Dussehra: हिंदू धर्म में दशहरा का त्योहार विशेष महत्व रखता है। इसे हर साल बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है जो बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक है।
Dussehra: हिंदू धर्म में दशहरा का त्योहार विशेष महत्व रखता है। इसे हर साल बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक है। वाल्मीकि रामायण के अनुसार भगवान राम ने आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को लंकापति रावण का वध किया था। इसी कारण दशहरा के दिन पूरे देश में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं। वराह पुराण के अनुसार युद्ध में जाने से पहले भगवान राम ने देवी अपराजिता की पूजा की थी इसके बाद ही उन्होंने रावण का अंत किया। आपके मन में यह सवाल आ सकता है कि भगवान राम ने देवी अपराजिता की पूजा क्यों की? इस लेख में हम रामायण की इस घटना के बारे में विस्तार से जानेंगे।
'अपराजिता' का क्या अर्थ है?
'अपराजिता' का अर्थ है 'जिसे कभी हराया न जा सके।' विजयादशमी के दिन देवी अपराजिता की पूजा करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।
यह पूजा क्यों की गई थी?
रावण के खिलाफ युद्ध से पहले भगवान राम ने जीत का आशीर्वाद पाने के लिए देवी अपराजिता की पूजा की थी, ताकि वे और उनकी सेना रावण पर विजय प्राप्त कर सकें। देवी अपराजिता को देवी दुर्गा या देवी वैष्णवी का ही एक रूप माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजयादशमी के दिन विधि-विधान से स्नान करने के बाद देवी अपराजिता की पूजा करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और हर कार्य में सफलता का आशीर्वाद मिलता है। इससे जीवन में सुख और समृद्धि भी बढ़ती है।
दशहरा पर देवी अपराजिता की पूजा कैसे करनी चाहिए?
दशहरा के दिन दोपहर के समय देवी अपराजिता की पूजा करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पूजा से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। दशहरा के दिन सुबह स्नान करने के बाद सूर्य देव को 'अर्घ्य' दें। पूजा करते समय उत्तर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें। एक साफ और ऊंचे स्थान पर देवी अपराजिता की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। उन्हें रोली, अक्षत और फूल अर्पित करें। इसके बाद, देसी घी का दीपक जलाएं, आरती करें और भोग लगाएं। अंत में वहां मौजूद सभी लोगों में प्रसाद बांट दें।