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Govind Dev Giri Ji Maharaj: कैसे करते हैं सही नेतृत्व? स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज ने बताया इसका रहस्य

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज
सार

Govind Dev Giri Ji Maharaj: स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज का यह प्रवचन विभिन्न धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों में व्यापक चर्चा का विषय बन रहा है। उन्होंने युवा नेतृत्व को सलाह दी कि पद या पदवी पाने से पहले सेवा की भावना विकसित करनी चाहिए।

Govind Dev Giri Ji Maharaj:
Govind Dev Giri Ji Maharaj: स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज ने सच्चे नेतृत्व के रहस्य को लेकर गहन संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि सच्चा नेतृत्व सेवा से शुरू होता है। महाराज जी ने महाभारत के पात्र अर्जुन के उदाहरण से समझाया कि नेता को स्वयं आगे बढ़कर सेवा करनी चाहिए, न कि केवल आदेश देने वाला मैनेजर बनकर रह जाना चाहिए।

महाराज जी ने कहा, “भगवान अर्जुन के रथ के घोड़ों की सेवा करते हैं। उन घोड़ों को पानी पिलाते हैं स्वयं। उनकी पीठ पर हाथ फेरते हैं, उनका दाना-पानी, उनके घाव ठीक करते हैं। घोड़ों की सेवा।” उन्होंने आगे कहा कि आजकल हम लोग इस भावना से कोसों दूर हो गए हैं। “हम होते ना तो लिजा करके पहुंचा देते हैं घोड़ों को और कहते हैं ये भाई देखो, इनके ओर जरा देखो, आप देखो। हम सब लोग मालिक हो गए।”

स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज ने स्पष्ट किया कि प्रबंधन और आदेश देना आवश्यक है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। “आवश्यकता केवल मैनेजमेंट की आदेश देने की नहीं होती है, वो कर्तव्य होता है तो वो भी करना पड़ता है, लेकिन जब आवश्यकता होती है तो मुझे स्वयं झुक करके हर काम करना आना चाहिए। कोई काम छोटा नहीं, कोई काम...”

महाराज जी का यह संदेश आज के नेतृत्व वर्ग, प्रशासन, समाजसेवी संगठनों और युवा पीढ़ी के लिए बेहद प्रासंगिक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सच्चा नेता वह है जो स्वयं सेवा का उदाहरण प्रस्तुत करता है। जब नेता स्वयं छोटे-से-छोटे कार्य में हाथ बंटाता है, तभी वह अपने अनुयायियों और टीम में सच्ची प्रेरणा और समर्पण जगाता है।

सेवा ही नेतृत्व का आधार

महाराज जी ने बताया कि अर्जुन जैसे महान योद्धा और भगवान श्रीकृष्ण के सखा भी अपने रथ के घोड़ों की स्वयं सेवा करते थे। वे घोड़ों को पानी पिलाते, उनकी पीठ थपथपाते, उनके घावों का इलाज करते और उनका भोजन-जल का प्रबंध स्वयं देखते थे। यह सेवा का भाव ही उन्हें महान बनाता था।

आज के समय में हमने व्यवस्था और प्रबंधन को इतना बढ़ा-चढ़ा दिया है कि असली सेवा का भाव कहीं खो सा गया है। लोग काम को छोटा-बड़ा बताकर खुद से दूर कर देते हैं। महाराज जी ने कहा कि कोई काम छोटा नहीं होता। जब तक नेता स्वयं झुककर काम नहीं करेगा, तब तक टीम में सच्ची लगन और निष्ठा नहीं आएगी।

युवाओं और नेताओं के लिए संदेश

स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज का यह प्रवचन विभिन्न धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों में व्यापक चर्चा का विषय बन रहा है। उन्होंने युवा नेतृत्व को सलाह दी कि पद या पदवी पाने से पहले सेवा की भावना विकसित करनी चाहिए। सच्चा नेतृत्व पद पर आसीन होने से नहीं, बल्कि सेवा करने की तैयारी से शुरू होता है। महाराज जी के अनुसार, जब कोई व्यक्ति स्वयं सेवा के लिए तैयार होता है, तभी वह दूसरों को प्रेरित कर सकता है। 

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