Vastu Tips: कई लोगों को लगता है कि फ्लैट ऊपरी मंजिल पर होने की वजह से इस पर वास्तु का असर नहीं होता, लेकिन ऐसा नहीं है। वास्तु शास्त्र कहता है कि घर भले ही जमीन को न छू रहा हो, लेकिन फिर भी वह धरती से जुड़ा हुआ होता है।
Vastu Tips: कई लोगों को लगता है कि फ्लैट ऊपरी मंजिल पर होने की वजह से इस पर वास्तु का असर नहीं होता, लेकिन ऐसा नहीं है। वास्तु शास्त्र कहता है कि घर भले ही जमीन को न छू रहा हो, लेकिन फिर भी वह धरती से जुड़ा हुआ होता है। इसलिए फ्लैट खरीदते और किराए पर लेते समय वास्तु के नियमों को ध्यान में रखना जरूरी है। अपार्टमेंट में ऊर्जा संतुलन उतना ही जरूरी है, जितना कि सामान्य घर में। आइए वास्तु शास्त्र विशेषज्ञ रवि पाराशर से जानते हैं कि फ्लैट खरीदते और किराए पर लेते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
मुख्य द्वार
वास्तु शास्त्र के अनुसार, अपार्टमेंट या फ्लैट का मुख्य द्वार उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में होना बहुत ही ज्यादा शुभ माना गया है, क्योंकि ये दिशाएं सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती हैं। मान्यता है कि इस दिशा में मुख्य द्वार होने से लक्ष्मी का प्रवाह होता है। दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम दिशा में दरवाजा होना अशुभ माना जाता है।
लिफ्ट के सामने नहीं होना चाहिए दरवाजा
फ्लैट का दरवाजा सीधे लिफ्ट के सामने नहीं खुलना चाहिए, इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है। ऐसे फ्लैट खरीदने से बचें। इससे परिवार की तरक्की में बाधा आ सकती है।
शौचालय और स्नानघर की दिशा
बाथरूम और शौचालय पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा में होना चाहिए। उत्तर-पूर्व दिशा में शौचालय होना बहुत अशुभ होता है। ऐसे फ्लैट में रहने से पति-पत्नी के बीच मनमुटाव होता है।
सबसे अच्छी मंजिल कौन सी है?
भूतल या पहली मंजिल सबसे अच्छी मानी जाती है। बहुत ऊपरी मंजिलों पर वास्तु का प्रभाव थोड़ा कम होता है।
सबसे अच्छी दिशा कौन सी मानी जाती है?
उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा में फ्लैट सबसे शुभ माना जाता है। उत्तर या पूर्व दिशा में फ्लैट भी अच्छा होता है। दक्षिण या पश्चिम दिशा में फ्लैट अशुभ माना जाता है। दक्षिण या पश्चिम दिशा में फ्लैट लेने से परिवार में आर्थिक समस्याएँ आ सकती हैं।