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Shani Amavasya: कब है शनि अमावस्या, जानें क्या करें क्या ना करें

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कोमल
सार

Shani Amavasya: अमावस्या तिथि को हिंदू धर्म में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। यह तिथि पितरों को प्रसन्न करने के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी गई है। शनि अमावस्या के दिन पर देवों के देव महादेव और शनिदेव की पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व माना गया है।

Shani Amavasya: 
Shani Amavasya: अमावस्या तिथि को हिंदू धर्म में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। यह तिथि पितरों को प्रसन्न करने के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी गई है। शनि अमावस्या के दिन पर देवों के देव महादेव और शनिदेव की पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व माना गया है। इससे जातक को शनि की बाधा से भी मुक्ति मिल सकती है। ऐसे में चलिए जानते हैं कि आप शनि अमावस्या के दिन क्या कार्य कर सकते हैं।

कब है शनि अमावस्या ( Kab Hai Shani Amavasya) 

चैत्र माह की अमावस्या तिथि 28 मार्च को शाम 07 बजकर 55 मिनट पर शुरू हो रही है। वहीं इस तिथि का समापन 29 मार्च को दोपहर 04 बजकर 27 मिनट पर होगा। ऐसे में चैत्र अमावस्या शनिवार 29 मार्च को मनाई जाएगी। शनिवार के दिन पड़ने के कारण इसे शनि अमावस्या भी कहा जाएगा।

जरूर करें ये काम ( Shani Amavasya Par Jaroor Kare Ye Kam) 

शनि अमावस्या के दिन शुभ फलों की प्राप्ति के लिए गरीबों व जरूरतमंद लोगों को काले तिल, काला कंबल, उड़द की दाल आदि का दान करना चाहिए। इसी के साथ शनि अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की सात बार परिक्रमा करें और उसके समक्ष सरसों के तेल का दीपक भी जलाएं।ऐसा करने से जातक को शनि की बाधा से मुक्त मिल सकती है। इसी के साथ शनि अमावस्या के दिन जरूरतमंदों को भोजन कराने से भी जातक को पुण्य की प्राप्ति होती है।

करें इन मंत्रों का जप ( Kare In Mantro Ka Jap) 

शनि अमावस्या के दिन शिव जी और शनिदेव के मंत्रों का जप करने से साधक को काफी लाभ मिल सकता है।

ॐ नमः शिवाय
शिव गायत्री मंत्र -
ॐ महादेवाय विद्महे रुद्रमूर्तये धीमहि तन्नः शिवः प्रचोदयात्
महामृत्युंजय मंत्र - ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्, उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्

ॐ काकध्वजाय विद्महे खड़गहस्ताय धीमहि तन्नो मंदः प्रचोदयात

‘ओम प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:’
‘ओम शं नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये। शंयोरभि स्रवन्तु न:।।

शनि अमावस्या पर क्या न करें( Shani Amavasya Par Kya Na Kare) 

इस दिन भूलकर भी किसी मूक जानवर को परेशान न करें। गाय, कुत्ते और कौवे को कष्ट न दें, अन्यथा आप शनि के प्रकोप का कारण बन सकते हैं।

बुरे कर्म करने वालों को शनिदेव के प्रकोप का सामना करना पड़ता है, इसलिए शनि अमावस्या के दिन भूलकर भी माता-पिता, गुरु, बुजुर्गों, महिलाओं का अपमान न करें। ऐसा करने वालों को भविष्य में शनिदेव के बुरे प्रभावों का सामना करना पड़ता है।

चैत्र अमावस्या यानी शनिश्चरी अमावस्या के दिन नाखून, बाल, दाढ़ी काटना अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से शनि दोष लगता है। बनते हुए काम बिगड़ जाते हैं।

शनिश्चरी अमावस्या और सूर्य ग्रहण के संयोग में तामसिक भोजन न करें, निंदा न करें, गलत तरीकों से कमाई न करें। इससे आर्थिक, मानसिक और शारीरिक नुकसान हो सकता है।

शनि अमावस्या के दिन भूलकर भी क्रोध, छल, कपट, असहायों को परेशान करने जैसे काम न करें। शनि आपको दंड दिए बिना नहीं छोड़ेंगे।

शनि अमावस्या के दिन यदि कोई दिव्यांग या असहाय व्यक्ति मदद की गुहार लगा रहा हो तो उसे नजरअंदाज या शर्मिंदा न करें, बल्कि उसकी मदद करें। ऐसा करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं।

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