Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। आपने मां दुर्गा की तस्वीरों और प्रतिमाओं में उन्हें अक्सर शेर पर सवार देखा होगा। मां के एक हाथ में त्रिशूल, दूसरे हाथ में कमल और उनके साथ शेर का स्वरूप शक्ति और साहस का प्रतीक माना जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मां दुर्गा की सवारी शेर ही क्यों है? इसके पीछे कौन-सी धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं और शेर को देवी की शक्ति से जोड़कर क्यों देखा जाता है? आइए जानते हैं इसके पीछे की धार्मिक मान्यता।
शेर क्यों है मां दुर्गा की सवारी?
हिंदू धार्मिक मान्यताओं में शेर को शक्ति, साहस, पराक्रम और निर्भीकता का प्रतीक माना जाता है। मां दुर्गा को आदिशक्ति कहा जाता है, जो संसार की रक्षा करने और अधर्म का नाश करने वाली देवी हैं। शेर पर सवार मां दुर्गा का स्वरूप यह संदेश देता है कि देवी के भीतर असीम शक्ति है और कोई भी नकारात्मक शक्ति उनके सामने टिक नहीं सकती। शेर जंगल का शक्तिशाली जीव माना जाता है, इसलिए उसे देवी के पराक्रम और सामर्थ्य के प्रतीक के रूप में दर्शाया जाता है।
महिषासुर के वध से जुड़ी मान्यता
मां दुर्गा के शेर की सवारी होने के पीछे उनकी महिषासुर से जुड़ी कथा का भी विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महिषासुर नामक असुर ने अपनी शक्तियों के बल पर देवताओं को परेशान करना शुरू कर दिया था। उसे वरदान प्राप्त था कि कोई देवता उसका वध नहीं कर सकेगा। उसके अत्याचारों से परेशान होकर सभी देवताओं ने अपनी शक्तियों को एकत्र किया, जिससे मां दुर्गा का प्राकट्य हुआ।
मान्यता है कि देवताओं ने मां दुर्गा को विभिन्न अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए और हिमालय ने उन्हें सवारी के रूप में सिंह दिया। इसके बाद मां दुर्गा ने महिषासुर के साथ युद्ध किया और उसका वध करके देवताओं को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई। इसी कारण मां दुर्गा को महिषासुरमर्दिनी भी कहा जाता है। इस कथा में शेर देवी की युद्ध शक्ति, निर्भीकता और दुष्ट शक्तियों पर विजय का प्रतीक बनकर सामने आता है।
शेर किस बात का देता है संदेश?
मां दुर्गा के साथ शेर का चित्रण केवल उनकी शक्ति को दिखाने के लिए नहीं है, बल्कि इसे जीवन से जुड़ी एक सीख के रूप में भी देखा जाता है। शेर साहस और निडरता का प्रतीक है, जबकि मां दुर्गा को धर्म, न्याय और सुरक्षा की देवी माना जाता है। दोनों का यह स्वरूप बताता है कि कठिन परिस्थितियों में भी साहस और आत्मविश्वास बनाए रखना चाहिए। धार्मिक दृष्टि से मां दुर्गा की शेर पर सवारी इस बात का संकेत भी मानी जाती है कि शक्ति का उपयोग दूसरों को डराने के लिए नहीं, बल्कि अन्याय और बुराई का सामना करने के लिए किया जाना चाहिए। देवी का यह स्वरूप भक्तों को भय से मुक्त होकर सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
मां दुर्गा और शेर का क्या है संबंध?
मां दुर्गा को शक्ति का स्वरूप माना जाता है और शेर को उनके तेज, पराक्रम तथा निर्भीकता से जोड़कर देखा जाता है। देवी की प्रतिमाओं में शेर को उनके नियंत्रण में दिखाया जाता है। धार्मिक व्याख्याओं के अनुसार, यह मनुष्य के भीतर मौजूद क्रोध, अहंकार और अनियंत्रित इच्छाओं पर नियंत्रण रखने का भी प्रतीक माना जा सकता है। जिस प्रकार शेर शक्तिशाली होने के बावजूद मां दुर्गा के अधीन दिखाई देता है, उसी प्रकार मनुष्य को भी अपनी शक्ति और भावनाओं का सही दिशा में इस्तेमाल करना चाहिए। इस स्वरूप के माध्यम से यह संदेश मिलता है कि वास्तविक शक्ति केवल शारीरिक बल में नहीं, बल्कि विवेक, संयम और सही निर्णय लेने की क्षमता में भी होती है।
नवरात्रि में क्यों होती है मां दुर्गा की पूजा?