Kartik Mah Pooja Niyam: कार्तिक का महीना भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय माना जाता है। इस महीने में करवा चौथ, दिवाली, धनतेरस, गोवर्धन पूजा, भाई दूज और छठ पूजा जैसे कई प्रमुख त्योहार आते हैं।
Kartik Mah Pooja Niyam: कार्तिक का महीना भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय माना जाता है। इस महीने में करवा चौथ, दिवाली, धनतेरस, गोवर्धन पूजा, भाई दूज और छठ पूजा जैसे कई प्रमुख त्योहार आते हैं। कहा जाता है कि इस महीने में किए गए पुण्य कार्यों से मिलने वाला फल, किसी अन्य महीने की तुलना में कई गुना अधिक होता है। स्कंद पुराण, नारद पुराण और पद्म पुराण जैसे कई प्राचीन ग्रंथों में इस महीने के महत्व का वर्णन किया गया है। स्कंद पुराण के अनुसार, कार्तिक के समान कोई महीना नहीं है सत्य युग के समान कोई युग नहीं है वेदों के समान कोई शास्त्र नहीं है और गंगा नदी के समान कोई तीर्थ नहीं है। पुराणों के अनुसार जो लोग इस महीने में पवित्र स्नान, दान और उपवास करते हैं उनके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। आइए जानते हैं कि इस वर्ष यह पवित्र महीना कब शुरू हो रहा है और इस दौरान कौन से कार्य करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।
कार्तिक का महीना कब शुरू होता है?
कार्तिक का महीना मंगलवार 27 अक्टूबर से शुरू हो रहा है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि 26 अक्टूबर को सुबह 9:41 बजे शुरू होगी और 27 अक्टूबर को सुबह 7:01 बजे समाप्त होगी। यह महीना भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को बहुत प्रिय है; इसे 'दामोदर मास' के नाम से भी जाना जाता है। इस दौरान पवित्र स्नान, दान, दीपदान और तुलसी पूजन का विशेष महत्व है। स्कंद पुराण और पद्म पुराण के अनुसार, जो लोग कार्तिक के महीने में विधि-विधान से पवित्र स्नान करते हैं, उनके पाप नष्ट हो जाते हैं और मृत्यु के पश्चात उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस वर्ष कार्तिक का महीना 27 अक्टूबर से 24 नवंबर तक रहेगा। इस महीने में धनतेरस, दिवाली, गोवर्धन पूजा और छठ पूजा जैसे प्रमुख त्योहार आते हैं। इसके अलावा, इस दौरान एकादशी, चतुर्थी, प्रदोष, अमावस्या और पूर्णिमा जैसे व्रत और त्योहार भी आते हैं।
कार्तिक मास में व्रत और पूजा के नियम
कार्तिक के पूरे महीने में रोज़ स्नान करें। यदि संभव हो, तो गंगा या किसी अन्य पवित्र नदी में स्नान करें। इस स्नान के लिए 'ब्रह्म मुहूर्त' सबसे अच्छा माना जाता है हालाँकि यदि ऐसा संभव न हो, तो आप सूर्योदय के बाद भी स्नान कर सकते हैं।
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स्नान के बाद सूर्य देव को 'अर्घ्य' दें और उनकी पूजा करें। इस दौरान 'आदित्य हृदय स्तोत्र' का पाठ करना भी बहुत लाभकारी माना जाता है।
कार्तिक मास में दान-पुण्य करना बहुत शुभ माना जाता है। अपनी क्षमता के अनुसार, ज़रूरतमंदों को गुड़, तिल, कंबल, गर्म कपड़े, वस्त्र और जूते-चप्पल जैसी चीज़ें दान करें। कार्तिक मास में भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की विशेष पूजा करें। आप भगवान कृष्ण, भगवान हनुमान और पवित्र तुलसी के पौधे की भी पूजा कर सकते हैं।
कार्तिक के पूरे महीने रोज़ तुलसी के पौधे की पूजा करें। सुबह तुलसी के पौधे में जल चढ़ाएं और शाम को उसके पास घी का दीपक जलाएं। देवोत्थान एकादशी के दिन भगवान शालिग्राम के साथ तुलसी जी का विवाह कराएं।
कार्तिक के पूरे महीने शाम को दीपक जलाएं और उन्हें अपने आंगन, मुख्य द्वार, पूजा घर और घर के बाहर रखें। इस महीने में 'दीपदान'का बहुत महत्व है इससे देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और ऐसे घर में निवास करती हैं।
कार्तिक मास में भगवान विष्णु के मंत्र "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का जाप करें। इसके अलावा, आप अपने इष्ट देवता के मंत्र का या अपने आध्यात्मिक गुरु द्वारा दिए गए मंत्र का जाप कर सकते हैं।
कार्तिक मास में बैंगन और उड़द की दाल का सेवन न करने की परंपरा है। इस दौरान शरीर पर तेल लगाना भी वर्जित है, केवल नरक चतुर्दशी के दिन किए जाने वाले 'अभ्यंग स्नान' को छोड़कर।
इस पूरे महीने मांसाहारी या 'तामसिक' भोजन से बचें। लहसुन, प्याज, मांस और शराब का सेवन पूरी तरह से वर्जित है। 'सात्विक' जीवनशैली अपनाएं और 'ब्रह्मचर्य' का पालन करें।
इस महीने किसी भी प्रकार के अनुचित आचरण से बचें। चोरी, झूठ, छल-कपट, धोखेबाजी, लालच और ऐसी ही अन्य नकारात्मक प्रवृत्तियों से दूर रहें।
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।