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Barsana Laddu Mar Holi: बरसाना में कब खेली जाएगी लड्डूमार होली? जानिए तिथि और धार्मिक महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
साक्षी साह
सार

Barsana Holi 2026: ब्रज में होली के उत्सव की शुरुआत बसंत पंचमी से होती है, जब मंदिरों में पीले वस्त्र धारण कर भगवान की पूजा की जाती है। फिर फाल्गुन में लड्डूमार होली आती है। बरसाना में 25 फरवरी को सुबह से ही श्रीजी मंदिर में भक्त जमा होते हैं। 

Barsana Laddu Mar Holi:
Barsana Laddu Mar Holi: बरसाना वह पवित्र भूमि हैं, जहां राधारानी का जन्म हुआ था। यहां हर वर्ष होली के उत्सव में एक अनोखी रंगत बिखेरती है। यह स्थान ब्रजभूमि का हृदय है, जहां भगवान श्रीकृष्ण और राधा की दिव्य लीलाएं आज भी याद की जाती हैं। वर्ष 2026 में बरसाना की होली विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि यह उत्सव न केवल रंगों का त्योहार है, बल्कि भक्ति, प्रेम और धार्मिक परंपराओं का संगम भी है। लड्डूमार होली बरसाना की होली का एक प्रमुख भाग है। ब्रज में 40 दिनों तक होली का उत्सव मनाया जाता है, जिसमें से एक है लड्डूमार होली। ऐसे में चलिए जानते हैं कि इस बार बरसाने में कब खेली जाएगी लड्डूमार होली...

 

Braj Ki Holi List:

लड्डूमार होली कब?

ब्रज की होली चंद्र पंचांग पर आधारित होती है, जो फाल्गुन मास में मनाई जाती है। वर्ष 2026 में मुख्य होली 4 मार्च को होगी, लेकिन ब्रज में उत्सव कई दिनों पहले शुरू हो जाते हैं। विशेष रूप से बरसाना में लड्डूमार होली 25 फरवरी 2026 को बुधवार के दिन श्रीजी मंदिर में खेली जाएगी। यह वह दिन है, जब भक्तगण लड्डू फेंककर एक-दूसरे पर प्रेम बरसाते हैं, जो राधा-कृष्ण की लीला का प्रतीक है। इसके बाद 26 फरवरी को लठ्ठमार होली बरसाना में मनाई जाएगी और 27 फरवरी को नंदगांव में भी लठ्ठमार होगी। पूरा ब्रज उत्सव 23 जनवरी से बसंत पंचमी के साथ शुरू होकर 6 मार्च तक चलेगा।

 

Holi 2026 Date And Time

धार्मिक महत्व

लड्डूमार होली का धार्मिक महत्व अत्यंत गहरा है। यह उत्सव भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़ा है। ब्रजभूमि में राधा और कृष्ण का प्रेम जगत प्रसिद्ध है। लड्डूमार होली वह लीला है, जिसमें कृष्ण और उनके सखा नंदगांव से बरसाना आते हैं और राधा तथा उनकी सखियों को फाग खेलने का निमंत्रण देते हैं। इस निमंत्रण को लड्डू फेंककर व्यक्त किया जाता है। धार्मिक ग्रंथों जैसे भागवत पुराण और गीत गोविंद में वर्णित है कि कृष्ण राधा से मिलने के लिए विभिन्न लीलाएं रचते थे। लड्डू फेंकना प्रेम का प्रतीक है, जैसे मीठे लड्डू जीवन में मधुरता लाते हैं, वैसे ही कृष्ण का प्रेम भक्तों के हृदय को आनंद से भर देता है। 

बरसाना की होली का धार्मिक महत्व केवल रंगों तक सीमित नहीं है। यह वैष्णव परंपरा का हिस्सा है, जहां भगवान को भोग लगाना, कीर्तन करना और लीलाओं का स्मरण करना मुख्य है। लड्डूमार होली में प्रयुक्त लड्डू विशेष रूप से बनाए जाते हैं, जो गुड़, घी और सूखे मेवों से तैयार होते हैं। इन्हें पहले मंदिर में भगवान को अर्पित किया जाता है, फिर भक्तों पर फेंका जाता है। यह क्रिया प्रसाद वितरण का रूप है, जो भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करती है। धार्मिक रूप से यह कर्मयोग का उदाहरण है, जहां खेल में भी ईश्वर स्मरण होता है। भागवत पुराण में कहा गया है कि कृष्ण की लीलाएं अनंत हैं और होली उनमें से एक है, जो व्यक्ति को मोक्ष की ओर ले जाती है। बरसाना में यह उत्सव राधा की भक्ति को समर्पित है, क्योंकि राधा कृष्ण की शक्ति हैं। राधा के बिना कृष्ण अधूरे हैं।

 

Holi 2026 Date And Time

बरसाना की होली का उत्सव

ब्रज में होली के उत्सव की शुरुआत बसंत पंचमी से होती है, जब मंदिरों में पीले वस्त्र धारण कर भगवान की पूजा की जाती है। फिर फाल्गुन में लड्डूमार होली आती है। 25 फरवरी को सुबह से ही श्रीजी मंदिर में भक्त जमा होते हैं। पहले आरती होती है, फिर कीर्तन। उसके बाद लड्डू फेंकने का खेल शुरू होता है। भक्त एक-दूसरे पर लड्डू फेंकते हैं, जो हंसी-ठिठोली से भरा होता है। यह सब राधा-कृष्ण की लीला का अनुकरण है। अगले दिन लठमार होली में गोपियां लाठियां लेकर पुरुषों को मारती हैं, जो कृष्ण की शरारत का उत्तर होता है। पूरा उत्सव भजन, कथा और नृत्य से भरा होता है।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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