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Dussehra 2026: दशहरे पर 'नीलकंठ' पक्षी का दिखना क्यों माना जाता है शुभ?

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कोमल शर्मा
सार

Dussehra 2026:   हिंदू कैलेंडर के अनुसार, आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की दसवीं तिथि को रावण का पुतला जलाया जाता है। दशहरा से जुड़ी एक जानी-मानी सामाजिक परंपरा रावण दहन है

Dussehra 2026:   
Dussehra 2026: हिंदू कैलेंडर के अनुसार आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की दसवीं तिथि को रावण का पुतला जलाया जाता है। दशहरा से जुड़ी एक जानी-मानी सामाजिक परंपरा रावण दहन है लेकिन इस त्योहार से जुड़ी कुछ अन्य मान्यताएं भी हैं जिनमें से एक 'नीलकंठ'  पक्षी के दर्शन से संबंधित है। माना जाता है कि दशहरा के दिन नीलकंठ का दिखना बहुत दुर्लभ है लेकिन जिसे भी इसके दर्शन होते हैं उसका भविष्य अत्यंत शुभ हो जाता है। आइए एक पौराणिक कथा के माध्यम से नीलकंठ पक्षी और दशहरा के बीच के संबंध को समझते हैं।

दशहरा पर नीलकंठ पक्षी का महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार रावण एक ब्राह्मण पिता की संतान था और ब्राह्मण कुल से संबंध रखता था। उसका वध करने के बाद भगवान राम और लक्ष्मण को 'ब्रह्म-हत्या' का पाप लग गया। इस पाप के प्रायश्चित और मुक्ति के लिए दोनों भाइयों ने भगवान शिव की आराधना की। माना जाता है कि इसी दौरान भगवान शिव उनके सामने नीलकंठ के रूप में प्रकट हुए थे। यह भी कहा जाता है कि रावण से युद्ध करने जाते समय भगवान राम को नीलकंठ के दर्शन हुए थे। नीलकंठ को पृथ्वी पर स्वयं भगवान शिव का ही एक रूप माना जाता है। मान्यता है कि दशहरा के दिन जिसे भी नीलकंठ के दर्शन होते हैं, उसके कठिन समय का अंत हो जाता है और उसे भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। हालांकि दशहरा पर नीलकंठ का दिखना अत्यंत शुभ माना जाता है, लेकिन यह भी सच है कि यह पक्षी आसानी से दिखाई नहीं देता। यदि सौभाग्य से आपको यह पक्षी दिख जाए तो आप यह मंत्र पढ़ सकते हैं "हे नीलग्रीव, हे शुभग्रीव , आप जो सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं" "पृथिव्यामवतीर्णोऽसि खच्चरित नमस्तुते" इस मंत्र का जाप अवश्य करें। 

दशहरे के दिन 'नीलकंठ' पक्षी को देखने का महत्व
हिंदू परंपरा के अनुसार दशहरे के दिन एक विशेष पक्षी को देखना बहुत शुभ माना जाता है। इस पक्षी को 'नीलकंठ' कहा जाता है। हिंदू मान्यताओं में इस पक्षी का संबंध भगवान शिव से माना जाता है।

दशहरे के दिन नीलकंठ पक्षी को देखना शुभ क्यों माना जाता है?
दशहरे के दिन नीलकंठ पक्षी का दिखना सौभाग्य का संकेत और जीत का सूचक माना जाता है। इसके पीछे की मुख्य धार्मिक मान्यताएं इस प्रकार हैं

रावण पर भगवान राम की जीत की कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, रावण के साथ युद्ध से पहले भगवान राम को नीलकंठ पक्षी के दर्शन हुए थे। इसके बाद ही उन्हें रावण पर विजय प्राप्त हुई।

भगवान शिव का एक रूप
नीलकंठ पक्षी को भगवान शिव का प्रतिनिधि या उनका ही एक रूप माना जाता है। 'समुद्र मंथन' के दौरान, जब भगवान शिव ने विष  पी लिया था, तो उनका गला नीला पड़ गया था, जिसके कारण उन्हें 'नीलकंठ' कहा जाने लगा।

पापों से मुक्ति और सफलता
ऐसा माना जाता है कि दशहरे के दिन इस पक्षी को देखने से पूरे वर्ष किए गए पाप धुल जाते हैं और व्यक्ति को अपने पेशेवर जीवन में सफलता और तरक्की मिलती है।

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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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