Temple Importance: हिन्दू धर्म में मंदिरों का द्वार स्वयं एक देवत्व का प्रतीक माना जाता है, क्योंकि वहीं से साधक ईश्वर के सान्निध्य में प्रवेश करता है और वहीं से बाहर जाकर संसार का सामना करता है।
Mandir Dwar Ka Mahatva: हिन्दू धर्म में पूजा के बाद मंदिर से निकलते समय नंदी या मंदिर के द्वार पर प्रणाम करने का विशेष महत्व बताया गया है। कथाओं और परंपराओं के अनुसार, नंदी भगवान शिव के परम भक्त और गणों के प्रमुख हैं। मान्यता है कि शिवजी तक अपनी प्रार्थना पहुंचाने के लिए नंदी के माध्यम से भाव व्यक्त करना अत्यंत फलदायी होता है। पंडित प्रदीप मिश्रा जी महाराज ने कहा कि मंदिर में प्रवेश से पहले और बाहर निकलते समय प्रणाम करने से अहंकार का त्याग होता है। नंदी को प्रणाम करने से भक्ति, अनुशासन और विनम्रता का भाव जागृत होता है।
पंडित प्रदीप मिश्रा जी महाराज ने अपने एक वीडियो में कहा कि एक बात अपने अंदर उतार कर रखें कि भगवान शिव के मंदिर में जब जल चढ़ा कर आप घर वापस लौटें, तो अपने घर की ओर मुख करके एक बार जल चढ़ाएं। एक बार दरवाजे के पास खड़े होकर या नंदी के पास खड़े होकर देवाधिद महादेव को नमन जरूर करें।
इन मंत्रों का अवश्य करें जाप
कुछ नहीं बन सके तो हर हर महादेव जरूर बोलें। ये भी न बन सके तो पंचाक्षर मंत्र ऊं नम: शिवाय अवश्य बोला करे। ये भी न हो सके तो श्री शिवाय नमस्तुभ्यम जरूर बोलें। हो सकता है हमारे पूजन में, हमारी अर्चना में, हमारी साधना में, हमारी आराधना में, भगवान की आराधना में, जल चढ़ाने में, पूजन करने में, कोई भगवान का भजन करने में कोई कमी रह गई हो, तो हम चलते चलते, जैसे आप लोग जाते हो, तो जाते जाते कहते हैं न, भईया अगर कुछ कहने में गलती होई हो, तो छमा करना भईया, हम आपसे हाथ जोड़ते हैं।
अर्थात, शिव की साधना में, शंकर भगवान के मंदिर से जल चढ़ाकर, पूजन करके, आराधना करके, साधना करके, विनय करके, पशुपती व्रत करके, प्रदोष व्रत करके, हरतालिका तीज करके, कोई भी व्रत करके, सोमवार व्रत करके या कोई भी व्रत कर रहे हो, भगवान या किसी देवता के मंदिर में आप भले ही ये करें या न करें, लेकिन भगवान शिव के मंदिर में जरूर करें।
गलती के लिए ऐसे मांगे क्षमा
शिव के मंदिर में जब जल चढ़ा कर वापिस जाओ, तो एक क्षण के लिए पलट कर वापिस शंकर भगवान को नम: शिवाय, ओम नम: शिवाय या श्री शिवाय नमस्तुभ्यम् अपने मुख से अवश्य बोलें। वो एक बार बोलकर प्रणाम करके फिर चल के आया करो, क्यों? अगर हम से कोई गलती हुई हो, तो मेरे बाबा अपनी बेटी बेटा जानकर, क्षमा कर देना और हमारा भंडार खुशियों से भर देना, भगवान शिव से ऐसी कृपा अवश्य करें।
मंदिर द्वार का महत्व
पंडित प्रदीप मिश्रा जी कहते हैं कि मंदिर का द्वार स्वयं एक देवत्व का प्रतीक माना जाता है, क्योंकि वहीं से साधक ईश्वर के सान्निध्य में प्रवेश करता है और वहीं से बाहर जाकर संसार का सामना करता है। द्वार पर प्रणाम करने से यह भाव बनता है कि “हे प्रभु, जो शांति और संस्कार यहां मिले हैं, वे मेरे जीवन में बने रहें।” इस परंपरा का सार यही है कि पूजा केवल मंदिर के भीतर ही नहीं, बल्कि मंदिर से निकलने के बाद के आचरण में भी दिखाई देनी चाहिए।