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Shree Ramjanmbhumi Temple: अयोध्या धाम का श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का इतिहास, जानें दर्शन और यात्रा की पूरी गाइड

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Shree Ramjanmbhumi Temple: राम जन्मभूमि मंदिर का इतिहास सदियों पुराना है। भक्तों की मान्यता है कि यही वह पवित्र भूमि है, जहां भगवान विष्णु के सातवें अवतार भगवान राम का जन्म हुआ था।

Ayodhya Ram Janm Bhumi Mandir
Ayodhya Ram Janm Bhumi Mandir: भगवान श्रीराम की जन्मभूमि पर विराजमान यह पावन राम जन्मभूमि मंदिर करोड़ों हिंदू भक्तों की आस्था का केंद्र है। यहां राम लला के बाल स्वरूप की प्रतिमा स्थापित है, जो भक्तों को दिव्य अनुभूति प्रदान करती है। मंदिर के दर्शन मात्र से मन शांत हो जाता है और भक्ति की गहराई बढ़ जाती है। इस पवित्र स्थल की यात्रा हर रामभक्त के जीवन का एक अनमोल हिस्सा बन गई है, जहां इतिहास, श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।

मंदिर का इतिहास

राम जन्मभूमि मंदिर (Ram Janm Bhumi Mandir) का इतिहास सदियों पुराना है। भक्तों की मान्यता है कि यही वह पवित्र भूमि है, जहां भगवान विष्णु (Lord Vishnu) के सातवें अवतार भगवान राम का जन्म हुआ था। त्रेतायुग में अयोध्या को सूर्यवंशी राजा दशरथ की राजधानी के रूप में जाना जाता था और यहीं राम जन्मभूमि स्थित थी।

सन् 1528 में मुगल सम्राट बाबर के सेनापति मीर बाकी ने यहां एक मंदिर को तोड़कर बाबरी मस्जिद का निर्माण कराया, जिससे यह स्थल विवाद का केंद्र बन गया। सदियों तक यह विवाद चला। 19वीं शताब्दी में ब्रिटिश काल में भी यहां धार्मिक तनाव देखा गया। 1853 में पहली बार यहां हिंसक घटना हुई, जब निर्मोही अखाड़े ने मंदिर की मांग की।

20वीं शताब्दी में विवाद और गहराया। 1949 में राम लला की मूर्ति प्रकट हुई, जिसके बाद मंदिर-मस्जिद विवाद अदालत पहुंचा। 6 दिसंबर 1992 को कारसेवकों द्वारा बाबरी मस्जिद के ढहाए जाने के बाद देशव्यापी दंगे हुए। दशकों तक चली कानूनी लड़ाई के बाद 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने राम मंदिर निर्माण की अनुमति दी और मुसलमानों को अयोध्या में ही 5 एकड़ जमीन मस्जिद के लिए आवंटित की।

इस फैसले के बाद 5 फरवरी 2020 को केंद्र सरकार ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया। 5 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर की नींव रखी। मंदिर का निर्माण विश्व प्रसिद्ध वास्तुकार चंद्रकांत सोमपुरा की देखरेख में हुआ। मुख्य मंदिर 2.7 एकड़ में बना है, जबकि पूरा परिसर 70 एकड़ में फैला है। 

22 जनवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में भव्य प्राण प्रतिष्ठा समारोह हुआ। राम लला की 51 इंच ऊंची काले पत्थर की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा हुई। इस अवसर पर लाखों भक्तों ने उत्सव मनाया। मंदिर निर्माण 25 नवंबर 2025 को पूर्ण हुआ, जब प्रधानमंत्री मोदी ने धर्म ध्वज फहराया। आज यह मंदिर भक्ति और भव्यता का प्रतीक बन चुका है।

 

Ayodhya Ram Janm Bhumi Mandir

मंदिर की धार्मिक महत्व और मान्यताएं

राम जन्मभूमि मंदिर (Ram Janm Bhumi Mandir) भगवान राम की जन्मभूमि होने के कारण हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। भगवान राम (Lord Rama) को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है और उनकी बाल लीला राम लला के रूप में यहां दर्शन होते हैं। भक्तों की मान्यता है कि यहां दर्शन करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। 

