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Bhagvan Dhanvantri: भगवान धन्वंतरि के हाथ में ही क्यों था अमृत कलश? जानिए धार्मिक महत्व

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कोमल शर्मा
सार

Bhagvan Dhanvantri:  हिंदू धर्म में धनतेरस के त्योहार का विशेष महत्व है। यह दिन धन की देवी माता लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की पूजा-अर्चना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इसी दिन से पांच दिनों तक चलने वाले एक भव्य उत्सव की शुरुआत होती है।

Bhagvan Dhanvantri:
Bhagvan Dhanvantri:  हिंदू धर्म में धनतेरस के त्योहार का विशेष महत्व है। यह दिन धन की देवी माता लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की पूजा-अर्चना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इसी दिन से पांच दिनों तक चलने वाले एक भव्य उत्सव की शुरुआत होती है। इस अवसर पर माता लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पूरी श्रद्धा के साथ पूजा-पाठ करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि की वृद्धि होती है। वैदिक पंचांग के अनुसार इस वर्ष धनतेरस 6 नवंबर को है। पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए थे यही कारण है कि धनतेरस के दिन उनकी पूजा की जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान धन्वंतरि अमृत का कलश लेकर क्यों प्रकट हुए थे? यदि नहीं, तो आइए इस लेख में इसके कारणों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

भगवान धन्वंतरि अमृत का कलश लेकर क्यों प्रकट हुए थे?

पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन अमृत प्राप्त करने और देवताओं की खोई हुई शक्ति और वैभव को पुनः प्राप्त करने के लिए किया गया था। जब देवताओं और असुरों ने क्षीर सागर का मंथन किया तो उसमें से चौदह रत्न निकले। इसी प्रक्रिया के दौरान कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को भगवान धन्वंतरि अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए। इसलिए इस दिन को धनतेरस के रूप में मनाया जाता है जो भगवान धन्वंतरि के प्रकट होने का अवसर है। भगवान धन्वंतरि को भगवान विष्णु का अंश-अवतार माना जाता है और उन्हें देवताओं का चिकित्सक कहा जाता है। जब वे प्रकट हुए तो उनके हाथों में अमृत का कलश था यह वह अमृत था जिससे देवताओं को अमर, स्वस्थ और शक्तिशाली बनना थाताकि वे असुरों से अपना राज्य वापस पा सकें। यही कारण है कि उन्हें आयुर्वेद और चिकित्सा का जनक माना जाता है। समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि के प्रकट होने का वर्णन 'विष्णु पुराण' और 'अग्नि पुराण' में मिलता है।

उनकी पूजा क्यों की जाती है?

भगवान धन्वंतरि धनतेरस के दिन प्रकट हुए थे इसलिए इस विशेष अवसर पर उनकी पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा-अर्चना करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है जिससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है और किसी चीज़ की कमी नहीं रहती।धनतेरस पर देवी लक्ष्मी के साथ-साथ भगवान धन्वंतरि की पूजा करने की भी परंपरा है ताकि परिवार को आर्थिक समृद्धि के साथ-साथ उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु का आशीर्वाद मिल सके।
 

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 Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

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