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Pradyumna Ganesh Chaturthi: कब है प्रद्युम्न गणेश चतुर्थी, जानिए तिथि शुभ मुहूर्त औऱ पूजा विधि

jeevanjaliPublished by:
कोमल शर्मा
सार

Pradyumna Ganesh Chaturthi: हर साल ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को प्रद्युम्न गणेश चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। भगवान गणेश की पूजा भी विधि-विधान से की जाती है। प्रद्युम्न का मतलब है ज्ञान की रोशनी।

Pradyumna Ganesh Chaturthi
Pradyumna Ganesh Chaturthi: हर साल ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को प्रद्युम्न गणेश चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। भगवान गणेश की पूजा भी विधि-विधान से की जाती है। प्रद्युम्न का मतलब है ज्ञान की रोशनी। इसलिए, धार्मिक शास्त्रों में इस चतुर्थी पर ज्ञान मुद्रा में भगवान गणेश की पूजा करने का नियम बताया गया है। इस गणेश चतुर्थी को विनायक प्रद्युम्न चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से जीवन की सभी परेशानियां दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, प्रद्युम्न गणेश चतुर्थी का व्रत 18 जून को है। प्रद्युम्न गणेश चतुर्थी की पूजा दोपहर में की जाती है। आइए जानें प्रद्युम्न गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा का शुभ समय और तरीका।

प्रद्युम्न गणेश चतुर्थी की तारीख

दृक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 17 जून को रात 9:38 बजे शुरू होगी।
ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की यह चतुर्थी तिथि अगले दिन, यानी 18 जून को शाम 6:58 बजे खत्म होगी।
इस लिहाज़ से, प्रद्युम्न गणेश चतुर्थी का व्रत 18 जून, 2026 को रखा जाएगा और उसी दिन दोपहर के शुभ समय में भगवान गणेश की पूजा की जाएगी।

प्रद्युम्न गणेश चतुर्थी पूजा का शुभ समय

दृक पंचांग के अनुसार, प्रद्युम्न गणेश चतुर्थी पर दोपहर का मुहूर्त सुबह 10:58 बजे शुरू होगा। यह शुभ समय दोपहर 1:46 बजे तक रहेगा। इस दौरान भगवान गणेश की पूजा करने से खास फ़ायदा हो सकता है।

प्रद्युमन गणेश चतुर्थी पूजा विधि

प्रद्युमन गणेश चतुर्थी की सुबह नहाकर साफ कपड़े पहनें।

फिर व्रत का संकल्प लें।

इसके बाद पूजा की जगह पर भगवान गणेश की तस्वीर या मूर्ति रखें।

फिर एक आसन पर बैठकर भगवान गणेश का ध्यान करें।

इसके बाद भगवान गणेश को जल, फूल, बिना टूटे चावल, दूर्वा घास, धूप, दीप और प्रसाद चढ़ाएं।

पूजा के दौरान, प्रद्युम्न चतुर्थी व्रत का पाठ करें या सुनें।

कम से कम गणेश चालीसा का पाठ करें।

आखिर में, भगवान गणेश की आरती करके पूजा खत्म करें।

अगर हो सके, तो पूरे दिन व्रत रखें।
 

प्रद्युम्न गणेश चतुर्थी व्रत के लाभ 


भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है। इस व्रत को करने से जीवन में आ रही बड़ी से बड़ी बाधाएं, रुकावटें और परेशानियां दूर हो जाती हैं। यदि आपके किसी काम में लगातार अड़चनें आ रही हैं, तो यह व्रत उन्हें समाप्त करता है।

इस व्रत के प्रभाव से घर में सुख-शांति का वास होता है और दरिद्रता दूर होती है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे लोगों के लिए यह व्रत विशेष रूप से फलदायी माना जाता है, क्योंकि इससे धन और समृद्धि के मार्ग खुलते हैं।

भगवान गणेश बुद्धि और विवेक के दाता हैं। विद्यार्थी वर्ग या किसी भी क्षेत्र में ज्ञान अर्जित करने वाले लोगों के लिए यह व्रत मानसिक एकाग्रता, स्मृति शक्ति और सही निर्णय लेने की क्षमता (विवेक) को बढ़ाता है।

यह व्रत परिवार की खुशहाली और बच्चों की लंबी आयु व अच्छी सेहत के लिए भी रखा जाता है। ऐसा माना जाता है कि माताएं जब अपनी संतान के कल्याण के लिए यह व्रत रखती हैं, तो भगवान गणेश उनकी संतान की हर संकट से रक्षा करते हैं।

जो भक्त इस दिन उपवास रखकर चंद्रोदय (चंद्रमा के निकलने) के बाद अर्घ्य देकर अपना व्रत खोलते हैं, उनकी सभी जायज और अधूरी मनोकामनाएं गणपति जी की कृपा से शीघ्र पूरी होती हैं।

 

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