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Dussehra 2026: दशहरा है अबूझ मुहूर्त का दिन, जानें क्यों माना जाता है बेहद शुभ

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कोमल शर्मा
सार

Dussehra 2026:  हिंदू धर्म में, विजयादशमी का त्योहार हर साल बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की दसवीं तिथि को ही भगवान राम ने लंकापति रावण को पराजित कर उसका वध किया था। 

Dussehra 2026:
Dussehra 2026:  हिंदू धर्म में, विजयादशमी का त्योहार हर साल बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की दसवीं तिथि को ही भगवान राम ने लंकापति रावण को पराजित कर उसका वध किया था। इसलिए, इस दिन को विजयादशमी के रूप में मनाया जाता है। विजयादशमी को 'अबूझ मुहूर्त' माना जाता है एक ऐसा अत्यंत शुभ समय, जिसके लिए किसी ज्योतिषी से सलाह लेने की आवश्यकता नहीं होती। क्या आप जानते हैं कि इस दौरान आप कोई वाहन खरीद सकते हैं या किसी नए काम की शुरुआत कर सकते हैं? यदि नहीं, तो आइए इस लेख में इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

'अबूझ मुहूर्त' क्या है?

हिंदू पंचांग और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, दशहरा का दिन एक 'अबूझ मुहूर्त' माना जाता है। इस दिन ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति अत्यंत अनुकूल होती है। इसलिए, दशहरा के दिन आप बिना पंचांग देखे कोई भी शुभ कार्य कर सकते हैं। आप कोई नया प्रोजेक्ट शुरू कर सकते हैं या नया वाहन खरीद सकते हैं। इसके अलावा, इस दिन सोना या चांदी खरीदना, गृह प्रवेश करना या निवेश करना भी बहुत शुभ माना जाता है।

धार्मिक महत्व

धार्मिक परंपराओं के अनुसार, विजयादशमी के दिन किसी नए काम की शुरुआत करने से सफलता मिलती है और व्यापार में निरंतर वृद्धि होती है। यह भी माना जाता है कि इस दिन शुरू किए गए कार्यों में कोई बाधा नहीं आती है। 

दशहरा 2026: तिथि और समय

दशमी तिथि का आरंभ: 20 अक्टूबर, दोपहर 12:50 बजे
दशमी तिथि की समाप्ति: 21 अक्टूबर, दोपहर 2:11 बजे
वैदिक पंचांग के अनुसार, दशहरा का त्योहार 21 अक्टूबर को मनाया जाएगा। 'उदया तिथि' के आधार पर, दशहरा 21 अक्टूबर को मनाया जाना चाहिए। हालाँकि, चूँकि रावण का पुतला जलाने की परंपरा 'प्रदोष काल' और 'विजय मुहूर्त' के दौरान निभाई जाती है, इसलिए इसे 20 अक्टूबर को मनाना अधिक उचित होगा।

'रावण दहन' के लिए शुभ समय:

दशहरा के दिन 'विजय मुहूर्त': 20 अक्टूबर को दोपहर 01:59 बजे से दोपहर 02:45 बजे तक।
'प्रदोष काल': 20 अक्टूबर को शाम 05:47 बजे शुरू होगा।

दशहरा क्यों मनाया जाता है?

हिंदू धर्म के पवित्र ग्रंथ रामायण के अनुसार, इसी दिन भगवान राम ने लंका के राजा रावण का वध किया था। भगवान राम के 14 वर्षों के वनवास के दौरान, रावण ने छल से माता सीता का अपहरण कर लिया था। इसके बाद, भगवान राम और लक्ष्मण ने उनकी खोज शुरू की। इस खोज के दौरान उनकी भेंट हनुमान जी से हुई, जिन्होंने अंततः माता सीता का पता लगा लिया। इसके बाद भगवान राम और रावण के बीच भीषण युद्ध हुआ। रावण पर विजय पाने के लिए, भगवान राम ने नौ दिनों तक देवी दुर्गा की पूजा की और 10वें दिन रावण को पराजित कर उसका वध कर दिया। इसी घटना के कारण, नवरात्रि की अवधि के दसवें दिन  को दशहरा का त्योहार मनाया जाने लगा।

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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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