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Durga Visarjan: नवरात्रि में दुर्गा पूजा के बाद देवी की मूर्ति का विसर्जन क्यों करते हैं? जानें धार्मिक महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Durga Visarjan: हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि को मां दुर्गा की आराधना का विशेष पर्व माना जाता है। इन नौ दिनों में भक्त मां के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं। 

Durga Visarjan
Durga Visarjan: शारदीय नवरात्रि में नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करने के बाद भक्त उन्हें विदाई देते हैं। इस दौरान घरों और पंडालों में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है। वहीं, कई घरों में घटस्थापना के साथ बोए गए ज्वारे भी विधि-विधान से विसर्जित किए जाते हैं। भक्त मां दुर्गा से सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि नौ दिनों तक मां की पूजा करने के बाद प्रतिमा का विसर्जन क्यों किया जाता है? इसके पीछे कौन-सी धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हैं? आइए जानते हैं नवरात्रि में दुर्गा पूजा के बाद विसर्जन करने का धार्मिक महत्व...

मां दुर्गा को विदाई देने की परंपरा

हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि को मां दुर्गा की आराधना का विशेष पर्व माना जाता है। इन नौ दिनों में भक्त मां के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं। कई स्थानों पर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करके विशेष पूजा और धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। नवरात्रि के अंतिम दिन या विजयादशमी के अवसर पर परंपरा के अनुसार प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है। इसे मां दुर्गा को सम्मानपूर्वक विदाई देने का प्रतीक माना जाता है। भक्त मानते हैं कि मां दुर्गा अपने भक्तों के कष्ट दूर करने और उन्हें आशीर्वाद देने के लिए आती हैं। विसर्जन के समय उनसे अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना की जाती है।

विसर्जन का क्या है धार्मिक महत्व?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन सृष्टि के परिवर्तनशील स्वरूप का प्रतीक है। हिंदू दर्शन में माना जाता है कि संसार में कोई भी वस्तु हमेशा एक जैसी नहीं रहती। जो उत्पन्न होता है, उसका एक समय के बाद अंत भी होता है और प्रकृति में उसका विलय हो जाता है। इसी भाव को दुर्गा प्रतिमा के विसर्जन से जोड़ा जाता है। पूजा के दौरान भक्त मिट्टी से बनी प्रतिमा में देवी के स्वरूप का आह्वान करके उनकी आराधना करते हैं। पूजा पूरी होने के बाद प्रतिमा को जल में प्रवाहित करने की परंपरा इस बात का स्मरण कराती है कि भौतिक स्वरूप अस्थायी है, जबकि देवी के प्रति आस्था और भक्ति का भाव बना रहता है।

मां दुर्गा के आगमन और विदाई की मान्यता

नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के आगमन और विदाई को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। भक्त इन नौ दिनों को मां की विशेष कृपा प्राप्त करने का अवसर मानते हैं। दुर्गा पूजा के बाद विसर्जन के समय भक्त मां से अपने घर और परिवार पर कृपा बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं। मान्यता है कि मां दुर्गा अपने भक्तों को साहस, शक्ति और बुराइयों से लड़ने की प्रेरणा देती हैं। इसलिए विसर्जन केवल प्रतिमा को विदा करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि मां के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और अगले वर्ष फिर उनके आगमन की कामना करने का अवसर भी है।

विजयादशमी पर ही क्यों होता है विसर्जन?

शारदीय नवरात्रि का समापन विजयादशमी के पर्व के साथ होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का वध करके देवताओं और संसार को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। इसलिए विजयादशमी को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। दुर्गा पूजा करने वाले कई समुदायों में इसी दिन मां की प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं के अनुसार विसर्जन का दिन अलग भी हो सकता है। इस अवसर पर भक्त मां को सिंदूर, पुष्प और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं तथा सुख-शांति की कामना के साथ उन्हें विदाई देते हैं।

ज्वारे विसर्जित करने का क्या है महत्व?

नवरात्रि में मां दुर्गा की प्रतिमा के साथ कई घरों में जौ भी बोए जाते हैं, जिन्हें ज्वारे कहा जाता है। घटस्थापना के समय बोए गए इन जौ को नौ दिनों तक पूजा स्थल पर रखा जाता है और उनकी देखभाल की जाती है। धार्मिक मान्यताओं में जौ को समृद्धि, उर्वरता और शुभता का प्रतीक माना गया है। नवरात्रि के अंतिम दिन ज्वारों को मां दुर्गा का आशीर्वाद मानकर श्रद्धापूर्वक उठाया जाता है। कई लोग इन्हें अपने सिर पर रखकर आशीर्वाद लेते हैं, जबकि कुछ लोग इन्हें परिवार के सदस्यों में बांटते हैं। इसके बाद स्थानीय परंपरा के अनुसार ज्वारों का विसर्जन किया जाता है या उन्हें पवित्र स्थान पर रखा जाता है।

विसर्जन के समय किन बातों का रखें ध्यान?

दुर्गा प्रतिमा का विसर्जन करते समय श्रद्धा और स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए। प्रतिमा स्थापित करते समय मिट्टी और प्राकृतिक रंगों से बनी प्रतिमा को प्राथमिकता देना बेहतर है। विसर्जन के बाद प्लास्टिक, कपड़े, सजावटी सामग्री और अन्य गैर-जैविक वस्तुओं को जल में नहीं डालना चाहिए। स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्धारित विसर्जन स्थल और नियमों का पालन करना चाहिए। इससे धार्मिक परंपरा का सम्मान करने के साथ-साथ नदियों और जलाशयों को प्रदूषण से बचाने में भी मदद मिलती है। मां दुर्गा को विदाई देते समय भक्त उनसे परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और जीवन में खुशहाली बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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