Dussehra 2026: दशहरे यानी विजयादशमी को हिंदू धर्म में बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था और मां दुर्गा ने महिषासुर का अंत कर विजय प्राप्त की थी। इसी वजह से दशहरे को नई शुरुआत, सफलता और शुभ कार्यों के लिए विशेष माना जाता है। इस पर्व से जुड़ी एक मान्यता यह भी है कि विजयादशमी अबूझ मुहूर्त का दिन है, यानी इस दिन शुभ काम करने के लिए अलग से मुहूर्त निकलवाने की आवश्यकता नहीं होती। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दशहरे पर अबूझ मुहूर्त क्यों माना जाता है और इस दिन किन कामों की शुरुआत करना शुभ समझा जाता है? आइए जानते हैं।
क्या होता है अबूझ मुहूर्त?
ज्योतिष और हिंदू पंचांग में अबूझ मुहूर्त उस समय को कहा जाता है, जिसे सामान्य रूप से शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। मान्यता है कि ऐसे अवसरों पर किसी विशेष शुभ घड़ी की तलाश किए बिना भी मांगलिक और नए काम शुरू किए जा सकते हैं। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि हर काम के लिए सभी नियमों और परिस्थितियों को नजरअंदाज कर दिया जाए। धार्मिक परंपराओं में काम की प्रकृति, परिवार की मान्यता और स्थानीय पंचांग के अनुसार भी निर्णय लिया जाता है।
दशहरे पर क्यों माना जाता है अबूझ मुहूर्त?
विजयादशमी को विजय, शुभता और नई उपलब्धियों से जोड़कर देखा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण पर विजय प्राप्त की थी। वहीं, मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय की स्मृति में भी इस दिन को मनाया जाता है। इन धार्मिक प्रसंगों के कारण विजयादशमी को अन्याय, नकारात्मकता और बाधाओं पर जीत का प्रतीक माना गया है। इसी मान्यता के चलते दशहरे को नए काम शुरू करने के लिए विशेष शुभ दिन माना जाता है। कई परंपराओं में इसे अबूझ मुहूर्त के रूप में भी महत्व दिया जाता है।
नए कारोबार की कर सकते हैं शुरुआत
दशहरे पर नया व्यापार शुरू करना, दुकान का उद्घाटन करना या किसी नए व्यावसायिक काम की शुरुआत करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि विजयादशमी के दिन शुरू किए गए काम में सफलता और तरक्की की कामना पूरी हो सकती है। इसी वजह से कई लोग इस अवसर पर नया कारोबार शुरू करते हैं या अपने पुराने व्यवसाय को आगे बढ़ाने की योजना बनाते हैं। हालांकि, किसी भी काम की सफलता मेहनत, सही योजना और परिस्थितियों पर भी निर्भर करती है।
वाहन और संपत्ति खरीदना
विजयादशमी के अवसर पर कई लोग वाहन, सोना, चांदी या घर जैसी संपत्ति खरीदना भी शुभ मानते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन की गई खरीदारी समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक हो सकती है। कुछ परिवार इस दिन नए वाहन की पूजा करते हैं और घर या दुकान में नई वस्तु लाकर शुभ शुरुआत करते हैं। हालांकि, बड़ी खरीदारी करते समय बजट, दस्तावेज और अन्य जरूरी बातों की जांच करना भी महत्वपूर्ण है।
पढ़ाई और नए कौशल की शुरुआत
दशहरा विद्यार्थियों के लिए भी नई शुरुआत का अवसर माना जा सकता है। इस दिन बच्चे की पढ़ाई शुरू करवाना, नई भाषा सीखना, संगीत या कला का अभ्यास आरंभ करना और किसी नए कौशल को सीखने का संकल्प लेना शुभ माना जाता है। कई परिवार शिक्षा से जुड़े कार्यों को धार्मिक आस्था के साथ जोड़कर देखते हैं। विजयादशमी पर नई विद्या की शुरुआत करने के पीछे अच्छी प्रगति और ज्ञान प्राप्ति की कामना जुड़ी होती है।
नौकरी और नए काम की शुरुआत
जो लोग नौकरी बदलने, नया प्रोजेक्ट शुरू करने या किसी नए पेशेवर लक्ष्य पर काम करने की योजना बना रहे हैं, वे भी दशहरे को शुभ अवसर मानते हैं। इस दिन नई जिम्मेदारी स्वीकार करना, किसी काम की योजना बनाना या अपने लक्ष्य की दिशा में पहला कदम उठाना धार्मिक दृष्टि से अच्छा माना जाता है। अबूझ मुहूर्त की मान्यता ऐसे लोगों को शुभ दिन पर नई शुरुआत करने का अवसर देती है। हालांकि, नौकरी या करियर से जुड़े फैसले अपनी तैयारी, अवसर और व्यावहारिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही लेने चाहिए।
शस्त्र और औजारों की पूजा
विजयादशमी पर शस्त्र पूजा और आयुध पूजा की परंपरा भी प्रचलित है। कई जगहों पर लोग अपने हथियारों, औजारों, मशीनों, वाहनों और काम में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की पूजा करते हैं। दक्षिण भारत के कई हिस्सों में आयुध पूजा का विशेष महत्व है। इस परंपरा के माध्यम से लोग अपने काम में सहायता करने वाले साधनों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं और आने वाले समय में सफलता की कामना करते हैं।
क्या हर काम के लिए मुहूर्त देखना जरूरी नहीं?