Akshaya Tritiya Banke Bihari Temple: भक्त अपने कान्हा के दर्शन का एक भी मौका भी नहीं छोड़ते। ऐसे तो प्रत्येक दिन कान्हा के दर्शन का विशेष महत्व है
Akshaya Tritiya Banke Bihari Temple: भक्त अपने कान्हा के दर्शन का एक भी मौका भी नहीं छोड़ते। ऐसे तो प्रत्येक दिन कान्हा के दर्शन का विशेष महत्व है, लेकिन एक ऐसा भी खास दिन है जिस दिन बांके बिहारी के चरणों के दर्शन बद्रीनाथ के दर्शन के बराबर बताए गए हैं। आइए विस्तार से जानते हैं।
कहा जाता है कि भगवान बांके बिहारी को स्वामी हरिदास जी ने प्रकट किया था। मान्यता के अनुसार यह भी कहा जाता है कि अगर कोई भी व्यक्ति इस दिन बांके बिहारी के दर्शन करता है तो उसे बद्रीनाथ जाने के समान ही लाभ मिलता है।
पूरे शरीर पर भी लगाया जाता है चंदन का लेप
एक अनुमान के मुताबिक, वृंदावन में साढ़े पांच हजार मंदिर हैं। हर मंदिर की अपनी कहानी है। इन मंदिरों की कहानी भगवान कृष्ण, उनकी लीलाओं से जुड़ी है। वृंदावन का विश्व प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर भी अपना अलग रहस्य रखता है। मान्यता के अनुसार भगवान बांके बिहारी को स्वामी हरिदास जी ने निधिवन में प्रकट किया था। स्वामी हरिदास निधिवन में ही बांके बिहारी की सेवा और पूजा करते थे।
इस दिन करें दर्शन
समय बीतता गया और स्वामी हरिदास जी भगवान बांके बिहारी को वृंदावन के मध्य में ले आए। यहां प्रतिदिन हजारों भक्त भगवान के दर्शन करने आते हैं। भगवान बांके बिहारी और बद्रीनाथ से एक मान्यता भी जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि अगर कोई व्यक्ति बद्रीनाथ नहीं जा सकता है लेकिन अक्षय तृतीया पर भगवान बांके बिहारी के दर्शन कर लेता है तो उसे भगवान बद्रीनाथ के दर्शन के समान ही लाभ मिलता है।
भक्त करते हैं चरणों के दर्शन
बांके बिहारी मंदिर पुजारी जी बताते हैं कि अक्षय तृतीया के अवसर पर भगवान बांके बिहारी जी के चरणों के दर्शन करने के लिए सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। साल में एक बार होने वाले भगवान जी के चरणों के दर्शन के लिए देशभर से भक्तों की कतार सुबह से ही मंदिर में लग जाती है। अक्षय तृतीया के दिन भगवान बांके बिहारी जी अपने पैरों में पायल पहनते हैं।