौन और जागरूकता है। तब से उल्लू देवी लक्ष्मी का वाहन बन गया आज भी जब देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है तो उन्हें एक शांत, स्थिर और मौन उल्लू के साथ दर्शाया जाता है।

उल्लू का आध्यात्मिक महत्व

उल्लू का गहरा आध्यात्मिक महत्व है। इसमें अंधेरे में भी स्पष्ट रूप से देखने की क्षमता होती है जो यह दर्शाती है कि सच्चा ज्ञान सही निर्णय लेने की क्षमता में निहित है अंधेरे में भी, जैसे कि अज्ञानता या संकट के समय। उल्लू स्वभाव से ही शांत, धैर्यवान और एकाग्र होता है। तांत्रिक परंपरा में, इसे गूढ़ ज्ञान, तंत्र और अलौकिक शक्तियों की प्राप्ति से जोड़ा जाता है। उल्लू देवी लक्ष्मी का वाहन है क्योंकि यह न केवल धन का, बल्कि विवेक, मौन, चुपचाप काम करने और अंधेरे के भीतर प्रकाश खोजने की शक्ति का भी प्रतीक है।

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

 

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