मंदिर रामायण काल से जुड़ा है। भक्तों का विश्वास है कि यहीं भगवान राम का जन्म हुआ था और यही उनकी लीलाओं का केंद्र था। राम नवमी, दीपोत्सव और अन्य त्योहारों पर यहां भक्तों की भीड़ उमड़ती है। सूर्य तिलक जैसे अनोखे वैज्ञानिक-धार्मिक प्रयोग भी यहां होते हैं, जहां सूर्य की किरणें राम लला की मूर्ति पर पड़ती हैं। यह मंदिर न केवल रामभक्तों बल्कि समूचे हिंदू समाज की आस्था का प्रतीक है।

स्थान और दिशा

राम जन्मभूमि मंदिर भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में अयोध्या शहर में स्थित है। अयोध्या सरयू नदी के तट पर बसा है और यह भारत के उत्तर भारत के मध्य-पूर्वी भाग में अवस्थित है। दिल्ली से लगभग 636 किलोमीटर, लखनऊ से 135 किलोमीटर, वाराणसी से 191 किलोमीटर और गोरखपुर से 164 किलोमीटर की दूरी पर यह पवित्र नगरी है। अयोध्या को राम की नगरी के नाम से जाना जाता है और यहां का वातावरण ही भक्ति से ओत-प्रोत है।

 

Ayodhya Ram Janm Bhumi Mandir

यात्रा का विवरण

हवाई मार्ग सड़क मार्ग रेल मार्ग
महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा अयोध्या मंदिर से मात्र 10 किलोमीटर की दूरी पर है। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसें 24 घंटे चलती हैं। अयोध्या धाम जंक्शन और अयोध्या कैंट रेलवे स्टेशन मुख्य स्टेशन हैं। देश के लगभग सभी प्रमुख शहरों से यहां ट्रेनें उपलब्ध हैं। 
दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, चेन्नई, जयपुर, पटना आदि शहरों से सीधी उड़ानें उपलब्ध हैं। दिल्ली, लखनऊ, गोरखपुर, प्रयागराज, वाराणसी आदि से नियमित बस सेवाएं हैं। वंदे भारत एक्सप्रेस सहित कई स्पेशल ट्रेनें चलती हैं। दिल्ली से ट्रेन द्वारा 12-13 घंटे, लखनऊ से 2-3 घंटे का समय लगता है।
लखनऊ का चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा 135 किलोमीटर दूर है, जहां से टैक्सी या बस द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है। निजी कार या टैक्सी से भी सुविधाजनक यात्रा संभव है। सड़कें चौड़ी और सुव्यवस्थित हैं। स्टेशन से मंदिर मात्र 5-7 किलोमीटर दूर है, जहां ऑटो, ई-रिक्शा या टैक्सी उपलब्ध हैं।
 

ठहरने की व्यवस्था

अयोध्या में भक्तों के लिए पर्याप्त ठहरने की सुविधाएं उपलब्ध हैं। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से कई धर्मशालाएं संचालित हैं। बजट विकल्प के रूप में धर्मशालाएं 300 से 1000 रुपये प्रतिदिन में उपलब्ध हैं। 

होटल विकल्प भी बढ़ गए हैं। कई होटल सरयू नदी के किनारे या मंदिर के निकट हैं। इनमें AC कमरे 1500 से 5000 रुपये तक उपलब्ध हैं। बजट में होटल जैसे श्री सुंदर गेस्ट हाउस, होटल नामो जी पैलेस 500-1500 रुपये में मिल जाते हैं। धर्मशालाएं और आश्रम भक्तों के लिए सबसे सस्ते और सुविधाजनक हैं। 

ऑनलाइन बुकिंग यात्रीधाम.ऑर्ग या ट्रस्ट की वेबसाइट से की जा सकती है। त्योहारों के समय पहले से बुकिंग करानी चाहिए।

दर्शन समय

सुबह 7:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक सुबह का दर्शन का समय है।
दोपहर 12:00 बजे से 2:00 बजे तक शुद्धि और भोग के लिए मंदिर बंद रहता है।
शाम के दर्शन के लिए मंदिर दोपहर 2:00 बजे से रात 9:00 बजे तक खुलता है।  

आरती का समय

मंगल आरती, श्रृंगार आरती आदि विशेष समय पर पास के साथ होती है। सामान्य भक्तों के लिए ऊपर दिए समय में दर्शन खुला रहता है। मंदिर प्रशासन भीड़ प्रबंधन के लिए कतार व्यवस्था करता है। राम जन्मभूमि मंदिर भक्ति की इस पावन यात्रा में हर रामभक्त को दिव्य अनुभव प्राप्त होता है।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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