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Swami Ashutoshanand Giri Ji: जीवन में भ्रूण हत्या और ब्रह्महत्या से मुक्ति और विष्णु पद की कैसे होगी प्राप्ति?

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
स्वामी आशुतोषानंद गिरि जी महाराज
सार

Spiritual Remedies: कामिका एकादशी का व्रत ब्रह्महत्या और भ्रूण हत्या जैसे महापापों के प्रायश्चित का मार्ग बताने वाला तथा भगवान विष्णु के परम धाम की प्राप्ति कराने वाला माना गया है। 
 

Swami Ashutoshanand Giri Ji
Religious Beliefs: सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। वर्ष भर आने वाली सभी एकादशियों में कामिका एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की श्रद्धापूर्वक पूजा, व्रत और भक्ति करने से अनेक प्रकार के पापों का क्षय होता है तथा व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्राप्त होता है। स्वामी आशुतोषानंद गिरि जी महाराज कहते हैं कि शास्त्रों में एक प्रसिद्ध श्लोक मिलता है “ब्रह्महत्या पहारिणी, भ्रूणहत्या विनाशिनी, वैष्णव स्थान दात्री च, महापुण्य फलप्रदा।” इसका अर्थ है कि कामिका एकादशी का व्रत ब्रह्महत्या और भ्रूण हत्या जैसे महापापों के प्रायश्चित का मार्ग बताने वाला तथा भगवान विष्णु के परम धाम की प्राप्ति कराने वाला माना गया है। यह धार्मिक विश्वास है, जिसे श्रद्धा और आस्था के साथ माना जाता है।

कामिका एकादशी भगवान श्रीहरि विष्णु को अत्यंत प्रिय मानी जाती है। इस दिन व्रत रखने, विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने, श्रीमद्भगवद्गीता का अध्ययन करने तथा तुलसी दल अर्पित करके भगवान विष्णु की पूजा करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। मान्यता है कि यदि किसी व्यक्ति से जीवन में जाने-अनजाने कोई गंभीर भूल हो गई हो, किसी ब्राह्मण का अपमान या तिरस्कार हुआ हो अथवा किसी अन्य प्रकार का धार्मिक अपराध हुआ हो, तो वह सच्चे मन से भगवान से क्षमा मांगकर इस व्रत को करे। ईश्वर के प्रति समर्पण, पश्चाताप और सद्कर्म का संकल्प व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम बनता है।

भ्रूण हत्या के दोष से मुक्ति 

धार्मिक मान्यता के अनुसार यदि किसी परिवार में किसी कारणवश गर्भस्थ शिशु की मृत्यु हुई हो और परिवार के सदस्य आध्यात्मिक रूप से प्रायश्चित करना चाहते हों, तो कामिका एकादशी का व्रत श्रद्धा के साथ किया जा सकता है। इस दिन भगवान विष्णु का पूजन करें, गरीबों और जरूरतमंदों को दान दें, गौसेवा करें तथा अपने जीवन में सदाचार और करुणा का पालन करने का संकल्प लें। केवल व्रत ही नहीं, बल्कि सच्चा पश्चाताप, ईश्वर से क्षमा याचना और अच्छे कर्म भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माने गए हैं।

कब है कामिका एकादशी

वर्ष 2026 में कामिका एकादशी का व्रत उदया तिथि के अनुसार 9 अगस्त, रविवार को रखा जाएगा। एकादशी तिथि का प्रारंभ 8 अगस्त 2026, शनिवार को दोपहर लगभग 2 बजे होगा और इसका समापन 9 अगस्त को प्रातः 11 बजकर 5 मिनट पर होगा। चूंकि व्रत का निर्णय उदया तिथि के आधार पर किया जाता है, इसलिए अधिकांश श्रद्धालु 9 अगस्त को ही कामिका एकादशी का व्रत करेंगे।

व्रत का पारण कब करें

कामिका एकादशी का पारण 10 अगस्त 2026, सोमवार को सुबह 6 बजे से 8 बजे के बीच करना शुभ माना गया है। धार्मिक परंपरा के अनुसार द्वादशी तिथि में ही पारण करना चाहिए। इसलिए समय का विशेष ध्यान रखें और विधिपूर्वक भगवान विष्णु का स्मरण करके व्रत का समापन करें।

भगवान विष्णु की कृपा पाने का सरल उपाय

कामिका एकादशी के दिन प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। भगवान विष्णु का पूजन करें, तुलसी दल अर्पित करें, दीप जलाएं, विष्णु सहस्रनाम या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें। दिनभर यथाशक्ति उपवास रखें और रात्रि में भगवान के नाम का स्मरण करें। श्रद्धा, भक्ति और सच्चे मन से किया गया यह व्रत भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने तथा आध्यात्मिक शांति और पुण्य की प्राप्ति का श्रेष्ठ माध्यम माना गया है।

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