Basant Panchami Marriage Remedies: बसंत पंचमी के दिन कुछ ऐसे भी उपाय होते हैं, जिन्हें करने से शादी में आ रही है दिक्कते दूर हो जाती हैं। बता दें कि सरस्वती माता का एक ऐसा मंदिर हैं जहां पर सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने से शादी-विवाह में आ रही परेशानियां दूर हो जाती हैं।
Basant Panchami Marriage Remedies: वैदिक पंचांग के अनुसार, कल यानी 2 फरवरी को बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन मां सरस्वती की पूजा विधि-विधान से की जाती है। मान्यता है कि जो जातक मां सरस्वती की पूजा विधि-विधान से करते हैं उनका मानसिक विकास होता है। बता दें कि बसंत पंचमी के दिन कुछ ऐसे भी उपाय होते हैं, जिन्हें करने से शादी में आ रही है दिक्कते दूर हो जाती हैं। बता दें कि सरस्वती माता का एक ऐसा मंदिर हैं जहां पर सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने से शादी-विवाह में आ रही परेशानियां दूर हो जाती हैं।
सागर बुंदेलखंड का एकमात्र उत्तरमुखी सरस्वती मंदिर है। यहां मां सरस्वती उत्तरमुखी आदमकद प्रतिमा के रूप में विराजमान हैं। धार्मिक आस्था का केंद्र बन चुके इस मंदिर में वसंत पंचमी पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं। यहां सच्चे मन से प्रार्थना करने वालों की मां सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। इस वर्ष वसंत पंचमी 03 फरवरी 2025 को है, जिसके लिए मंदिर में तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं।
शादी-विवाह संबंधित परेशानियों से मिलती हैं मुक्ति
मंदिर के पुजारी बताते हैं कि यदि किसी युवक या युवती के विवाह में देरी हो रही हो। किसी भी प्रकार की बाधा, परेशानी हो तो उन्हें वसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा-अर्चना करते हुए 108 बादामों की माला मां को अर्पित करनी चाहिए। ऐसा करने से उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी, ऐसा कल्प सोनक नामक ग्रंथ में बताया गया है। इसी प्रकार जो विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। यदि उन्हें कड़ी मेहनत के बाद भी सफलता नहीं मिल पा रही है तो ऐसे विद्यार्थी ज्ञान वृद्धि के लिए मां सरस्वती को 108 मखाने के बीजों की माला अर्पित करें।
सूर्यास्त से पहले मां को समर्पित करें माला
पंडित चौबे आगे बताते हैं कि मां प्रतिमा की ऐसी प्रतिमा जो ऊंचे आसन पर बैठी हुई मुद्रा में है, लेकिन पैर जमीन को छूते हैं, सागर स्थित सरस्वती मंदिर में है। यहां माला विसर्जन के लिए समय और मूर्ति का विशेष ध्यान रखा जाता है। यह माला सूर्यास्त से पहले मां को समर्पित करनी होती है। भूलकर भी बादाम की माला, खड़ी मूर्ति, मां का छाया चित्र, फोटो, नाम सूची न चढ़ाएं।