facebook pixel
विज्ञापन
Home  dharm  festivals  braj holi 2026 braj me kab hai rangon wali holi know date importance mythological story and significance

Braj Holi 2026: 40 दिनों के ब्रज उत्सव में रंगों की होली कब होगी? जानें शुभ तिथि और धार्मिक महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
साक्षी साह
सार

Braj Holi Date: शास्त्रों में वर्णित है कि भगवान विष्णु के अवतार नरसिंह ने हिरण्यकश्यपु की बहन होलिका को जलाकर प्रह्लाद की रक्षा की, जो अच्छाई की बुराई पर विजय का प्रतीक है, लेकिन ब्रज में यह त्योहार कृष्ण की रासलीला से जुड़ा है।

Braj Ki Holi 2026
Braj Ki Holi 2026: ब्रज भूमि, जहां भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं हुईं, वहां होली का उत्सव किसी साधारण त्योहार से कहीं अधिक है। यह 40 दिनों का महान रंगोत्सव है, जो बसंत के आगमन के साथ शुरू होता है और राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम की स्मृति में मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह उत्सव जनवरी से मार्च तक चलेगा, जिसमें विभिन्न प्रकार की होलियां शामिल हैं। इस वर्ष इसकी शुरुआत 23 जनवरी से वसंत पंचमी के दिन से हो चुकी है, जहां प्रत्येक दिन अलग-अलग होली खेली जाएगी। ऐसे में चलिए जानते हैं कि ब्रज में 40 दिनों के बीच रंगों वाली होली कब खेली जाएगी? ब्रज में रंगों वाली होली 4 मार्च को खेली जाएगी। 

ब्रज में होली का उत्सव

ब्रज, जिसमें मथुरा, वृंदावन, बारसाना, नंदगांव और गोकुल जैसे पवित्र स्थान शामिल हैं, वहां होली को राधा-कृष्ण की लीला के रूप में देखता है। यहां होली केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि और भक्ति का माध्यम है। शास्त्रों में वर्णित है कि भगवान विष्णु के अवतार नरसिंह ने हिरण्यकश्यपु की बहन होलिका को जलाकर प्रह्लाद की रक्षा की, जो अच्छाई की बुराई पर विजय का प्रतीक है, लेकिन ब्रज में यह त्योहार कृष्ण की रासलीला से जुड़ा है, जहां गोपियां और गोप रंगों में डूबकर प्रेम का उत्सव मनाते हैं। यह उत्सव बसंत पंचमी से प्रारंभ होता है, जो 23 जनवरी 2026 से शुरू हो चुका है। इस दिन से ब्रज में पीले रंग की महिमा शुरू हो जाती है, क्योंकि बसंत को कृष्ण का प्रिय मौसम माना जाता है। मंदिरों में सरसों के फूल चढ़ाए जाते हैं और भजन-कीर्तन से वातावरण भक्तिमय हो जाता है।

 

Braj Ki Holi 2026

लड्डू होली से शुरू होती है ब्रज की होली

40 दिनों का यह रंगोत्सव विभिन्न चरणों में विभाजित है, प्रत्येक चरण का अपना धार्मिक महत्व है। सबसे पहले आती है- लड्डू होली, जो 25 फरवरी 2026 को बारसाना के श्रीजी मंदिर में मनाई गई। इस दिन गोपियां लड्डुओं से खेलती हैं, जो कृष्ण की शरारतों की याद दिलाते हैं। धार्मिक रूप से यह होली भक्ति की मिठास का प्रतीक है। भगवान को लड्डू भोग लगाए जाते हैं और भक्त एक-दूसरे पर लड्डू फेंककर प्रेम व्यक्त करते हैं। यह लीला उस घटना से प्रेरित है, जब कृष्ण गोपियों से माखन मांगते थे और शरारत करते थे। बारसाना, जो राधा जी का जन्मस्थान है, यहां की होली में स्त्रियां प्रमुख भूमिका निभाती हैं, जो नारी शक्ति और भक्ति का संदेश देती है।

बारसाना की लठमार होली

अगले दिन, 26 फरवरी 2026 को बारसाना में लठमार होली का मुख्य आयोजन होगा। यह ब्रज की सबसे प्रसिद्ध होली है, जिसमें नंदगांव से आए पुरुष रंग लगाने की कोशिश करते हैं और स्त्रियां लाठियों से उन्हें पीटती हैं। यह दृश्य कृष्ण और राधा की लीला का जीवंत चित्रण है। शास्त्रों में वर्णित है कि कृष्ण राधा को रंग लगाने जाते थे, लेकिन गोपियां उन्हें लाठियों से रोकती हैं। इस दिन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होती है, जहां राधा-कृष्ण की मूर्तियों को रंगों से सजाया जाता है।

 

Holi 2026 Date And Time

नंदगांव की लठमार होली

27 फरवरी 2026 को लठमार होली नंदगांव में जारी रहेगी। नंदगांव कृष्ण का जन्मस्थान है, जहां यशोदा माता ने उन्हें पाला। यहां की होली में पुरुष गोपियों पर रंग फेंकते हैं और स्त्रियां प्रत्युत्तर में लाठियां चलाती हैं। यह उत्सव कृष्ण की बाल लीलाओं की स्मृति है, जैसे उन्होंने गोपियों के साथ रास किया। 

