facebook pixel
विज्ञापन
Home  dharm  saint stories  devi maheshwari ji told what was mirabai s unwavering devotion to lord krishna

Devi Maheshwari Ji: मीराबाई का भगवान कृष्ण के प्रति कैसा था अटूट समर्पण, देवी माहेश्वरी जी ने बताया

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कथावाचक देवी माहेश्वरी जी (श्रीजी)
सार

Path of Devotion: सच्ची भक्ति में किसी प्रकार का स्वार्थ नहीं होता। मीराबाई ने कभी भगवान से धन, वैभव या सुख नहीं मांगा। उन्होंने केवल श्रीकृष्ण का प्रेम और उनके चरणों में स्थान चाहा। 
 

Devi Maheshwari Ji
Meera Bai Devotion: भक्ति की परंपरा में मीराबाई का नाम अत्यंत श्रद्धा और प्रेम के साथ लिया जाता है। उनका संपूर्ण जीवन भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति को समर्पित था। उन्होंने सांसारिक सुख, वैभव और सम्मान से अधिक अपने गिरधर गोपाल को महत्व दिया। उनके लिए श्रीकृष्ण केवल भगवान नहीं थे, बल्कि उनके जीवन, उनके प्राण और उनके सर्वस्व थे। उन्होंने हर परिस्थिति में अपने आराध्य का नाम लिया और कभी भी अपनी भक्ति से पीछे नहीं हटीं। यही कारण है कि आज भी मीराबाई को अटूट भक्ति और समर्पण का सबसे बड़ा उदाहरण माना जाता है।

देवी माहेश्वरी जी के अनुसार एक बार मीराबाई अपने प्रिय गिरधर गोपाल की छोटी प्रतिमा को अपने हृदय से लगाकर एक वृक्ष के नीचे विश्राम कर रही थीं। लगातार यात्राओं, कठिन तप और भक्ति के कारण उनका शरीर बहुत थक चुका था। वे गहरी नींद में थीं और उन्हें अपने आसपास की किसी भी बात का आभास नहीं था। उनके जीवन में अनेक कठिनाइयाँ आई थीं, लेकिन उन्होंने कभी भी भगवान का साथ नहीं छोड़ा।

भगवान श्रीकृष्ण का प्रेमपूर्ण आगमन

जब मीराबाई गहरी निद्रा में थीं, तभी स्वयं भगवान श्रीकृष्ण वहां प्रकट हुए। उन्होंने अपनी परम भक्त को बड़े प्रेम और करुणा से देखा। भगवान यह देखकर भावुक हो गए कि उनकी भक्ति के मार्ग पर चलने वाली मीरा ने कितने कष्ट सहन किए हैं। उनके हृदय में अपनी भक्त के लिए अपार स्नेह उमड़ पड़ा। कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण की आंखों से प्रेम और करुणा के आंसू बहने लगे। मानो वे मन ही मन कह रहे हों कि "मीरा, तुम्हें मेरी भक्ति के कारण बहुत कष्ट सहने पड़े हैं, फिर भी तुमने कभी मेरा साथ नहीं छोड़ा।"

प्रभु ने स्वयं दूर किए भक्त के कष्ट

भगवान श्रीकृष्ण केवल मीराबाई को निहारते ही नहीं रहे, बल्कि उन्होंने स्वयं उनके पैरों में चुभे हुए कांटों को बहुत प्रेम से निकाल दिया। मीराबाई इतनी गहरी नींद में थीं कि उन्हें इसका तनिक भी आभास नहीं हुआ। इसके बाद भगवान ने स्नेहपूर्वक एक चादर ओढ़ाकर उन्हें ढक दिया ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो। यह दृश्य इस बात का प्रतीक है कि सच्चे भक्त के दुख को भगवान स्वयं अपना दुख मानते हैं और समय आने पर उसकी रक्षा भी करते हैं।

राधारानी ने देखा अद्भुत दृश्य

इसी बीच राधारानी ने देखा कि श्यामसुंदर अपने स्थान पर नहीं हैं। उन्होंने प्रेमपूर्वक खोज की तो पाया कि श्रीकृष्ण मीराबाई के पास खड़े हैं और अपनी भक्त की सेवा कर रहे हैं। यह देखकर राधारानी समझ गईं कि भगवान अपने निष्कपट और सच्चे भक्तों पर कितना असीम प्रेम बरसाते हैं। भगवान के लिए भक्त का निष्कलंक प्रेम सबसे अधिक प्रिय होता है।

मीराबाई की भक्ति से मिलने वाली प्रेरणा

यह प्रसंग हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति में किसी प्रकार का स्वार्थ नहीं होता। मीराबाई ने कभी भगवान से धन, वैभव या सुख नहीं मांगा। उन्होंने केवल श्रीकृष्ण का प्रेम और उनके चरणों में स्थान चाहा। जब भक्त पूरी निष्ठा, विश्वास और समर्पण के साथ भगवान का स्मरण करता है, तब भगवान भी उसकी रक्षा के लिए स्वयं उपस्थित हो जाते हैं। मीराबाई का जीवन हमें यही प्रेरणा देता है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी यदि ईश्वर पर विश्वास अटूट बना रहे, तो उनकी कृपा अवश्य प्राप्त होती है। यही कारण है कि मीराबाई की भक्ति आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए अटूट प्रेम, विश्वास और समर्पण का अमूल्य आदर्श बनी हुई है।

ये भी पढ़ें -  वेद-पुराणों में अहिंसा को सर्वोच्च धर्म क्यों माना गया है? जानिए धार्मिक मान्यता

ये भी देखें

Pandit Pradeep Mishra Ji Maharaj
पंडित प्रदीप मिश्रा जी महाराज
10 August 2026
Shivling Puja
नीरज के. पटेल
10 August 2026
Swami Govind Dev Giri Ji Maharaj
नीरज के. पटेल
10 August 2026
Sadhvi Ritambhara Didi
साध्वी ऋतम्भरा दीदी
09 August 2026
Swami Raghavacharya Ji Maharaj
स्वामी श्री राघवाचार्य जी महाराज
09 August 2026

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel