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Maa kalratri: नवरात्रि के सातवें दिन कैसे करें मां कालरात्रि की पूजा? जानें, शुभ मुहूर्त, विधि, मंत्र और भोग

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Maa kalratri: नवरात्रि के सातवें दिन यानी सप्तमी तिथि पर मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। शारदीय नवरात्रि में यह दिन मां दुर्गा के इस शक्तिशाली स्वरूप को समर्पित होता है।

Maa kalratri
Maa kalratri: शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की आराधना का विधान है। मां कालरात्रि को दुष्टों का नाश करने वाली और अपने भक्तों को भय से मुक्ति दिलाने वाली देवी माना जाता है। उनका स्वरूप भले ही उग्र दिखाई देता है, लेकिन वे अपने भक्तों पर हमेशा कृपा बरसाती हैं। धार्मिक मान्यता है कि मां कालरात्रि की पूजा करने से नकारात्मक शक्तियों का भय दूर होता है और जीवन में साहस व आत्मविश्वास बढ़ता है। ऐसे में क्या आप जानते हैं कि नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा कैसे करनी चाहिए, इस दिन कौन-सा मंत्र जपना चाहिए और माता को किस चीज का भोग लगाना शुभ माना जाता है? आइए जानते हैं मां कालरात्रि की पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि, मंत्र और भोग...

कब होगी मां कालरात्रि की पूजा?

नवरात्रि के सातवें दिन यानी सप्तमी तिथि पर मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। शारदीय नवरात्रि में यह दिन मां दुर्गा के इस शक्तिशाली स्वरूप को समर्पित होता है। इस दिन भक्त सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और विधि-विधान से माता की पूजा करते हैं। मां कालरात्रि को शुभंकरी, संकट मोचिन और मां काली का ही एक रूप माना जाता है।

मां कालरात्रि का स्वरूप

मां कालरात्रि का स्वरूप अत्यंत प्रभावशाली और उग्र बताया गया है। उनका रंग गहरे अंधकार के समान है और उनके बाल खुले रहते हैं। माता के तीन नेत्र हैं, जो उन्हें विशेष शक्ति और दिव्य दृष्टि का प्रतीक बनाते हैं। उनकी सांसों से अग्नि निकलने का वर्णन मिलता है। मां कालरात्रि के चार हाथ हैं। उनके एक हाथ में खड्ग और दूसरे में लोहे का अस्त्र बताया गया है, जबकि अन्य दो हाथ अभय और वरद मुद्रा में रहते हैं। इसका अर्थ है कि माता जहां दुष्ट शक्तियों का संहार करती हैं, वहीं अपने भक्तों को निर्भयता और आशीर्वाद भी प्रदान करती हैं।

मां कालरात्रि की पूजा विधि

नवरात्रि के सातवें दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके मां दुर्गा और मां कालरात्रि की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। यदि घर में पहले से घटस्थापना की गई है, तो उसके पास ही माता की पूजा करें। सबसे पहले दीपक जलाएं और मां को जल, फूल, अक्षत, रोली तथा अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। मां कालरात्रि को लाल फूल चढ़ाना शुभ माना जाता है। इसके बाद माता को गुड़ या गुड़ से बनी मिठाई का भोग लगाएं। धूप-दीप दिखाकर मां कालरात्रि के मंत्रों का जप करें और दुर्गा चालीसा या सप्तशती का पाठ अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार कर सकते हैं। अंत में माता की आरती करें और परिवार की सुख-शांति, अच्छे स्वास्थ्य तथा संकटों से रक्षा की प्रार्थना करें।

मां कालरात्रि का प्रिय भोग

मां कालरात्रि की पूजा में गुड़ का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सप्तमी तिथि पर माता को गुड़ या गुड़ से बनी मिठाई अर्पित करना शुभ होता है। कुछ भक्त इस दिन गुड़ से बने पकवान भी चढ़ाते हैं। भोग तैयार करते समय साफ-सफाई और शुद्धता का ध्यान रखें। माता को भोग लगाने के बाद उसे प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों में बांट सकते हैं। पूजा में भोग का महत्व केवल सामग्री तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ अर्पित करना भी जरूरी माना जाता है।

मां कालरात्रि का पूजा मंत्र

मां कालरात्रि की आराधना करते समय उनके मंत्रों का जप किया जाता है। माता के ध्यान और स्तुति के लिए इस मंत्र का पाठ कर सकते हैं:

ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥

इस मंत्र का अर्थ है मां कालरात्रि को नमन करना। भक्त पूजा के दौरान शांत मन से मंत्र का जप कर सकते हैं। इसके अलावा मां कालरात्रि की स्तुति के लिए दुर्गा सप्तशती के पाठ का भी विधान है। मंत्र जपते समय मन को एकाग्र रखें और माता का ध्यान करें।

मां कालरात्रि की आरती और पूजा का महत्व

पूजा पूरी होने के बाद मां कालरात्रि की आरती करें। आरती के समय परिवार के सदस्य भी शामिल हो सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि की उपासना से भय, बाधाओं और नकारात्मकता से मुक्ति पाने की कामना की जाती है। माता का स्वरूप यह संदेश देता है कि कठिन परिस्थितियों में भी साहस बनाए रखना चाहिए। भक्त मां से जीवन में आने वाली परेशानियों का सामना करने की शक्ति और सही रास्ते पर चलने का आशीर्वाद मांगते हैं। सप्तमी के दिन सच्चे मन से माता का स्मरण करना और जरूरतमंदों की सहायता करना भी शुभ कर्म माना जाता है।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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