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AshokaSundari Love Story: कौन हैं भोलेनाथ व माता पार्वती के दामाद, शायद नहीं जानते होंगे आप

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

AshokaSundari Love Story: भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र कार्तिकेय और गणेशजी के बारे में तो सभी जानते हैं, लेकिन क्या आप उनकी पुत्री के बारे में जानते हैं? जी हां, भगवान शिव और माता पार्वती की एक पुत्री भी है, जिसका नाम अशोक सुंदरी है।

AshokaSundari Love Story
AshokaSundari Love Story: भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र कार्तिकेय और गणेशजी के बारे में तो सभी जानते हैं, लेकिन क्या आप उनकी पुत्री के बारे में जानते हैं? जी हां, भगवान शिव और माता पार्वती की एक पुत्री भी है, जिसका नाम अशोक सुंदरी है। अशोक सुंदरी का वर्णन मुख्य शास्त्रों में नहीं मिलता है, लेकिन पद्म पुराण में अशोक सुंदरी का उल्लेख किया गया है। पद्म पुराण के अनुसार, माता पार्वती का एकाकीपन दूर करने के लिए कल्पवृक्ष नामक वृक्ष से अशोक सुंदरी का निर्माण हुआ था। अशोक सुंदरी भगवान कार्तिकेय से छोटी और गणेशजी से बड़ी हैं। आइए पुराणों के माध्यम से जानते हैं कि अशोक सुंदरी का जन्म कैसे हुआ और अशोक सुंदरी ने किससे विवाह किया...

अशोक सुंदरी के जन्म की कथा

पुराणों के अनुसार, एक बार भगवान शिव और माता पार्वती एक साथ घूमने के लिए दुनिया के सबसे खूबसूरत उद्यान नंदनवन गए। नंदनवन में माता पार्वती ने कल्पवृक्ष को देखा और उस वृक्ष से प्रेम करने लगीं। कल्पवृक्ष को मनोकामना पूर्ण करने वाला वृक्ष कहा जाता है। कल्पवृक्ष के पास जाकर देवी पार्वती ने अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए एक पुत्री मांगी थी, ताकि वह अपने विचार व्यक्त कर सकें। कल्पवृक्ष ने देवी पार्वती के विचार सुन लिए और उस वृक्ष से अशोक सुंदरी का जन्म हुआ। वह पुत्री बहुत सुंदर थी, इसीलिए उसे सुंदरी कहा गया।

देवी पार्वती द्वारा दिया गया वरदान

माता पार्वती ने कन्या को आशीर्वाद दिया कि उसका विवाह देवराज इंद्र जैसे शक्तिशाली युवक से होगा। अशोक सुंदरी के आगमन से भगवान शिव और देवी पार्वती के जीवन में एक अलग तरह की खुशी देखने को मिली। इसके साथ ही देवी पार्वती का अकेलापन भी दूर हो गया। अशोक सुंदरी धीरे-धीरे बड़ी होने लगी और कैलाश पर्वत पर खुशी का माहौल दिखाई देने लगा।

अशोक सुंदरी ने राक्षस को श्राप दिया

एक बार अशोक सुंदरी अपनी सखियों के साथ नंदनवन घूमने गई थी। तभी वहां उसकी मुलाकात हुंड नामक राक्षस से हुई, जो अशोक सुंदरी की सुंदरता पर मोहित हो गया। हुंड ने अशोक सुंदरी के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा, जिसे अशोक सुंदरी ने अस्वीकार कर दिया और राजा नहुष के साथ अपने भावी पूर्वनिर्धारित विवाह के बारे में बताया। हुंड राक्षस ने कहा कि वह राजा नहुष को मार डालेगा। राक्षस की बातें सुनकर अशोक सुंदरी क्रोधित हो गईं और उन्होंने राक्षस को श्राप दे दिया कि तेरा अंत मेरे भावी पति राजा नहुष के हाथों होगा।

अशोक सुंदरी 100 पुत्रियों की मां बनी

अशोक सुंदरी का राजा नहुष से विवाह पहले से तय था। अशोक सुंदरी के श्राप के कारण राजा नहुष का अपहरण हुंड नामक राक्षस ने कर लिया। अपहरण के बाद राजा नहुष को जहां रखा गया, वहां हुंड की एक दासी ने नहुष को बचाया। नहुष का पालन-पोषण महर्षि वशिष्ठ के आश्रम में हुआ और उन्होंने ही हुंड नामक राक्षस का वध किया था। बाद में नहुष और अशोक सुंदरी का विवाह हुआ और ययाति जैसे वीर पुत्र का जन्म हुआ और वह 100 पुत्रियों की मां भी बनीं।

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