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Aarti  Karne Ke Niyam: हिन्दु धर्म में कितने प्रकार की आरती की जाती है , जानिए

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कोमल
सार

Aarti  Karne Ke Niyam: मान्यताओं के अनुसार नियमित पूजा-अर्चना से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है। देवी-देवताओं की पूजा करते समय आरती करना जरूरी माना जाता है। इसके बिना कोई भी पूजा अधूरी मानी जाती है। आइए जानते हैं

Aarti  Karne Ke Niyam:
Aarti  Karne Ke Niyam: मान्यताओं के अनुसार नियमित पूजा-अर्चना से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है। देवी-देवताओं की पूजा करते समय आरती करना जरूरी माना जाता है। इसके बिना कोई भी पूजा अधूरी मानी जाती है। आइए जानते हैं पूजा के बाद आरती करने का सही तरीका क्या है।

आरती कितने प्रकार की होती है?( Aarti Kitne Prakar Ki Hoti Hai ) 

आरती मुख्यतः 7 प्रकार की होती है।
मंगला आरती
पूजा आरती
श्रृंगार आरती
भोग आरती
धूप आरती
संध्या आरती
शयन आरती

आरती करने का सही तरीका( Aarti Karne Ka Sahi Tareeka)

आरती की शुरुआत भगवान के चरणों से करनी चाहिए। सबसे पहले भगवान के चरणों में चार बार, नाभि पर दो बार, मुख पर एक बार और शरीर के सभी अंगों पर सात बार आरती करें। इस तरह आरती को 14 बार घुमाने से आपका प्रणाम भगवान में समाहित चौदह भुवनों तक पहुंचता है।

क्या कहता है स्कंद पुराण ( Kya Kahta Hai Skand Puran ) 

स्कंद पुराण में आरती के कुछ नियम भी बताए गए हैं। जिसके अनुसार गाय के दूध से बने घी में डूबी 5 रुई की बत्ती से भगवान की आरती करनी चाहिए। इसे पंच प्रदीप कहते हैं। साथ ही स्कंद पुराण में बताया गया है कि अगर कोई व्यक्ति मंत्र नहीं जानता, पूजा की पूरी विधि नहीं जानता। लेकिन फिर भी अगर वह भगवान की आरती और पूजा में भक्ति भाव से शामिल होता है और आरती करता है तो उसकी पूजा स्वीकार होती है।

इन बातों का रखें ध्यान ( in Bato Ka Rakhe Dhyan) 

आरती हमेशा खड़े होकर करनी चाहिए। आरती करते समय हमेशा थोड़ा झुककर आरती करें। आरती की थाली तांबे, पीतल या चांदी आदि धातु की होनी चाहिए। आरती की थाली में गंगाजल, कुमकुम, चावल, चंदन, धूपबत्ती, फूल और चढ़ाने के लिए फल या मिठाई रखें।

जानिए आरती करने का सही तरीका ( Janiye Aarti Karne Ka Sahi Tareeka)

माना जाता है कि आरती हमेशा श्रद्धा और भक्ति भाव से करनी चाहिए। वहीं, भाव के अलावा आरती करने के 4 मुख्य नियम हैं। ये नियम इस प्रकार हैं-

आरती की शुरुआत भगवान के चरणों से करें और आरती की थाली को चार बार चरणों में घुमाएं। यह भगवान के चरणों में खुद को समर्पित करने का संकेत है।

इसके बाद भगवान की नाभि के पास आरती की थाली को दो बार घुमाएं। ऐसा माना जाता है कि भगवान ब्रह्मा का जन्म भगवान विष्णु की नाभि से हुआ था, इसलिए भगवान के चरणों को प्रणाम करने के बाद नाभि की पूजा की जाती है।

इसके बाद भगवान के मुख के सामने एक बार आरती की थाली घुमाएं।

अंत में भगवान के पूरे शरीर पर दीया सात बार घुमाकर आरती करें।

मान्यता है कि इस तरह से आरती को 14 बार घुमाने से आपकी भक्ति चौदह लोकों तक पहुंचती है।

स्कंद पुराण के अनुसार आरती के नियम (Aarti Niyam According To Skand Puran)

स्कंद पुराण में आरती के कुछ खास नियम भी बताए गए हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में-

पंच प्रदीप का प्रयोग

आरती करने के लिए गाय के दूध से बने घी में डूबी रूई की 5 बत्तियों का दीपक जलाएं। इसे पंच प्रदीप कहते हैं।

आस्था और भक्ति

अगर कोई व्यक्ति मंत्र और पूजा विधि नहीं जानता, लेकिन भक्ति भाव से आरती करता है, तो उसकी पूजा भी स्वीकार हो जाती है।

आरती करते समय ध्यान रखने योग्य बातें ( Aarti Karte Samay In Bato Ka Rakhe Dhyan) 

आरती हमेशा खड़े होकर करें-आरती के दौरान खड़े रहना शुभ माना जाता है।

थोड़ा झुककर आरती करें- इसे भक्ति का प्रतीक माना जाता है।

आरती की थाली सही धातु की होनी चाहिए- तांबे, पीतल या चांदी की थाली में आरती करें।

थाली में पूजा सामग्री रखें- गंगा जल, कुमकुम, चावल, चंदन, धूपबत्ती, फूल और प्रसाद में फल या मिठाई।

ध्यान रखें कि आरती पूजा का अहम हिस्सा है। इसे सही तरीके से करने से न सिर्फ पूजा पूरी होती है, बल्कि मन को शांति भी मिलती है। ऐसा माना जाता है कि श्रद्धा और भक्ति के साथ की गई आरती अवश्य ही भगवान तक पहुंचती है और भक्तों को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
 

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