facebook pixel
विज्ञापन
Home›  dharm›  rama ekadashi par kya kare kya na kare janiye maatav

Rama Ekadashi : रमा एकादशी पर क्या करें क्या न करें जानिए महत्व

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कोमल शर्मा
सार

Rama Ekadashi : हिंदू कैलेंडर के अनुसार, कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को 'रमा एकादशी' का व्रत रखा जाता है। यह एकादशी दिवाली से ठीक चार दिन पहले आती है। चूंकि 'रमा' देवी लक्ष्मी का ही एक नाम है

Rama Ekadashi : 
Rama Ekadashi :  हिंदू कैलेंडर के अनुसार, कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को 'रमा एकादशी' का व्रत रखा जाता है। यह एकादशी दिवाली से ठीक चार दिन पहले आती है। चूंकि 'रमा' देवी लक्ष्मी का ही एक नाम है इसलिए इस दिन भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी दोनों की पूजा करने का विशेष महत्व है। माना जाता है कि जो लोग सच्चे मन से यह व्रत रखते हैं उनके सभी पाप धुल जाते हैं और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। यदि आप रमा एकादशी का व्रत रख रहे हैं या पूजा-अर्चना के माध्यम से भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी का आशीर्वाद पाना चाहते हैं तो आपको इस दिन कुछ जरूरी नियमों का पालन करना चाहिए।

रमा एकादशी पर क्या करें?

रमा एकादशी का दिन पूरी तरह से भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की भक्ति को समर्पित है। इन नियमों का पालन करने से आपको इस व्रत का पूर्ण फल प्राप्त हो सकता है

जल्दी उठें और स्नान करें: सूर्योदय से पहले उठें और स्नान करें संभव हो तो किसी पवित्र नदी में अन्यथा घर पर ही स्नान करें। साफ कपड़े पहनें।

संकल्प लें: स्नान के बाद, गंगाजल से अपने पूजा स्थल को शुद्ध करें। अपने हाथों में जल और फूल लेकर व्रत रखने का संकल्प लें।

भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा करें: अपने घर के पूजा स्थल पर भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की मूर्तियां या चित्र स्थापित करें। पंचामृत से उनका अभिषेक करें।

भोग और अर्पण: देवी-देवताओं को चंदन, पीले फूल, भोग और तुलसी के पत्ते अर्पित करें। भगवान विष्णु को चढ़ाया जाने वाला कोई भी भोग तुलसी के पत्तों के बिना अधूरा माना जाता है।

मंत्रों का जाप और पवित्र ग्रंथों का पाठ करें:


पूरे दिन "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र और "हरे कृष्ण" महामंत्र का जाप करें। विष्णु सहस्रनाम या श्री सूक्त का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। 

व्रत कथा सुनें: रमा एकादशी से जुड़ी कथा पढ़ें या सुनें। इस कथा को सुने बिना व्रत अधूरा माना जाता है।

 रात्रि जागरण: यदि संभव हो, तो रात में जागकर भगवान विष्णु के भजन-कीर्तन करें और उनका ध्यान करें। माना जाता है कि ऐसा करने से व्यक्ति को वैकुंठ  की प्राप्ति होती है।

दान: एकादशी के दिन अपनी क्षमता के अनुसार गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र, फल या धन का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।

रमा एकादशी के दिन किन बातों से बचना चाहिए?

एकादशी का व्रत केवल भोजन त्यागने तक सीमित नहीं है इसके लिए मन, वाणी और कर्म की शुद्धि भी आवश्यक है। निम्नलिखित बातों से बचें:

अनाज का सेवन न करें: एकादशी के दिन चावल, गेहूं, जौ, बाजरा और सभी प्रकार की दालों का सेवन पूरी तरह वर्जित है।

'तामसिक'  भोजन: प्याज, लहसुन, मांस, मछली, शराब या किसी भी अन्य 'तामसिक' वस्तु का सेवन न करें।

तुलसी के पत्ते न तोड़ें: एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए, क्योंकि इस दिन स्वयं माता तुलसी भी व्रत रखती हैं।

दिन में सोना: दिन के समय सोना विशेषकर सुबह की पूजा के बाद वर्जित माना गया है।

क्रोध और कठोर भाषा: अपने मन को शांत रखें। बहस, विवाद, झूठ बोलने या दूसरों के प्रति अपशब्दों या कठोर भाषा का प्रयोग करने से बचें।

ब्रह्मचर्य का पालन: एकादशी के दिन शारीरिक और मानसिक रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।

दूसरों की बुराई करना: दूसरों की आलोचना करने या किसी के बारे में नकारात्मक बातें कहने से बचें। व्रत खोलने में जल्दबाजी न करें: व्रत अगले दिन द्वादशी तिथि के शुभ समय में खोलना चाहिए। 'हरि वासर' और द्वादशी तिथि के समाप्त होने से पहले व्रत खोलना आवश्यक है।माना जाता है कि रमा एकादशी का व्रत रखने से उतना ही पुण्य मिलता है, जितना कि एक हजार अश्वमेध यज्ञ करने से मिलता है। इन नियमों का पालन करके, कोई भी भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी का विशेष आशीर्वाद प्राप्त कर सकता है।

यह भी पढ़ें 

Rama Ekadashi: रमा एकादशी के दिन इन चीजों का करें दान, घर में बनी रहेगी सुख-समृद्धि! 

Rama Ekadashi: रमा एकादशी के दिन इन 5 मंत्रों का करें जाप, जीवन में नहीं आएंगी परेशानियां! 

Ahoi Ashtami: अहोई अष्टमी पर अहोई माता की तस्वीर में आठ कोष्ठक क्यों बनाए जाते हैं? जानें धार्मिक महत्व


(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel