सनातन धर्म में अग्नि केवल एक प्राकृतिक तत्व नहीं, बल्कि देवत्व, पवित्रता और दिव्य ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है। यही कारण है कि पूजा-पाठ, यज्ञ, हवन, गृह प्रवेश, विवाह या किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत अग्नि प्रज्ज्वलित करके की जाती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हर धार्मिक अनुष्ठान में अग्नि को ही साक्षी क्यों बनाया जाता है? अग्नि देव की ऐसी कौन-सी विशेषता है, जिसके कारण उन्हें देवताओं और मनुष्यों के बीच सेतु माना गया है?
आइए विस्तार से जानते हैं कि सनातन धर्म में अग्नि देव का क्या महत्व है, वेदों और पुराणों में उनके बारे में क्या कहा गया है और अग्नि हमें जीवन के लिए क्या सीख देती है।
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