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क्या बेटी भी कर सकती है माता-पिता का श्राद्ध? जानिए धार्मिक मान्यता

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
निधि यादव
सार

 हिंदू परंपरा में श्राद्ध को सिर्फ एक कर्मकांड नहीं, बल्कि माता-पिता और पितरों के प्रति श्रद्धा, स्मरण और कृतज्ञता से जोड़कर देखा गया है। श्राद्ध में तर्पण, पिंडदान, अन्न अर्पण, दान और पितरों का स्मरण जैसे कर्म शामिल होते हैं |

बेटा नहीं है तो क्या बेटी श्राद्ध कर सकती है? हिंदू धर्म में श्राद्ध और पितृ तर्पण से जुड़ी अलग-अलग धार्मिक परंपराएं और मान्यताएं मिलती हैं। इस वीडियो में जानिए बेटी द्वारा माता-पिता या पितरों का श्राद्ध करने को लेकर शास्त्रीय मान्यताएं क्या कहती हैं और किन परिस्थितियों में यह कर्म किया जाता है।

श्राद्ध, पिंडदान और पितृ तर्पण से जुड़े नियमों को जानने के लिए वीडियो को अंत तक देखें।

शॉर्ट वीडियो आगे देखे

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