वृंदावन और मथुरा में फूलों वाली होली

फिर 28 फरवरी 2026 को वृंदावन और मथुरा में फूलों वाली होली मनाई जाएगी। यह होली सबसे कोमल और सुंदर है, जहां रंगों की जगह फूलों से खेला जाता है। बांके बिहारी मंदिर में यह आयोजन विशेष रूप से भव्य होता है। फूल कृष्ण की प्रिय वस्तु हैं, क्योंकि वृंदावन के वनों में वे फूलों से खेलते थे। धार्मिक महत्व यह है कि फूल शुद्धता और भक्ति के प्रतीक हैं। भगवान को फूलों का भोग लगाया जाता है और भक्त एक-दूसरे पर फूल बरसाते हैं।

गोकुल होली और रमन रेती में छड़ीमार होली

1 मार्च 2026 को गोकुल होली और रमन रेती का आयोजन होगा। गोकुल वह स्थान है, जहां कृष्ण ने बाल्यावस्था बिताई। यहां छड़ी मार होली खेली जाती है, जो लठमार का ही एक रूप है। रमन रेती वृंदावन के पास है, जहां रेती पर होली खेली जाती है। धार्मिक रूप से यह होली कृष्ण की गोवर्धन लीला से जुड़ी है, जहां उन्होंने इंद्र के अहंकार को तोड़ा था। भक्त रेती में लोटकर होली मनाते हैं, जो पृथ्वी माता की पूजा का रूप है। इस दिन विधवा होली भी मनाई जाती है, जिसमें विधवाएं भाग लेती हैं, जो समावेशिता का संदेश देती है। यह उत्सव दर्शाता है कि भक्ति में कोई भेदभाव नहीं।

 

Braj Ki Holi List:

रमन रेती में विधवा होली

2 मार्च 2026 को रमन रेती में विधवा होली का विशेष महत्व है। यह दिन उन महिलाओं के लिए है जो जीवन के दुखों से गुजरी हैं। वे रंगों में डूबकर कृष्ण की भक्ति करती हैं। धार्मिक रूप से यह होली करुणा और समानता का प्रतीक है। कृष्ण ने हमेशा दीन-दुखियों की रक्षा की और यह उत्सव उसी का स्मरण है। मंदिरों में विशेष भजन होते हैं, जहां विधवाएं कृष्ण के चरणों में समर्पित होती हैं।

होलिका दहन

3 मार्च 2026 को होलिका दहन है। यह शाम को होगा, जब होलिका की पूजा कर अग्नि जलाई जाती है, लेकिन इस बार चंद्रग्रहण के कारण होलिका दहन 2 मार्च को ही किया जाएगा। धार्मिक कथा के अनुसार, हिरण्यकश्यपु ने अपने पुत्र प्रह्लाद को होलिका की गोद में जलाने का प्रयास किया, लेकिन विष्णु भक्ति से प्रह्लाद बच गए और होलिका जल गई। यह अच्छाई की जीत है। ब्रज में यह दहन मथुरा और वृंदावन में भव्य रूप से होता है। भक्त अग्नि की परिक्रमा करते हैं और पापों को जलाते हैं। यह दिन आत्म-शुद्धि का है।

ब्रज में रंगों वाली होली

फिर 4 मार्च 2026 को रंगों वाली होली या धुलंडी मनाई जाएगी। यह फाल्गुन पूर्णिमा का दिन है, जब पूरा ब्रज रंगों से सराबोर हो जाता है। द्वारकाधीश मंदिर में यह विशेष रूप से खेली जाती है। भक्त एक-दूसरे पर गुलाल और रंग फेंकते हैं, जो कृष्ण-राधा के प्रेम का प्रतीक है। धार्मिक महत्व यह है कि रंग जीवन की विविधता दर्शाते हैं, लेकिन भक्ति में सब एक हो जाते हैं। यह होली मोह-माया से मुक्ति का माध्यम है। कृष्ण ने राधा को रंग लगाकर प्रेम व्यक्त किया और भक्त उसी लीला में भाग लेते हैं। इस दिन मंदिरों में विशेष आरती होती है और भजन-कीर्तन से वातावरण दिव्य हो जाता है।

हुरंगा होली

5 मार्च 2026 को हुरंगा होली या दौजी का हुरंगा मनाया जाएगा। यह बालदेव में होता है, जहां पुरुष और स्त्रियां पानी और रंगों से खेलते हैं। धार्मिक रूप से यह बलराम जी की लीला से जुड़ी है, जो कृष्ण के भाई थे। यह उत्सव शक्ति और प्रेम का मेल है।


यह भी पढ़ें:- 

Magh Mela 2026: कब है माघ मेले का पांचवां शाही स्नान, जानें तिथि और संगम में डूबकी लगाने का शुभ मुहूर्त

Maha Shivaratri 2026: महाशिवरात्रि क्यों मनाते हैं? जानिए इस दिन का महत्व और पौरणिक कथा

Shiv Bhakti: श्रवण, कीर्तन और मनन, शिव भक्ति के तीन साधन और इनकी व्याख्या


(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel