Dussehra: दशहरे का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। हर साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाने वाला यह त्योहार भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और मां दुर्गा की महिषासुर पर जीत की याद दिलाता है। इस दिन देशभर में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दशहरे के दिन कुछ काम करना शुभ माना जाता है, जबकि कुछ बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। क्या आपने कभी सोचा है कि दशहरे पर शमी के पेड़ की पूजा क्यों की जाती है और इस दिन कौन-से काम करने से सुख-समृद्धि की कामना की जाती है? आइए जानते हैं दशहरे के दिन क्या करना चाहिए और किन कामों से बचना चाहिए।
दशहरे पर करें भगवान श्रीराम की पूजा
दशहरे के दिन भगवान श्रीराम की पूजा करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम ने इसी दिन रावण का वध कर अधर्म पर धर्म की विजय स्थापित की थी। इस दिन सुबह स्नान करने के बाद घर के मंदिर में भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए। पूजा के दौरान दीपक जलाकर फूल, फल और मिठाई अर्पित कर सकते हैं। इसके साथ ही श्रीरामचरितमानस का पाठ करना या भगवान श्रीराम के नाम का स्मरण करना भी शुभ माना जाता है।
शमी के पेड़ की पूजा करें
दशहरे के दिन शमी के पेड़ की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शमी का संबंध विजय और समृद्धि से है। पौराणिक कथाओं में भी शमी के पेड़ का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि महाभारत काल में पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान अपने अस्त्र-शस्त्र शमी के पेड़ पर छिपाए थे। अज्ञातवास पूरा होने के बाद उन्होंने इसी पेड़ से अपने शस्त्र वापस लिए थे। इसलिए दशहरे पर शमी के पेड़ की पूजा करना और उसके सामने दीपक जलाना शुभ माना जाता है। हालांकि, पेड़ की पूजा करते समय उसकी शाखाएं या पत्तियां अनावश्यक रूप से नहीं तोड़नी चाहिए।
शस्त्र और औजारों की पूजा करें
दशहरे के दिन शस्त्र पूजा करने की भी परंपरा है। पुराने समय में राजा और योद्धा युद्ध पर जाने से पहले अपने अस्त्र-शस्त्रों की पूजा करते थे। आज के समय में लोग अपने काम से जुड़े उपकरणों, मशीनों, वाहनों और औजारों की पूजा भी करते हैं। मान्यता है कि इस दिन अपने काम में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं का सम्मान करने से सफलता और उन्नति की कामना पूरी होती है। पूजा करते समय इन वस्तुओं को साफ करें और विधि-विधान से तिलक लगाकर उनका पूजन करें। यह परंपरा अपने काम के प्रति जिम्मेदारी और समर्पण का भाव भी दर्शाती है।
जरूरतमंदों को दान दें
दशहरे के दिन दान-पुण्य करना भी शुभ माना जाता है। इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद लोगों को भोजन, कपड़े, अनाज या अन्य जरूरी वस्तुएं दान कर सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं में दान को पुण्य प्राप्ति का माध्यम माना गया है। इस दिन किसी जरूरतमंद की सहायता करना, भूखे व्यक्ति को भोजन कराना या किसी असहाय व्यक्ति की मदद करना भी अच्छा माना जाता है। दान करते समय दिखावे से बचना चाहिए और अपनी क्षमता के अनुसार ही सहायता करनी चाहिए।
विजय मुहूर्त में करें शुभ कार्य
दशहरे को विजयादशमी भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन विजय मुहूर्त में कोई नया काम शुरू करना शुभ होता है। कई लोग इस अवसर पर नए व्यवसाय की शुरुआत करते हैं, खरीदारी करते हैं या अपने महत्वपूर्ण कार्यों की योजना बनाते हैं। हालांकि, किसी भी कार्य के लिए शुभ मुहूर्त का समय स्थान और पंचांग के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए यदि आप विशेष मुहूर्त में पूजा या कोई महत्वपूर्ण काम करना चाहते हैं, तो स्थानीय पंचांग की सहायता ले सकते हैं।
रावण दहन में शामिल हों
दशहरे पर रावण दहन की परंपरा भगवान श्रीराम की विजय और अहंकार के अंत का प्रतीक है। इस दिन परिवार के साथ रावण दहन देखने जाना और बच्चों को इस पर्व का धार्मिक महत्व बताना अच्छा माना जाता है। रावण दहन के माध्यम से यह संदेश दिया जाता है कि अहंकार, क्रोध और बुराई का अंत निश्चित है। कार्यक्रम में शामिल होते समय सुरक्षा नियमों का पालन करना चाहिए और जलते पुतलों या आतिशबाजी के पास जाने से बचना चाहिए।
दशहरे के दिन क्या नहीं करना चाहिए?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दशहरे के दिन किसी के साथ झगड़ा करना, अपशब्द बोलना और दूसरों का अपमान करने से बचना चाहिए। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है, इसलिए इस दिन क्रोध और अहंकार से दूर रहने का प्रयास करना चाहिए। इसके अलावा, पूजा-पाठ के दौरान साफ-सफाई का ध्यान रखें और धार्मिक परंपराओं का सम्मान करें। शमी के पेड़ या अन्य पौधों को नुकसान पहुंचाने से बचें। रावण दहन के दौरान पटाखों और आग से जुड़ी लापरवाही न करें। किसी भी व्यक्ति के प्रति द्वेष रखने के बजाय आपसी प्रेम और सद्भाव बनाए रखने का प्रयास करें।
दशहरे पर इन बातों का रखें ध्यान