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Chaitra Navratri 2025: पंचग्रही योग में मनाई जाएगी दुर्गाष्टमी, जानिए शुभ संयोग, पूजा विधि और चमत्कारी मंत्र

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Chaitra Navratri Mahashtami 2025: चैत्र नवरात्रि के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मां के आठवें स्वरूप महागौरी मां की पूजा की जाती है। भक्त कन्या-लांगुर की पूजा के साथ मां की पूजा करते हैं। इस वर्ष अष्टमी तिथि पर सर्वार्थसिद्धि, लक्ष्मी नारायण, पंचग्रही जैसे कई राजयोग बन रहे हैं।

Chaitra Navratri Mahashtami 2025
Chaitra Navratri Mahashtami 2025: चैत्र नवरात्रि के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मां के आठवें स्वरूप महागौरी मां की पूजा की जाती है। भक्त कन्या-लांगुर की पूजा के साथ मां की पूजा करते हैं। इस वर्ष अष्टमी तिथि पर सर्वार्थसिद्धि, लक्ष्मी नारायण, पंचग्रही जैसे कई राजयोग बन रहे हैं। इस अवधि में मां दुर्गा की पूजा करने से भिखारी को शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है।

कन्या पूजन शुभ मुहूर्त

ज्योतिषाचार्य के अनुसार, इस बार अष्टमी तिथि 4 अप्रैल को रात 8:12 बजे शुरू होकर 5 अप्रैल को शाम 7:26 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार अष्टमी 5 अप्रैल 2025 शनिवार को मनाई जाएगी। ऐसे में अष्टमी तिथि की पूजा करने वाले भक्तों के लिए कन्या-लांगुर को भोजन कराने का शुभ मुहूर्त सुबह 11:05 बजे से दोपहर 12:49 बजे तक रहेगा।

नवमी तिथि शुभ मुहूर्त

चैत्र नवरात्रि पर नवमी तिथि 5 अप्रैल को शाम 7:26 बजे से शुरू हो रही है और 6 अप्रैल को शाम 7:22 बजे समाप्त होगी। ऐसे में रामनवमी 6 अप्रैल को मनाई जाएगी। नवमी पूजन करने वाले भक्तों के लिए कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त सुबह 10:59 बजे से दोपहर 12:50 बजे तक है।

कन्या पूजन मंत्र

स्तोत्र मंत्र:
"या देवी सर्वभूतेषु कन्या रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥"
ऊं श्री दुं दुर्गायै नम: ।।

अंबे जी की आरती 

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली,
तेरे ही गुण गावें भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती।
तेरे भक्त जनो पर माता भीर पड़ी है भारी।
दानव दल पर टूट पड़ो मां करके सिंह सवारी॥
सौ-सौ सिहों से बलशाली, है अष्ट भुजाओं वाली,
दुष्टों को तू ही ललकारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

माँ-बेटे का है इस जग में बड़ा ही निर्मल नाता।
पूत-कपूत सुने है पर ना माता सुनी कुमाता॥
सब पे करूणा दर्शाने वाली, अमृत बरसाने वाली,
दुखियों के दुखड़े निवारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

नहीं मांगते धन और दौलत, न चांदी न सोना।
हम तो मांगें तेरे चरणों में छोटा सा कोना॥
सबकी बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली,
सतियों के सत को संवारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

चरण शरण में खड़े तुम्हारी, ले पूजा की थाली।
वरद हस्त सर पर रख दो माँ संकट हरने वाली॥
माँ भर दो भक्ति रस प्याली, अष्ट भुजाओं वाली,
भक्तों के कारज तू ही सारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

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